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ईरान के खिलाफ छह महीने की जंग में अमेरिका ने खर्च किए 38 अरब डॉलर: CBO Report

TCN Desk TCN Desk | 58m ago · 5 min read
ईरान के खिलाफ छह महीने की जंग में अमेरिका ने खर्च किए 38 अरब डॉलर: CBO Report

रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि युद्ध जारी रहने पर हर महीने करीब 3 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च होगा।

ईरान के खिलाफ छह महीने से जारी अमेरिकी युद्ध पर अब तक 38 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। अमेरिकी संसद की गैर-दलीय संस्था ‘कांग्रेसनल बजट ऑफिस’ (CBO) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि युद्ध जारी रहने पर हर महीने करीब 3 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च होगा। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब ट्रंप प्रशासन युद्ध समाप्त करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने के रास्ते तलाश रहा है।

CBO ने अपनी गणना में 1 अगस्त तक के खर्च को शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार,

युद्ध के कारण वर्ष 2027 के शुरुआती तीन महीनों में अमेरिका की महंगाई दर करीब 0.5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

वहीं रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि,

युद्ध का बढ़ता खर्च अमेरिका की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर सकता है। अगस्त में अमेरिका का कुल सार्वजनिक कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया था। राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर ईरान युद्ध की तुलना 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद शुरू हुए इराक और अफगानिस्तान युद्धों से करते हैं।

Reuters के अनुसार,

आठ वर्षों तक चले इराक युद्ध में अमेरिका ने करीब 2 खरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी के ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ प्रोजेक्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में दो दशक तक चले अमेरिकी युद्ध की कुल लागत लगभग 2.3 खरब डॉलर रही।

लगातार बढ़ते सैन्य खर्च से अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर भारी दबाव पड़ा है। ऊर्जा की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे यह चिंता बढ़ रही है कि यदि दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में नया संघर्ष शुरू होता है, तो अमेरिका उससे निपटने के लिए कितना तैयार होगा। युद्ध का खर्च अमेरिकी संघीय बजट पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रहा है, जो पहले से ही बढ़ते कर्ज और घाटे की समस्या से जूझ रहा है।

CBO रिपोर्ट में बताया गया है कि,

युद्ध का अधिकांश खर्च बड़ी संख्या में हथियारों और गोला-बारूद के इस्तेमाल के कारण हुआ है। CBO का अनुमान है कि अमेरिकी हथियार भंडार को दोबारा मौजूदा स्तर तक पहुंचाने में करीब पांच साल लग सकते हैं।

Reuters ने अगस्त में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है। CBO ने यह भी कहा कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने संसदीय वित्तीय लेखा परीक्षकों के साथ जांच में सहयोग नहीं किया।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Anna Kelly ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर किए गए हमलों को “निर्णायक कार्रवाई” बताया। उन्होंने कहा कि,

ये हमले ईरान को अमेरिकी सैनिकों और हितों को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए किए गए थे। केली ने दावा किया कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और सैन्य भंडार मौजूद है।

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता Sean Parnell ने भी हथियारों की कमी से संबंधित रिपोर्ट के निष्कर्षों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जिस समय और जिस स्थान पर हमला करना चाहें, उसके लिए अमेरिका के पास सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। युद्ध के खर्च की यह जांच अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की बजट समिति के शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य Brendan Boyle के अनुरोध पर की गई थी।

Boyle ने कहा,

ट्रंप के विनाशकारी ईरान युद्ध में बहादुर अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं। इस मानवीय कीमत के अलावा CBO की गैर-दलीय रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि युद्ध में अमेरिकी करदाताओं के दसियों अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं और यह खर्च लगातार बढ़ रहा है।” ईरान युद्ध में अब तक 18 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत हो चुकी है।

CBO रिपोर्ट में होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हाल में हुए हमलों और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों से जुड़े खर्च को शामिल नहीं किया गया है। युद्ध के लिए कर्ज लेकर जुटाए गए धन पर लगने वाले ब्याज की लागत भी गणना में शामिल नहीं है। यह खर्च कुल लागत में 10 अरब डॉलर और जोड़ सकता है।

CBO के अनुसार,

मिसाइल इंटरसेप्टर सहित महत्वपूर्ण हथियारों की कमी अमेरिका की व्यापक रक्षा तैयारियों को प्रभावित कर सकती है। चीन और ताइवान के बीच संभावित संघर्ष जैसी स्थिति में पेंटागन की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

जुलाई में सीनेट की सुनवाई के दौरान

अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने हथियारों का भंडार दोबारा भरने के लिए लगभग 90 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता मांगी थी। Hegseth ने कहा था, “यदि यह धन नहीं मिला, तो हमें महत्वपूर्ण हथियारों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा।

पेंटागन के महानिरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों की सैकड़ों इमारतों को क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिया है। लड़ाकू विमानों, ईंधन भरने वाले विमानों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचा है। महानिरीक्षक ने 19 जून तक युद्ध की लागत 33.4 अरब डॉलर आंकी थी। इसमें ईरानी हमलों से अमेरिकी राजनयिक परिसरों को हुए करीब 18.4 करोड़ डॉलर के नुकसान को भी शामिल किया गया था।

इससे पहले 21 जुलाई को सीनेट की सुनवाई में Hegseth ने युद्ध का खर्च लगभग 37.5 अरब डॉलर बताया था, जो CBO के नए अनुमान के करीब है।