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उत्तराखंड की बिजली खरीद डील में अडाणी को फायदा पहुंचाने के लिए 84 नियम बदले गए: कांग्रेस

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 4 min read
उत्तराखंड की बिजली खरीद डील में अडाणी को फायदा पहुंचाने के लिए 84 नियम बदले गए: कांग्रेस

कांग्रेस का दावा है कि इस डील से राज्य के उपभोक्ताओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने 1,320 मेगावाट की बिजली खरीद से जुड़े टेंडर के 84 नियमों में बदलाव कर अडाणी समूह को फायदा पहुंचाया। पार्टी का दावा है कि इस 25 वर्षीय समझौते से राज्य के उपभोक्ताओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पहले एक सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली परियोजना को रद्द किया और फिर नए टेंडर की शर्तों को तब तक बदला, जब तक वे Adani Power के अनुकूल नहीं हो गईं।


पवन खेड़ा ने कहा,

यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे एक राज्य सरकार ने पहले अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को खत्म किया और फिर प्रतिस्पर्धी टेंडर के हर नियम को एक खास कंपनी के अनुकूल बना दिया।

मूल परियोजना को उत्तराखंड में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए यूजेवीएन लिमिटेड और THDC India Ltd के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित किया जाना था। खेड़ा ने आरोप लगाया कि,

संयुक्त उपक्रम के गठन के कुछ ही महीनों बाद परियोजना को रद्द कर दिया गया। उसी समय Adani Power छत्तीसगढ़ स्थित Lanco Amarkantak Power Ltd को दिवाला प्रक्रिया के माध्यम से खरीद रही थी।

उन्होंने कहा कि,

इस अधिग्रहण में कोरबा में निर्माणाधीन 1,320 मेगावाट की विस्तार परियोजना भी शामिल थी। इसके बाद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए नया टेंडर जारी किया। खेड़ा का आरोप है कि इसकी शर्तों में लगातार बदलाव किए गए, जिससे अंततः Adani Power टेंडर लेने के लिए सफल बिडर बनकर उभरी।

खेड़ा ने आगे कहा,

यह प्रतिस्पर्धी बिडिंग के नाम पर क्रोनी कैपिटलिज्म है।

कांग्रेस के अनुसार, वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री को बताया था कि उत्तराखंड में प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजना को किसी निजी कंपनी के बजाय UJVN Ltd.और THDC India Ltd के संयुक्त उपक्रम के जरिए विकसित किया जाएगा। जुलाई 2024 में केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि, 16 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने परियोजना पूरी होने में लगने वाले समय का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया।


खेड़ा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि UJVN -THDC का संयुक्त उपक्रम एक साल से भी कम समय पहले बना था और उसने आठ वर्षों में उत्तराखंड की बिजली क्षमता दोगुनी करने का खाका तैयार किया था। इसी दौरान 21 अगस्त 2024 को Adani Power ने दिवाला प्रक्रिया के तहत Lanco Amarkantak Power Ltd का अधिग्रहण किया। खेड़ा के मुताबिक, इस सौदे में कोरबा की 1,320 मेगावाट की विस्तार परियोजना भी शामिल थी।

UPCL ने 3 फरवरी 2025 को 1,320 मेगावाट की बिजली खरीद के लिए टेंडर जारी किया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि उसी दिन Adani Power ने कोरबा विस्तार परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी का आवेदन दाखिल किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में टेंडर की शर्तों को बदलकर पूरी 1,320 मेगावाट बिजली एक ही कंपनी से खरीदना अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही, बिजली उत्पादन संयंत्र को उत्तराखंड में स्थापित करने की शर्त हटाकर उसे “भारत में कहीं भी” स्थित होने की अनुमति दे दी गई।

25 अगस्त 2026 को उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने Adani Power से 25 वर्षों तक 1,320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदने को मंजूरी दी। यह बिजली छत्तीसगढ़ स्थित संयंत्र से उत्तराखंड को दी जानी है। राज्य सरकार का कहना है कि Adani Power ने सबसे कम बोली लगाई थी और इस समझौते का उद्देश्य राज्य के लिए लंबे समय तक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने जुलाई 2026 में 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने की मंजूरी दी थी।

खेड़ा ने सवाल किया कि,

UJVN -THDC की परियोजना को रद्द करके उतनी ही बिजली एक ऐसे टेंडर के माध्यम से क्यों खरीदी गई, जिसकी शर्तों में बार-बार बदलाव किए गए।

उन्होंने पूछा,

भाजपा सरकार ने अपनी UJVN -THDC परियोजना को खत्म करके 1,320 मेगावाट का ऐसा अवसर क्यों बनाया, जो अडाणी के कोरबा संयंत्र के लिए पूरी तरह उपयुक्त था?”

खेड़ा ने आगे कहा,

टेंडर की 84 शर्तें क्यों बदली गईं? क्या यह टेंडर प्रतिस्पर्धा के लिए बनाया गया था या अदाणी के लिए? और उत्तराखंड की जनता एक ऐसी परियोजना के लिए 25 वर्षों में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये क्यों चुकाए, जिसकी शर्तों को एक कॉरपोरेट समूह के अनुकूल बनाने के लिए बार-बार बदला गया?”


खेड़ा ने फिक्स्ड चार्ज की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत किए जाने पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के कारण उत्तराखंड को 25 वर्षों में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।

कांग्रेस के आरोपों पर उत्तराखंड सरकार ने सफाई दी है। प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि सरकारी कंपनियों के जरिए प्लांट लगाने के विकल्प पर विचार किया गया था, लेकिन UJVN और THDC का संयुक्त उपक्रम आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद राज्य की भविष्य की बिजली जरूरत को देखते हुए बाहर से बिजली खरीदने का फैसला लिया गया।