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BJP सरकार आने के बाद पश्चिम बंगाल में 2 महीनों में चर्चों पर हुए 22 हमले

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
BJP सरकार आने के बाद पश्चिम बंगाल में 2 महीनों में चर्चों पर हुए 22 हमले

लगातार हो रहे हमलों के कारण कई ‘हाउस चर्च’ ने प्रार्थना सभाएं आयोजित करना बंद कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद सुनियोजित तरीके से मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों को उत्पीड़ित किया जा रहा है। पिछले दो महीनों के दौरान ऐसी कई घटना और वारदात सामने आई है जिससे ये स्पष्ट होता है कि हिंदूवादी संगठन बेखौफ होकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों को प्रताड़ित करते हैं और उनके उपासना स्थल पर जाकर तोड़फोड़ करते हैं।

DB English की एक रिपोर्ट के अनुसार, 13 सितंबर, रविवार को पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन में एक घर के भीतर प्रार्थना सभा चल रही थी। इसी दौरान अचानक 40 से 45 लोग वहां पहुंचे और सभा बंद करने को कहा। समूह पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने और घर में तोड़फोड़ करने का आरोप है। इससे तीन महीने पहले 7 जून को भी रविवार के दिन आसनसोल के बर्नपुर में भीड़ ने इसी तरह प्रार्थना सभा पर हमला किया था।


7 जून से 13 सितंबर के बीच कुल 15 रविवार पड़े। इनमें से 11 रविवार को प्रार्थना सभाओं पर भीड़ ने हमला किया या विरोध के चलते उन्हें बीच में रोकना पड़ा।

विरोध करने वालों का आरोप है कि प्रार्थना सभाओं की आड़ में धर्मांतरण कराया जा रहा है। लगातार हो रहे हमलों के कारण कई ‘हाउस चर्च’ ने प्रार्थना सभाएं आयोजित करना बंद कर दिया है।

ईसाई संगठनों के अनुसार, पिछले दो महीनों में ऐसी कुल 22 घटनाएं सामने आई हैं। नौ मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है, जिनमें दो एफआईआर पादरियों के खिलाफ हैं।

विवाद की शुरुआत को समझने के लिए 7 जून को बर्नपुर में हुई घटना महत्वपूर्ण है। उस दिन एक हॉल में रविवार की प्रार्थना के लिए करीब 60 से 70 लोग जुटे थे।

पादरी सेन सेनगुप्ता के मुताबिक,

प्रार्थना के दौरान दो युवक वहां पहुंचे और वीडियो रिकॉर्ड करने लगे। उन्होंने युवकों से बैठने के लिए कहा। युवकों ने कुछ सवाल पूछने की बात कही, जिस पर पादरी ने प्रार्थना समाप्त होने के बाद सभी सवालों का जवाब देने का आश्वासन दिया। प्रार्थना खत्म होते ही कुछ लोग हॉल के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को पैसे का लालच देकर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है। विवाद बढ़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा।

पादरी सेनगुप्ता ने बताया,

मैंने पुलिस से कहा कि सभा में मौजूद लोगों से पूछ लिया जाए कि क्या उन्हें किसी तरह का लालच दिया गया था। इसके बाद भीड़ में शामिल कुछ लोग पुलिस के सामने ही मुझे पीटने की बात करने लगे। पुलिस ने उन्हें शांत कराया और मुझे हीरापुर थाने ले गई। मुझे रात करीब 11 बजे तक थाने में रखा गया।

पादरी ने किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई। उनका कहना है कि,,

घटना के बाद बर्नपुर में रविवार की प्रार्थना सभाएं बंद हो गई हैं। अब प्रार्थना ऑनलाइन कराई जाती है। इस कारण सभी लोग प्रार्थना में शामिल नहीं हो पाते। कुछ लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, जबकि कुछ इलाकों में नेटवर्क की समस्या रहती है।
ईसाई संगठनों ने पादरियों को ‘हाउस चर्च’ की प्रार्थना सभाएं ऑनलाइन आयोजित करने की सलाह दी है। इसके बाद से कई पादरी मोबाइल फोन के माध्यम से प्रार्थना करा रहे हैं।


घटना के समय चर्च में मौजूद डॉली कौर से भी बात की गई। वह सिख हैं और अकेले प्रार्थना सभा में शामिल होती हैं। डॉली ने बताया, “उस दिन लोग मुझसे पूछ रहे थे कि मैं सिख होकर चर्च क्यों आती हूं। वहां एक सिख युवक लगातार चिल्ला रहा था। मेरे पति मैरिज हॉल के बाहर मेरा इंतजार कर रहे थे। लोगों ने उनसे भी पूछा कि उन्होंने मुझे चर्च आने की अनुमति क्यों दी। वे पूछ रहे थे कि हम गुरुद्वारा छोड़कर यहां क्यों आ रहे हैं।”

हीरापुर थाने के प्रभारी अखिलेश सिंह ने बताया कि,

धर्मांतरण के आरोपों को लेकर हंगामा हुआ था। जांच में जबरन धर्मांतरण का कोई मामला सामने नहीं आया। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और लोगों को घर लौटने के लिए कहा गया।

दांतन की घटना को लेकर थाना प्रभारी सुभीर माझी ने बताया कि,

चर्च पर हमले के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। चर्च की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। मामले की जांच चल रही है और अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सोनारपुर के सुभाषग्राम में एक चर्च में हुई तोड़फोड़ को लेकर भी एफआईआर दर्ज की गई है।
दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में 5 जुलाई 2026 को एक चर्च में तोड़फोड़ की गई थी। भीड़ में शामिल लोगों ने चर्च में लगे क्रॉस को भी नुकसान पहुंचाया था।

बर्नपुर की घटना में उज्ज्वल मोदक का नाम भी सामने आया है। वह घटना के वायरल वीडियो में भी दिखाई देते हैं। उज्ज्वल खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं और हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े हुए हैं। उनका आरोप है कि हॉल में मौजूद लोगों से कहा जा रहा था कि चर्च आने से बीमारियां ठीक हो सकती हैं। विश्व हिंदू परिषद के पश्चिम बंगाल पूर्वी क्षेत्र के सचिव अमिया सरकार के मुताबिक,

विहिप गांव-गांव जाकर हिंदू जागरूकता के लिए काम कर रहा है। बजरंग दल के कार्यकर्ता उन क्षेत्रों पर नजर रखते हैं, जहां प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं।

उन्होंने कहा,

बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच और दुर्गा वाहिनी जैसे संगठन स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं कि किस गांव में कौन आ रहा है, कहां प्रार्थना हो रही है और किन लोगों के घरों में धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

पश्चिम बर्दवान के जमुरिया में 28 जून को एक चर्च की इमारत पर हमला किया गया था। चर्च से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया,

प्रार्थना के दौरान 10 से 15 लोग अंदर आए और कहने लगे कि यहां धार्मिक धर्मांतरण कराया जा रहा है। पुलिस के पहुंचने के बाद प्रार्थना दोबारा शुरू हो सकी। हमने एफआईआर दर्ज नहीं कराई, लेकिन मैं कुछ समय के लिए इलाका छोड़कर चला गया था। जमुरिया में प्रार्थना सभा के दौरान कुछ लोग चर्च में घुस गए और वीडियो बनाने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां धर्मांतरण कराया जा रहा था।

पश्चिम बंगाल के सभी ईसाई संप्रदायों के संयुक्त मंच ‘बंगीय क्रिश्चियन परिषद’ के महासचिव हैराड मल्लिक के अनुसार, पिछले दो महीनों में ऐसी 22 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें से केवल नौ मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है। दो मामले पादरियों के खिलाफ और सात हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। पादरियों पर धर्मांतरण के आरोपों को लेकर मामले दर्ज किए गए हैं।

इस मुद्दे पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री खुदीराम टुडू ने कहा,

मुझे अभी तक ऐसी घटनाओं को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है और न ही मेरे कार्यालय को कोई शिकायत प्राप्त हुई है। अगर शिकायत मिलती है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल संगठन ने लोगों को रविवार की प्रार्थना सभाएं ऑनलाइन आयोजित करने की सलाह दी है। पादरियों से यह भी कहा गया है कि वे रविवार की सभाओं की जानकारी पहले से पुलिस को दें। संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं।