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कोलकाता के कॉलेज में मुस्लिम वाइस प्रिंसिपल के जबरन इस्तीफे के बाद ABVP ने दफ्तर में किया ‘शुद्धिकरण’

TCN Desk TCN Desk | 3h ago · 5 min read
कोलकाता के कॉलेज में मुस्लिम वाइस प्रिंसिपल के जबरन इस्तीफे के बाद ABVP ने दफ्तर में किया ‘शुद्धिकरण’

ABVP के छात्रों ने मुस्लिम उप-प्राचार्य को करीब 23 घंटे तक उनके ही कार्यालय में घेरकर रखा था।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार के बनने के बाद पिछले कुछ महीने से मुसलमानों और ईसाई समुदाय पर उत्पीड़न की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। अगस्त के महीने में चर्चों पर हमले हुए थे, तोड़-फोड़ की गई थी और दहशत के कारण मजबूर होकर चर्च में प्रार्थना सभा बंद करना पड़ा। और अब खबर आ रही है कि शैक्षणिक परिसर में बजरंग दल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( ABVP) के कार्यकर्ता और छात्र मुस्लिम शिक्षकों को डराते-धमकाते हैं और उनके साथ मारपीट की जाती है। ताजा मामला एक उप-प्राचार्य से जबरन इस्तीफा लेने का आया है।


The Wire की एक रिपोर्ट के अनुसार, उप प्राचार्य मोहम्मदी तरन्नुम ने आरोप लगाते कहा कि,

ABVP के छात्रों ने उन्हें करीब 23 घंटे तक उनके ही कार्यालय में घेरकर रखा था। ABVP के छात्रों ने जबरन उनसे इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर करवाया। तरन्नुम पिछले 25 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रही हैं। वह सितंबर 2007 से कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज में उप-प्राचार्य और शिक्षक प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं। 11 सितंबर को उन्होंने एक इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर किए। तरन्नुम का आरोप है कि इससे पहले छात्रों ने स्वयं इस्तीफा पत्र तैयार किया और उन पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया।

पुलिस सुरक्षा में कॉलेज से बाहर निकलने के बाद ABVP के नेतृत्व में छात्रों का एक समूह उनके कार्यालय में दाखिल हुआ।


छात्रों ने वहां अगरबत्ती जलाई और गंगाजल छिड़का। उनका कहना था कि वे कार्यालय का ‘शुद्धिकरण’ कर रहे हैं। इसके बाद छात्रों ने तरन्नुम के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर लगाए, जबकि उनसे पहले ही इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जा चुके थे।

तरन्नुम ने The Wireसे कहा,

छात्रों ने मुझे इतनी गालियां दीं और जाति, धर्म एवं राजनीति को लेकर इतनी अश्लील टिप्पणियां कीं कि मैं दो दिनों तक बीमार रही। उन्होंने मेरा अपमान किया, मजाक उड़ाया और कई आपत्तिजनक बातें कहीं। इतनी मानसिक प्रताड़ना के बाद भी मैंने फैसला किया है कि जब तक वे मुझे मार नहीं देते, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी।

हालांकि आंदोलन में शामिल चौथे वर्ष के छात्र रजत अगर ने इन आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा, “उप-प्राचार्य जो दावा कर रही हैं, वह झूठा है। उन पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया।” यह पूरा विवाद छात्रों की उपस्थिति से जुड़ा है। कानून के विद्यार्थियों को सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 65 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है, लेकिन कई छात्रों की उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम थी। आठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं 29 सितंबर से होनी हैं। तरन्नुम ने छात्रों से स्पष्ट कहा था कि उपस्थिति संबंधी नियम लागू किया जाएगा।


तरन्नुम ने कहा,

एक समूह छात्रों को कक्षाओं में आने से रोक रहा है और दूसरी तरफ अलग-अलग मांगें कर रहा है। मैं सरकारी कर्मचारी हूं और सरकारी नियमों के अनुसार काम कर रही हूं।
1884 में स्थापित इस कॉलेज का नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नाम पर रखा गया था। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया इसके पूर्व छात्रों में शामिल हैं। वर्तमान में कॉलेज की शासी निकाय के अध्यक्ष भाजपा विधायक कौस्तव बागची हैं।

ABVP की सुरेंद्रनाथ कॉलेज में कोई आधिकारिक रूप से घोषित इकाई नहीं है। इसके बावजूद कॉलेज परिसर के भीतर केवल इसी संगठन का झंडा लगा हुआ है। कॉलेज में ABVP के नेता संबित दास ने कहा, “हम उनका चेहरा नहीं देखना चाहते। हमें उनका इस्तीफा चाहिए और हम अपनी मांग पर कायम हैं।”

तरन्नुम ने कहा कि,

उन्हें मालूम है कि इस सुनियोजित हमले के पीछे कौन था, लेकिन वह किसी का नाम नहीं लेंगी और पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराएंगी। उन्होंने कहा, “वे मेरे अपने बच्चों की तरह हैं।”

पुलिस सुरक्षा में कॉलेज से निकलने के तुरंत बाद तरन्नुम ने अपनी कार से ही पश्चिम बंगाल सरकार को ईमेल भेजकर बताया कि उन्होंने दबाव में इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। 12 सितंबर को उन्होंने सार्वजनिक रूप से भी इस्तीफा वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके बावजूद इस्तीफा प्राप्त करने वाले अधिकारियों ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। भाजपा विधायक कौस्तव बागची की अध्यक्षता वाली शासी निकाय ने भी इस्तीफे को अमान्य घोषित नहीं किया। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी आधिकारिक रूप से यह तय नहीं हो पाया है कि कॉलेज में तरन्नुम उप-प्राचार्य के पद पर बनी हुई हैं या नहीं।

कौस्तव बागची ने कहा, “यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि सभी छात्र परीक्षा में बैठ सकें। छात्रों ने उस प्रोफेसर के खिलाफ कई शिकायतें दी हैं। मैंने इन मामलों को उच्च शिक्षा विभाग के पास भेज दिया है। मुझे उम्मीद है कि अब कॉलेज में स्वस्थ वातावरण लौटेगा।”

सुरेंद्रनाथ कॉलेज की एक ही इमारत में दिन और शाम की कक्षाएं संचालित होती हैं। छात्रों का दावा है कि कॉलेज के लगभग सभी कमरों पर राजनीतिक रूप से प्रभावशाली शाम की पाली का नियंत्रण है। कॉलेज के कानून विभाग में 916 छात्र हैं, लेकिन उसका अपना कोई अलग कार्यालय नहीं है। दूसरे वर्ष के छात्र अनुराग रॉय ने कहा, “कॉलेज में कक्षाएं नहीं होतीं, क्योंकि शिक्षक नहीं आते। दूर-दराज से आने वाले छात्रों को बिना कक्षा किए ही वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से कॉलेज आने की प्रवृत्ति कम हो रही है।”

पश्चिम बंगाल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सचिव निलय कुमार साहा ने स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों के बीच कक्षाओं में आने के बजाय कमाई के लिए दूसरे काम करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। साथ ही पिछली सरकार ने भी अनुपस्थिति की इस समस्या में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

छात्रों की उपस्थिति 29 सितंबर से पहले 65 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए अब रविवार को भी कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन कक्षाओं की व्यवस्था स्वयं तरन्नुम कलकत्ता विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कर रही हैं। तरन्नुम ने कहा, “मैं नहीं चाहती कि छात्रों को किसी तरह का नुकसान उठाना पड़े।”