पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीप न जलाने वाले IIM जम्मू के छात्रों पर लगेगा 500 रुपये का जुर्माना
PM मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में शामिल नहीं होने वाले छात्रों पर IIM जम्मू कार्रवाई कर रहा है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैन ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में शामिल नहीं होने वाले छात्रों पर भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जम्मू कार्रवाई कर रहा है। आरोप के मुताबिक,
कार्यक्रम से गैरहाजिर छात्रों को IIM जम्मू की छात्र परिषद की ओर से जारी नोटिस का लिखित जवाब देने या 500 रुपये का जुर्माना भरने के लिए कहा गया है।
The Telegraph Online की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक से राज्यसभा सांसद और जम्मू-कश्मीर के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक हुसैन ने ‘एक्स’ पर एक नोटिस साझा किया। यह नोटिस ‘स्टूडेंट काउंसिल ऑफ IIM जम्मू’ की ओर से जारी किया गया था। छात्रों को शुक्रवार रात तक अपनी अनुपस्थिति का कारण बताने का समय दिया गया था।
हुसैन ने ‘एक्स’ पर लिखा,
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन समारोह में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य क्यों होनी चाहिए? क्या यह किसी IIM में शैक्षणिक जिम्मेदारी है या प्रधानमंत्री मोदी का प्रचार परिसर में अनिवार्य गतिविधि के रूप में लाया गया है? शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र सोच विकसित करनी चाहिए, न कि छात्रों को राजनीतिक नेताओं के समारोहों में शामिल होने के लिए मजबूर करना चाहिए या उन पर जुर्माना लगाने की धमकी देनी चाहिए। भाजपा के प्रचार अभियानों को हमारे प्रमुख शिक्षण संस्थानों से दूर रखा जाना चाहिए।
सांसद की ओर से साझा किए गए ईमेल के स्क्रीनशॉट में कहा गया था कि यह कार्यक्रम सभी छात्रों के लिए अनिवार्य था।

नोटिस में लिखा था,
अनुपस्थिति से छूट केवल चिकित्सा आधार पर दी जाएगी। इसके लिए संजीवनी की ओर से जारी आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें संबंधित अवधि के दौरान बेड रेस्ट की स्पष्ट सलाह दी गई हो। संजीवनी के आवश्यक दस्तावेज के बिना बताए गए चिकित्सा कारणों पर छूट के लिए विचार नहीं किया जाएगा।”
‘संजीवनी’ या ‘ई-संजीवनी’ केंद्र सरकार की निःशुल्क राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जिसके माध्यम से मरीज ऑनलाइन ओपीडी में लॉगइन करके विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं।
IIM जम्मू ने अभी तक कांग्रेस सांसद के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। संस्थान के निदेशक और अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं मिला। अधिकारियों की प्रतिक्रिया आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा। 17 सितंबर को शाम सात बजे दीप जलाने का कार्यक्रम भाजपा की ओर से आयोजित महीनेभर के ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा था। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में उनके 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
बताया गया है कि राजस्थान जैसे कई भाजपा शासित राज्यों में इस कार्यक्रम से संबंधित सरकारी निर्देश निजी शिक्षण संस्थानों तक भी लागू किए गए थे। कई सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी शिकायत की कि उन्हें देर शाम तक कार्यस्थल पर रुकने और दीप प्रज्वलन समारोह की तस्वीरें भेजने के लिए कहा गया था।
इससे पहले राजस्थान में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के सरकारी निर्देश को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कॉलेज शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी महाविद्यालयों को 17 सितंबर की शाम होने वाली इस गतिविधि में सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। आदेश सामने आने के बाद सामाजिक संगठन PUCL ने इसका विरोध किया और कांग्रेस की ओर से भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए गए थे
सामाजिक संस्था PUCL की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने इस निर्देश का विरोध करते हुए कहा था कि,
कॉलेज उच्च शिक्षा के केंद्र हैं, जहां विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और वैज्ञानिक नजरिया विकसित होना चाहिए। उनका कहना था कि सक्रिय राजनेताओं के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को शामिल करना शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
PUCL के राज्य अध्यक्ष अनंत भटनागर और राष्ट्रीय सचिव भंवर मेघवंशी ने भी आदेश वापस लेने की मांग की थी। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। पार्टी का तर्क था कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को किसी सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति के जन्मदिन से जुड़े आयोजन में शामिल करने के बजाय शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब सवाल यही है कि सरकारी अभियान के तहत स्कूल और कॉलेज में विद्यार्थियों की भागीदारी को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जैसी गतिविधि से जोड़ना कितना उचित था?