AI विकसित करने वाले वैज्ञानिक ने दी चेतावनी, क्या सच में दुनिया से इंसान खत्म हो जाएंगे?
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी AI अगले 10 साल में इंसानी सभ्यता को खत्म कर सकती है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी AI अगले 10 साल में इंसानी सभ्यता को खत्म कर सकती है। ये किसी राह चलते व्यक्ति या किसी ज्योतिष शास्त्र के विद्वान द्वारा की गई भविष्यवाणी नहीं है बल्कि ये कहना है AI के गाडफादर कहे जाने वाले नोबेल प्राइज विनर और AI को विकसित करने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल Geoffrey Hinton का। हालांकि, वे इसकी 10% आशंका जताते हैं।
10 सितंबर 2026 को BBC POLITICS को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि,
AI के इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान होने की स्थिति पहली बार सामने आ रही है, इसलिए खतरे का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
हाल में इस चर्चा कि शुरुआत एक इस्तीफे से हुई, बीते 8 सितंबर को AI रिसर्चर Jacob Coxon ने मशहूर अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक से इस्तीफा दे दिया, इस्तीफे के बाद उन्होंने X पर एक लंबा पोस्ट लिखा जिसने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी।
पोस्ट में Coxon ने कहा है कि,
AI बनाने वाले लोग यह मानते हैं कि इस दशक के अंत तक AI हम सभी का खात्मा कर सकता है। Coxon ने अपने पोस्ट में कहा है कि इसकी ताकत को कम मत आंकिए। ये जल्द ही ऐसे 'सुपरह्यूमन' सिस्टम बन जाएंगे जो किसी भी चीज को हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं और रिसोर्सेस पर कब्जा कर सकते हैं।
Coxon का कहना है कि,
ANTHROPIC और OPEN AI कंपनी जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही है।
इस मामले पर ANTHROPIC कंपनी के एलाइनमेंट साइंस लीड Evan Hubinger ने Coxon के पोस्ट को कोट करते हुए लिखा कि,
Coxon सही कह रहे हैं। हम यह मानते हैं कि AI सभी इंसानों को खत्म कर सकता है! मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि अगले दशक में ऐसा होने की संभावना 10% से अधिक है।
इसी बीच एक और खबर आई कि Google DeepMind के एक वैज्ञानिक बिलाल चुगताई ने भी कंपनी से इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी है कि AI पूरी मानव जाति को खत्म कर सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि इसे रोकने के लिए समय बहुत कम बचा है। बिलाल का कहना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए सभी कंपनियों को आपसी तालमेल बैठाना होगा।
तो सवाल ये है जो AI आज हमारे बहुत सारे काम आसान बना रहा है लंबे ईमेल मिनटों में ड्राफ्ट करके दे रहा है, हमारे लिए प्रोजेक्ट्स लिख रहा है, तस्वीरें जेनरेट कर रहा है, कोड लिख रहा है उससे भला हमें कैसा खतरा हो सकता है? लेकिन सोचिए अगर भविष्य में ऐसा AI बन गया जो लगभग हर दिमागी काम में इंसानों से बेहतर हो, तो हालात क्या होंगे? फिलहाल AI को बेहतर बनाने का काम इंसान करते हैं।
लेकिन एक्स्पर्ट्स का मानना है कि अगर भविष्य में AI खुद अपनी कमियां दूर करने लगे, अपनी क्षमता बढ़ाने और बेहतर AI बनाने लगे, तो उसे काबू करना मुश्किल हो जाएगा।
AI को लेकर आशंकाओं का बाजार यूँ ही गरम नहीं है बल्कि इसकें पीछे कई ठोंस वजहें भी है। पहला ये कि AI अब सुपरइंटेलिजेंट बन रहा है। वो अपनी कमियां पकड़ता है और उन्हें सुधारता है। नए AI मॉडल अपनी सोच और तर्क को छिपाने में बेहतर हो रहे हैं। इससे उन पर नजर रखना मुश्किल होता जा रहा है। पहले AI से सवाल पूछो और वो जवाब देता था। लेकिन अब AI एजेंट से कहा जा सकता है कि इस समस्या को हल करो। वो खुद इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करता है, फैसले लेता है और समस्या को सुलझाता है।
हाल ही में OPEN AI ने दावा किया कि उनके AI सिस्टम ने गणित की 90 साल पुरानी गुत्थी (नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम) सिर्फ 88 घंटे में सुलझा ली है।
इसके अलावा एक और घटना ने दुनियाभर का ध्यान खींचा था। OPEN AI के मुताबिक, जुलाई 2026 में टेस्ट के दौरान उसके दो AI मॉडल जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए और उसे हैक करने कि कोशिश की। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के।
इसी साल फरवरी अमेरिका से एक और दराने वाली खबर आई थी मीडिया रिपोर्टस में बताया गया की ANTHROPIC के टेस्ट में मॉडल Claude 4 ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए एक अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी दी और उसके हत्या तक की बात कही।
तकनीकी क्षेत्र के गलियारों में चल रही इन खबरों कि असर जिओ पॉलिटिक्स पर भी पड़ता दिख रहा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI को लेकर तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि,
AI से इंसानियत पर खतरा या रोबोट के कब्जे वाली बातें एक बड़ा होक्स यानी फरेब या झांसा है। ट्रंप ने इसे “sick conspiracy” करार दिया और कहा कि ये सब अमेरिका की तरक्की रोकने और चीन को फायदा पहुंचाने वाली साजिश है।
उन्होंने लिखा कि- AI और डेटा सेंटर इतिहास में आर्थिक विकास के सबसे बड़े इंजन साबित होंगे- तेल, सोना, हीरे और यहाँ तक कि इंटरनेट से भी बड़े।
Md. Tousif
मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।