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IIT Bombay के फैकल्टी पर छात्र को जातिसूचक गाली देने और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

TCN Desk TCN Desk | 58m ago · 5 min read
IIT Bombay के फैकल्टी पर छात्र को जातिसूचक गाली देने और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज

छात्र साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे में B.Tech एनर्जी साइंस के दूसरे वर्ष में पढ़ रहा था।

मुंबई पुलिस ने IIT बॉम्बे के फैकल्टी सदस्य सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ जातिसूचक गाली देने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया। यह कार्रवाई 22 वर्षीय छात्र के हॉस्टल के कमरे में मृत पाए जाने के एक दिन बाद की गई।

The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, मृतक छात्र साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे में B.Tech एनर्जी साइंस के दूसरे वर्ष में पढ़ रहा था। IIT बॉम्बे ने एक बयान में कहा कि साहिल ने आत्महत्या की। संस्थान के मुताबिक, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के बाद यह घटना हुई।


पुलिस ने शनिवार को साहिल के पिता चक्रधर वाकोडे की शिकायत पर FIR दर्ज की।

एनर्जी साइंस विभाग में कार्यरत सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।

FIR में साहिल के पिता ने आरोप लगाया कि,

जब उनका बेटा दूसरे वर्ष में पढ़ रहा था और उनसे उनकी मुलाकात हुई, तब साहिल ने बताया था कि पिछले तीन महीनों से फैकल्टी सदस्य सूर्यनारायण दुल्ला, निदेशक श्री शिरीष बी. केदारे के निर्देश पर, उसे जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर प्रताड़ित कर रहे थे।

चक्रधर ने FIR में कहा कि,

दुल्ला ने उनके बेटे से कहा था कि वह ‘निचली जाति’ से है और वे उसे परेशान कर सकते हैं तथा किसी भी झूठे मामले में फंसा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को मानसिक रूप से सहारा दिया।

चक्रधर वाकोडे ने अपनी शिकायत में सूर्यनारायण दुल्ला के अलावा IIT बॉम्बे के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का भी जिक्र किया है।

IIT बॉम्बे ने अपने शुरुआती बयान में कहा था कि साहिल ने तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था और उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी। उसी इमारत में परीक्षा दे रहे एक अन्य छात्र के मुताबिक,

दुल्ला ने साहिल को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया था और उसे परीक्षा से डिबार किए जाने की धमकी दी थी। छात्र के अनुसार, दुल्ला ने साहिल को अगले दिन इस मामले में होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए भी कहा था। छात्र ने बताया कि साहिल परीक्षा हॉल से तुरंत बाहर चला गया। बाद में वह कैंपस के हॉस्टल नंबर 4 स्थित अपने कमरे में मृत पाया गया।

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने फोन पर बातचीत में कहा कि,

IIT बॉम्बे में पढ़ाई का माहौल काफी तनावपूर्ण है। छात्र के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में हॉस्टल नंबर 4 में यह दूसरी आत्महत्या है।

घटना के बाद छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे छात्र के अनुसार, उनकी मांगों में IIT बॉम्बे के निदेशक का इस्तीफा भी शामिल है। पुलिस फिलहाल साहिल की मौत से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है। IIT बॉम्बे में दलित छात्र दर्शन सोलंकी की आत्महत्या का मामला भी पहले सामने आ चुका है। 18 वर्षीय दर्शन ने 12 फरवरी को संस्थान के कैंपस में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस ने उस समय कहा था कि उन्हें दर्शन द्वारा लिखा गया एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने एक सहपाठी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

पुलिस ने बताया था कि नोट में जिस सहपाठी का नाम लिया गया था, वह मामले में संदिग्ध था। पुलिस भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में थी। जांच से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने कहा था कि दर्शन के साथ जातिगत भेदभाव के आरोपों की भी जांच की जा रही थी और दर्ज होने वाली FIR में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी शामिल की जाएंगी।

पुलिस ने यह भी कहा था कि,

उन्हें दर्शन और उसके सहपाठी के बीच WhatsApp चैट मिली थीं। जांचकर्ताओं के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता था कि दर्शन और उसके सहपाठी के बीच उसकी मौत वाले दिन या उससे एक रात पहले कुछ हुआ था। पुलिस का यह भी कहना था कि उन्हें आशंका है कि कैंपस में दर्शन को साथी छात्रों द्वारा परेशान किया गया था।

प्रक्रिया के तहत FIR पॉवई पुलिस स्टेशन में दर्ज की जानी थी, क्योंकि घटना उसके क्षेत्राधिकार में आती थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को इसे सौंपा जाना था।

दर्शन के परिवार ने उसकी मौत के बाद से ही कैंपस में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। वहीं, IIT बॉम्बे ने एक आंतरिक समिति बनाई थी। समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा था कि दर्शन के खिलाफ जातिगत भेदभाव का कोई “विशिष्ट सबूत” नहीं मिला है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि दर्शन के अपने सहपाठियों और अन्य छात्रों के साथ अच्छे संबंध थे। हालांकि, यह निष्कर्ष दर्शन के परिवार और एक वरिष्ठ छात्र द्वारा समिति के सामने दिए गए बयानों से अलग था। उस वरिष्ठ छात्र ने बताया था कि दर्शन के रूममेट ने उसकी प्रवेश परीक्षा की रैंक पता चलने के बाद उससे बात करना बंद कर दिया था।

दर्शन की मौत के अगले दिन IIT बॉम्बे ने अपने बयान में कहा था कि कैंपस में जातिगत भेदभाव एक “अपवाद” है और छात्रों से उनकी रैंक नहीं पूछी गई थी।


हालांकि, इसके कुछ दिनों बाद The Hindu ने रिपोर्ट किया था कि IIT बॉम्बे के SC/ST सेल द्वारा किए गए आंतरिक सर्वे में कैंपस में जाति आधारित भेदभाव के मामले व्यापक रूप से सामने आए थे। इनमें छात्रों द्वारा एक-दूसरे की रैंक और सरनेम पूछना तथा आरक्षण के जरिए दाखिला लेने वाले छात्रों की “मेरिट” को लेकर मजाक करना शामिल था। पुलिस अब साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।