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Form 6 में गैरकानूनी बदलाव कर ज्ञानेश कुमार ने की बीजेपी की मदद, मिलेगी सजा: राहुल गांधी

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
Form 6 में गैरकानूनी बदलाव कर ज्ञानेश कुमार ने की बीजेपी की मदद, मिलेगी सजा: राहुल गांधी

मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को सुनवाई करते स्पष्ट कहा कि किसी भी संशोधित Form 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है।

कांग्रेस ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान की मूल भावना और प्रावधानों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब यह बात संदेह से परे साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी तरीके से और एकतरफा फ़ॉर्म 6 में बदलाव किया।

राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट करते कहा कि,

यह भाजपा की मदद करने के लिए उनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किए जाने का एक और सबूत है। हमारे लोकतंत्र पर इस आपराधिक हमले में शामिल ज्ञानेश कुमार और बाकी सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को गैरकानूनी बताते हुए चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि साफ और स्पष्ट है कि सीईसी ने झूठ बोला। सीईसी ने खुद जानबूझकर फॉर्म 6 में बदलाव किया ताकि जेन Z वोटरों के नाम हटाए जा सकें, जिनसे प्रधानमंत्री बुरी तरह डरे हुए हैं।

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतिम सुनवाई तक पद के कामकाज से रोकने की मांग भी की गई है। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया।


सुनवाई करते मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि,

यह बिल्कुल स्पष्ट कर दें कि किसी भी संशोधित Form 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट कर दें कि जब रिपोर्ट पेश की जाएगी, तो हम देखना चाहेंगे कि किसने क्या संशोधित किया है।


कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि इस बदलाव को पहले इस तरह पेश किया गया था, मानो उसे सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति मिली हो। उन्होंने इसे ज्ञानेश कुमार के अनुचित और बचाव नहीं किए जा सकने वाले आचरण का उदाहरण बताया। रमेश ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने झूठ बोलने के साथ कानून का उल्लंघन किया और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के इशारे पर संविधान से विश्वासघात किया।

वहीं सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सीजेआई के बयान को कोट करते हुए कहा कि,


इतना ही काफी नहीं है! जो भी चीज कानून के मुताबिक नहीं पाई जाती, उसे गैर-कानूनी कहा जाता है, और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर उसी के अनुसार आरोप लगाया जाना चाहिए.'' उन्होंने पूछा, ''ज्ञानू, तुमने ऐसा क्यों किया?'

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि नए वोटर को जोड़ने वाले 'फॉर्म 6' में बदलाव किया गया है. इसपर सीजेआई ने नोटिस जारी किया. चीफ जस्टिस ने कहा, "फॉर्म 6 में बदलाव को कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। रिकॉर्ड सामने आने पर देखा जाएगा कि यह बदलाव किसने किया? सीजेपी के संस्थापक सदस्य सौरव दास ने कहा कि आज भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को झूठा करार देते हुए उन्हें बुरी तरह फंसा दिया है. ज्ञानू (ज्ञानेश कुमार), अब तुम्हारा खेल खत्म है भाई।


चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट में ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ी गई घोषणा का बचाव किया था। इसमें नए मतदाताओं से पूछा गया था कि पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता का विवरण दर्ज था या नहीं। आयोग का दावा था कि बिहार एसआईआर पर मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था को सही ठहराया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए और अदालत मानकर चलती है कि निर्णय इसी प्रक्रिया से लिए गए होंगे।

पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की जनहित याचिका में यह जांचने की मांग है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त उन अधिकारों का अकेले इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पूरे आयोग को प्राप्त हैं। याचिका में ऐसे कार्यों को अनधिकृत घोषित करने और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें यह भी अनुरोध है कि ज्ञानेश कुमार को कामकाज से रोके जाने की अवधि में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी सर्वसम्मति से आयोग चलाएं। संभावित रिक्ति पर नियुक्ति के लिए मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली समिति की सिफारिश लेने की मांग भी की गई है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने ज्ञानेश कुमार को “देश का दुश्मन” बताते हुए आरोप लगाया कि इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों के बीच वह सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद मंगलवार को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च करेंगे।

एसआईआर विवाद में फॉर्म 6 के साथ फॉर्म 7 भी केंद्र में है। फॉर्म 6 नए मतदाता जोड़ने के लिए है, जबकि फॉर्म 7 से किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति या हटाने का अनुरोध किया जाता है।

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े एक बूथ एजेंट ने बल्लारी में 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए, जिनमें अधिकांश मुस्लिम थे। डी.के. शिवकुमार ने आपराधिक जांच की मांग उठाई, जबकि प्रियांक खरगे ने इसे कुछ समुदायों के खिलाफ “केंद्रीकृत आपराधिक साजिश” बताया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार बिना उनकी जानकारी या सिफारिश जारी एसआईआर फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। आयोग का कहना है कि अलग राय सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है और उसके सभी आदेश कानूनी तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।