मुस्लिम महिला पत्रकारों पर पुलिस हमले में काम आया दबाव, दर्ज हुई FIR
एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म से जुड़ी दो महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि थाने में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ शारीरिक मारपीट की।
एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 4 PM से जुड़ी दो महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि दक्षिण दिल्ली के साकेत में आयोजित एक कार्यक्रम स्थल के पास दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में लिया। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुई थीं। महिला पत्रकारों का कहना है कि,
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से सवाल पूछने के कारण दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।
पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि पत्रकारों ने वीवीआईपी आवाजाही के लिए निर्धारित मार्ग पर अपनी स्कूटी खड़ी कर निकास का रास्ता बाधित कर दिया था। वहां तैनात पुलिसकर्मियों के साथ उनकी कहासुनी भी हुई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
गुरुवार देर शाम तक इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था। पूरी रात थाने में पत्रकारों के धरने और दवाब के बाद एफआईआर दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी दोनों महिलाओं के संपर्क में थे। यह घटना गुरुवार सुबह उस समय हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे।
पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया कि वे कार्यक्रम की कवरेज करने गई थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया और साकेत थाने ले गई।
जारी एक वीडियो में शाहीन ने आरोप लगाया कि थाने में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ शारीरिक मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके मुस्लिम नाम और धार्मिक पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। वीडियो में दोनों महिलाओं के शरीर पर चोट और डंडे जैसे निशान दिखाई दिए। पत्रकारों का दावा है कि ये निशान पुलिस की पिटाई से आए हैं।
कांग्रेस ने भी यह वीडियो अपने एक्स हैंडल पर साझा किया।
The Credible News के चीफ एडिटर अशोक कुमार पांडे ने दिल्ली पुलिस द्वारा महिला पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना को कायराना कृत्य बताया है।
उन्होंने एक्स पोस्ट करते कहा कि,
4 PM की पत्रकार शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान पर हुई पुलिस बर्बरता पर दिल्ली पुलिस जांच करे और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने एक संयुक्त बयान जारी कर घटना की कड़ी निंदा की। संगठनों ने दोनों स्वतंत्र पत्रकारों के साथ बेरहमी से मारपीट करने वाले दिल्ली पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
वीडियो में नफीसा को सोफे पर बैठा हुआ दिखाया गया है। उनके साथ मौजूद एक तीसरी महिला उन्हें संभाल रही थी। खान की रिकॉर्डिंग में कैमरापर्सन दिखाई नहीं देता।
पीड़ित पत्रकार शाहीन खान ने कहा कि,
उन्हें सिर्फ इसलिए घसीटकर थाने ले जाया गया, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से सवाल पूछा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपना नाम बताया तो पुलिस ने उसे उनकी धार्मिक पहचान से जोड़ लिया और उन्हें पहले से भी अधिक पीटा।
साकेत थाने से अपनी रिपोर्ट रिकॉर्ड करते समय खान के कैमरे में एक पुलिसकर्मी और दो अन्य लोग भी दिखाई देते हैं। वीडियो में उनका चेहरा लाल है और वह रोने की स्थिति में नजर आ रही हैं। उन्होंने कैमरे के सामने पुलिस अधिकारी की ओर देखते हुए कहा,
मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के बाद उन्होंने मेरा नाम पूछा। मैंने बताया कि मैं खान हूं और मेरे नाम में ‘खान’ आता है। इसी वजह से दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने हमारे साथ मारपीट की, हमें डंडों और थप्पड़ों से पीटा।”
इस दौरान हेल्प डेस्क पर बैठे एक पुलिस अधिकारी ने कुछ कहा, जो वीडियो में साफ सुनाई नहीं देता। इसके जवाब में खान ने कैमरे की ओर देखते हुए कहा, “होगी—बिल्कुल होगी कार्रवाई।” उन्होंने कहा,
मुसलमान होने के नाम पर आज हमारे साथ जिस तरह की नफरत दिखाई गई है, दिल्ली पुलिस को उसका जवाब देना होगा।”
इसके बाद शाहीन और कैमरापर्सन एक दूसरे कमरे में गए, जहां कुछ सोफे रखे हुए थे। वहां नफीसा दर्द से कराह रही थीं और लगभग बेहोशी की हालत में थीं। प्रतीक्षालय में कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में नफीसा को उनके परिचित थाने से बाहर उठाकर ले जाते हुए दिखाई दिए, क्योंकि कथित तौर पर वह चलने की स्थिति में नहीं थीं। शाहीन के कुछ वीडियो भी ऑनलाइन प्रसारित हुए, जिनमें वह बेहोश होकर थाने के फर्श पर पड़ी दिखाई दे रही थीं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने तीन सितंबर की दोपहर हुई मारपीट की निंदा करते हुए संयुक्त बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि पत्रकारों के मुताबिक, दोनों नेताओं से सवाल पूछने पर पुलिस ने न केवल उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें घसीटा, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान पता चलने के बाद कथित मारपीट और बढ़ गई।

बयान में कहा गया,
थाने में प्रवेश करने के बाद स्टेशन हाउस ऑफिसर यानी एसएचओ ने पुलिस अधिकारियों को दोनों पत्रकारों को एक कमरे में ले जाने का निर्देश दिया। वहां महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हो गईं और शाहीन तथा नफीसा को पीटना शुरू कर दिया।
बयान के अनुसार,
दोनों पत्रकारों को एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी गई और उनकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाते हुए अपमानजनक तथा नफरती टिप्पणियां की गईं। पत्रकार संगठनों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से दोनों पत्रकारों पर कथित हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
संगठनों ने भारतीय प्रेस परिषद से भी मामले का संज्ञान लेने और प्रेस की स्वतंत्रता को कथित तौर पर हिंसक तरीके से दबाने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच शुरू करने की अपील की।
दक्षिण दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने आधिकारिक बयान में आरोपों को “तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों महिलाओं ने कार्यक्रम स्थल के पास निर्धारित वीवीआईपी मार्ग पर अपनी स्कूटी खड़ी कर रास्ता बाधित कर दिया था। वाहन हटाने और मार्ग खाली करने के लिए बार-बार अनुरोध तथा निर्देश देने के बावजूद उन्होंने उनका पालन नहीं किया।
दोनों पत्रकारों ने सूचना दी है कि आज सुबह उनकी एफ आई आर दर्ज हुई है।