महिला सुरक्षा पर शाह-योगी का मॉडल फेल, दिल्ली गैंगरेप पर राहुल गांधी ने मांगा जवाब
राहुल गांधी ने हैरानी जताई कि बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47 किलोमीटर का सफर बिना किसी पुलिस चौकी पर रोके कैसे तय कर गई।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नोएडा से दिल्ली तक चलती बस के अंदर एक नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को सीधे निशाने पर लिया है। इस घटना ने 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले की भयावह यादें ताजा कर दीं, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
राहुल गांधी ने हैरानी जताई कि बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47 किलोमीटर का सफर बिना किसी पुलिस चौकी पर रोके कैसे तय कर गई। उन्होंने यह भी पूछा कि 2012 के निर्भया मामले के बाद यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को लागू क्यों नहीं किया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस और योगी आदित्यनाथ सरकार के अधीन उत्तर प्रदेश पुलिस से जवाब मांगते हुए राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा,
दिल्ली-एनसीआर महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो चुका है कि एक नाबालिग लड़की के साथ ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक 47 किलोमीटर चलती स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया। “यह हैरान करने वाला है कि न तो दिल्ली पुलिस और न ही नोएडा पुलिस को इसकी भनक लगी। बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली की रिंग रोड और सीमा से गुजरी, लेकिन उसे एक बार भी किसी जांच चौकी पर नहीं रोका गया।”
उन्होंने बताया कि बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से कोई यह नहीं देख सकता था कि अंदर क्या हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने पूछा,
निर्भया की घटना को इतने साल बीत जाने और ऐसी अनेक घटनाओं के बाद भी इस तरह की बसों की जांच और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? “पर्दे केवल उस एक बस में ही नहीं लगे थे—वे प्रशासन की नाकामियों पर सरकार द्वारा साल-दर-साल डाले गए पर्दों का परिणाम हैं, जिनकी वजह से महिलाएं देश की राजधानी में सुरक्षित यात्रा भी नहीं कर पा रही हैं।“केंद्र और राज्य सरकारें इस व्यवस्था को ठीक करें, उससे पहले और कितनी महिलाओं और लड़कियों को यह सब सहना पड़ेगा?”
राहुल गांधी ने लिखा,
क्या अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस या आदित्यनाथ के अधीन उत्तर प्रदेश पुलिस की कोई जवाबदेही तय होगी? इसकी कोई संभावना नहीं है—इस अपराध पर भी पर्दा डाल दिया जाएगा,”
लड़की के साथ दुष्कर्म 4 अगस्त को हुआ था, लेकिन मीडिया में इसकी खबर 31 अगस्त को सामने आई। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले, जब राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं, हुई यह घटना करीब चार सप्ताह तक सार्वजनिक जानकारी से बाहर कैसे रही। दिल्ली पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बता दें कि निर्भया कांड के बाद देश में सख्त कानून बने। कानून बदले, सिस्टम बदला, दोषियों को फांसी भी मिली। लेकिन 14 साल बाद फिर वही सवाल। आज भी सुरक्षित नहीं है दिल्ली में ‘निर्भया’। 4 अगस्त की रात 16 वर्षीय कक्षा 11 की छात्रा से चलती स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पुलिस के मुताबिक, भारी बारिश में फंसी छात्रा मदद मांगने के लिए बस में सवार हुई थी। घटना 4 अगस्त की रात की है। मैनपुरी की किशोरी परिवार से विवाद के बाद घर से निकलकर नोएडा में अपने रिश्तेदार से मिलने जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, भारी बारिश और अंधेरे के कारण छात्रा गलती से परी चौक पर उतर गई। इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को उसने मदद के लिए रुकने का संकेत दिया। बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप ने छात्रा को बताया कि बस नोएडा सेक्टर-63 जा रही है और उसे अंदर बैठा लिया।
पुलिस ने बताया कि.
बस के चलते ही परिचालक ने किशोरी के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। छात्रा का आरोप है कि इसके बाद चालक और परिचालक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर दोनों ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। बस करीब 47 किलोमीटर का सफर तय करते हुए कश्मीरी गेट की ओर पहुंची। आरोपियों ने देर रात छात्रा को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया और फरार हो गए। घबराई हुई छात्रा ने कश्मीरी गेट पुलिस से संपर्क कर घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने बाद में कुलदीप और संदीप को तिमारपुर स्थित बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया। स्लीपर बस भी जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई है।
जांच में सामने आया कि,
बस पहले खराब हो गई थी और मरम्मत के लिए सूरजपुर की एक कार्यशाला में ले जाई गई थी। मरम्मत के बाद चालक और परिचालक खाली बस को तिमारपुर ले जा रहे थे, तभी परी चौक पर उन्हें किशोरी मिली। पुलिस के मुताबिक, बस की बर्थों के चारों ओर पर्दे लगे थे, जिनकी आड़ में आरोपी अपराध को छिपाने में सफल रहे। परी चौक से कश्मीरी गेट के बीच बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसके बाद किशोरी को सड़क किनारे छोड़ दिया गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 47 किलोमीटर तक बस में एक 16 साल की नाबालिग के साथ बलात्कार होता रहा और यूपी से लेकर दिल्ली तक की पुलिस सोई रही।
जगह-जगह यूपी और दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग लगी रहती है, पुलिस ने कहीं भी बस को रोक कर चेक करने की जरूरत नहीं समझी। जबकि बस में टिंटेड ग्लास और पर्दे लगे थे। जबकि निर्भया कांड के बाद जो 2012 में निर्भया एक्ट बना है उसमें यह विशेष रूप से कानूनी प्रावधान है किसी भी चार पहिया या बड़े वाहनों में शीशों पर ब्लैक फिल्म, टिंटेड ग्लास और पर्दा लगाना गैरकानूनी है।
किशोरी ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के आईएसबीटी और वहां से तिमारपुर तक सड़क पर घूमती रही, चलती बस में लड़की के साथ दुष्कर्म होता रही। लड़की चीखती चिल्लाती रही लेकिन चौकी पर, बैरिकेडिंग पर कहीं पुलिस नहीं थी। हैरानी की बात ये है कि न दिल्ली की सीमा पर बस की कोई जांच हुई, न ही बस में लगे टिंटेड ग्लास और पर्दों पर पुलिस की निगाह पड़ी। एक घंटे 20 मिनिट तक सड़क पर दुष्कर्म होता रहा और कहीं पुलिस को पता नहीं चला। यह पुलिस, ट्रैफिक और पूरे सिस्टम के खोखलेपन को उजागर करता है। हालांकि घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन पुलिस के इस इस निकम्मेपन पर कोई कार्रवाई होगी।