Politics

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को किया रद्द

TCN Desk TCN Desk | 59m ago · 4 min read
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने NEET 2026 से जुड़े मामलों में देशभर में हुए आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पेपर लीक समेत शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न जगहों पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए हालिया आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर रद्द कर दीं।

Bar and Bench की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र तथा संबंधित राज्य सरकारों की ओर से दायर आवेदनों पर विचार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर आपराधिक मामले रद्द कर दिए।


कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम के अलावा अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज इसी तरह की एफआईआर पर न तो कार्रवाई की जाएगी और न ही उनकी जांच आगे बढ़ाई जाएगी। इसका अर्थ है कि इन मामलों को सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा।

कोर्ट ने कहा,

कुछ मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हम पक्षकारों के बीच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करना उचित समझते हैं।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने मंगलवार को 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस ले लिया। यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पर सहमति जताने के बाद लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि NEET 2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा CJP नेतृत्व को दिए गए आश्वासनों के अनुसार एक अखिल भारतीय नीति बनाई जाएगी। शीर्ष अदालत CJP के प्रदर्शनों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें दिल्ली और बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग का मामला भी शामिल है।

केंद्र सरकार ने सोमवार को इस मामले में एक आवेदन दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस द्वारा 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज की गईं 13 एफआईआर रद्द करने का अनुरोध किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के अनुसार

गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि” वाले दिल्ली के 2,873 लोगों के खिलाफ मुकदमा जारी रखा जाएगा। इन लोगों के खिलाफ जांच केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति नष्ट करने के आरोपों तक सीमित रहेगी।

सरकार ने इन लोगों के खिलाफ एक नई और संयुक्त एफआईआर दर्ज करने का प्रस्ताव रखा था। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को ऐसी एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दे दी।

कोर्ट ने कहा, “ऐसी एफआईआर दर्ज की जा सकती है, लेकिन इससे प्रभावित पक्षों के पास कानून के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। एफआईआर को अनुच्छेद 4 में उल्लिखित दो तरह के आरोपों—शारीरिक नुकसान और संपत्ति नष्ट करने—तक ही सीमित रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा,

सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासनों, आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता और इस कोर्ट द्वारा पारित किए जा रहे आदेश को देखते हुए CJP ने 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा है। हमें उम्मीद है कि आज के आदेश का पालन किया जाएगा।”

इससे पहले केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार CJP नेतृत्व के साथ हुई बैठक में दिए गए तीनों आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पहला आश्वासन था कि केंद्र सरकार 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज एफआईआर पर आगे कार्रवाई नहीं करेगी।
दूसरा आश्वासन था कि इस मामले के संबंध में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
तीसरा आश्वासन था कि NEET पेपर लीक से कथित रूप से जुड़ी परिस्थितियों में आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को सरकार मुआवजा देगी।

मेहता ने कोर्ट से कहा, “फिलहाल हम तीनों आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

गौरतलब है कि NEET आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च में उस समय भारी सुरक्षा कार्रवाई देखने को मिली, जब प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।