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BRICS Summit से पहले अरुणाचल में चीनी घुसपैठ, ITBP ने बढ़ाई गश्ती

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
BRICS Summit से पहले अरुणाचल में चीनी घुसपैठ, ITBP ने बढ़ाई गश्ती

चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर गतिविधियों को देखते हुए आईटीबीपी ने सुरक्षा बढ़ाई।

भारत दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। चर्चा है कि इस सम्मलेन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत आ सकते हैं। लेकिन अगर उनके संभावित दौरे से पहले विवादित सीमा पर चीनी सैनिकों के साथ कोई टकराव हो जाता है, तो भारत का रुख क्या होगा? यह एक बड़ा सवाल है।

The Telegraph की एक रिपोर्ट के अनुसार, खबर आ रही है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। सीमा पर चीनी सेना के अतिक्रमण के मद्देनजर आईटीबीपी (Indo-Tibetan Border Police ) ने चौकसी बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक सुरक्षा संगठन के सूत्रों ने बताया आईटीबीपी अरुणाचल प्रदेश की सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित कमियों को दूर करने के लिए अधिक सीमा चौकियों को स्थापित करने का कार्य कर रहे हैं।


क्या भारत मजबूती से खड़ा होकर जमीनी स्तर पर चीनी सैनिकों का मुकाबला करेगा और उनसे पीछे हटने की मांग करेगा? या फिर शी जिनपिंग की यात्रा प्रभावित होने की आशंका में भारत इस मुद्दे पर नरम रुख अपना लेगा? अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की खबरों के बीच इस तरह की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

Strat News Global ने अरुणाचल टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि पीएलए के सैनिकों ने अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग इलाके में भारतीय सुरक्षा बलों की कई महत्वपूर्ण गश्ती स्थलों तक पहुंच को प्रभावी रूप से रोक दिया है। साथ ही, वे वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के पास उन इलाकों पर लगातार अपना नियंत्रण बढ़ा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से भारतीय ग्रामीण चराई और शिकार के लिए करते रहे हैं।

अन्य रिपोर्टों में पश्चिम दिबांग के इफी ट्विन लेक्स इलाके में चीनी सेना की ‘आक्रामक गश्त’ को लेकर भी चेतावनी दी गई है। यह क्षेत्र एलएसी के नजदीक स्थित जिरक्येन ला पर्वतीय दर्रे के पास है। इसी तरह दिबांग घाटी के फिश टेल-1 और इससे दक्षिण में अंजाव जिले के फिश टेल-2 क्षेत्र में भी पीएलए की गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। इन रिपोर्टों में पूर्वी तिब्बत की कार्बी कारपो पर्वत शृंखला का भी उल्लेख किया गया है, जो अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन रेखा से जुड़ती है। हालांकि चिंता केवल यहीं तक सीमित नहीं है।

इस क्षेत्र में सेवाएं दे चुके और बीजिंग में भारत के Defence Attache रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन ने ‘स्ट्रैट न्यूज ग्लोबल’ से कहा,

हमें पूरी एलएसी, खासकर पूर्वी सेक्टर में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। यहां पहले भी आमना-सामना हो चुका है। दिसंबर 2022 में यांग्त्से क्षेत्र में ऐसा ही टकराव हुआ था, जब पीएलए के सैकड़ों सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश की थी।”

इस इलाके में भारतीय चौकियां ऊंचाई पर स्थित हैं और वहां से चीनी क्षेत्र पर नजर रखी जा सकती है। इसी सामरिक बढ़त की वजह से भारतीय सेना समय रहते पर्याप्त संख्या में जवानों को तैनात कर सकी और चीनी सैनिकों को रोकते हुए पीछे धकेल दिया।

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बढ़ता ध्यान इस आकलन से भी जुड़ा हो सकता है कि लद्दाख में अब घुसपैठ करना आसान नहीं है। वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से लद्दाख में भारत और चीन—दोनों ओर से करीब 50-50 हजार सैनिक तैनात हैं। मध्य सेक्टर, जिसमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाके आते हैं, वहां भी कुछ विवादित बिंदु मौजूद हैं। इसके बावजूद दोनों देशों को एलएसी को लेकर एक-दूसरे के दावों और नजरिए की अपेक्षाकृत स्पष्ट समझ है।

भारत चीन के इन दावों को अस्वीकृत करता है अरुणाचल प्रदेश चीन का अभिन्न अंग है। चीन अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों पर अपना दावा करता है। सेना और आईटीबीपी चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैयार हैं। भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनए रखने पर जोर देता है। लंबित सीमा के मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय से जुड़े खुफिया एजेंसी के अधिकारी ने बताया है यह कदम इस क्षेत्र में ,खासकर अरुणाचल प्रदेश में चल रहे हालिया सीमा विवाद के बीच उठाया गया है। ऐसी खबरें हैं कि चीनी गश्ती दल पूर्वी क्षेत्र में एलएसी का उल्लंघन कर रहे हैं और आक्रामकता दिखा रहे हैं

अधिकारी ने बताया आतिरिक्त सीमा चौकियाँ स्थापित की जा रही है और मुख्य रूप से उन संवेदनशील क्षेत्र में अधिक सैनिकों को तैनात किया जा रहा है जो चीनी घुसपैठ के लिए पहले से संदिग्ध है।

अधिकारी ने कहा

भारतीय सेना और आईटीबीपी चीनी गश्ती दल की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं। आईटीबीपी के सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में पूर्वी क्षेत्र में एलएसी के साथ चीनी सैनिकों की तैनाती में काफी वृद्धि हुई है। बताया जा रहा है कि चीन ने पूर्वी क्षेत्र में एक बड़ा अवसंरचना विकास कार्यक्रम चलाया है, जिसमें सड़कों, सुरंगों और राजमार्गों के निर्माण के अलावा हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और वायु रक्षा केंद्र बनाना शामिल है।

आईटीबीपी के ही एक अधिकारी ने बताया कि इसका मुकाबला करने के लिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के साथ राजमार्गों और सड़कों के निर्माण में तेजी लाई है। सूत्रों के मुताबिक चीन ने अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत बताते हुए इस पर दावा किया है। यह दावा 1960 की सीमा वार्ता में भी किया गया था, जिसमें उन्होंने राज्य के लगभग 69,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा जताया था। भारत ने इन दावों को खारिज किया है।

2020 में गलवान घाटी में झड़प हुई थी और पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि अब दोनों पक्षों ने तब से संबंधों को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं।