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Sunday Special : इंसानों के लिए कड़वी चाय और गाड़ियों का मीठा ईंधन

Athar Kalim Ahmed/S.R.Husaini Athar Kalim Ahmed/S.R.Husaini | 1h ago · 4 min read
Sunday Special : इंसानों के लिए कड़वी चाय और गाड़ियों का मीठा ईंधन

आजकल सड़क पर निकलें तो ट्रैफिक जाम में धुएं से सोहन हलवे की खुशबू आती है।

आजकल सड़क पर निकलें तो ट्रैफिक जाम में धुएं से सोहन हलवे की खुशबू आती है। कल पेट्रोल पंप वाले से कहा, "यार! सौ रुपये का पेट्रोल डाल दो।" उसने पाइप पकड़ कर बड़ी संजीदगी से पूछा,

"सर! सादा पेट्रोल डालूं, या इलायची और केवड़ा मार के?" हमने हैरानी से घूरा तो बोला, "सर जी! अब गाड़ियों में पेट्रोल कम और गन्ने का रस ज्यादा डल रहा है। मिठास चेक कर लें, कल एक साहब की कार में चींटियां लग गई थीं!"

अब तो हालत यह है कि लोग गाड़ी का माइलेज किलोमीटर में नहीं, कैलोरीज़ (Calories) में नाप रहे हैं। रात को चोर पेट्रोल चुराने के बजाय गाड़ियों के टैंक में पाइप लगाकर गन्ने का रस निकालते हैं और सुबह चौराहे पर ठेला लगाकर बेच देते हैं।

खबर आई है कि अब तक 30 लाख टन चीनी बनाने वाला गन्ना सीधा गाड़ियों के पेट में जा चुका है। नतीजा? गरीब की चीनी दो माह में 40 प्रतिशत महंगी होकर 70 रुपये किलो के करीब होने वाली है। दो महीने में इतना इज़ाफ़ा? यह महंगाई नहीं, बल्कि क्रिकेट का वह आखिरी ओवर चल रहा है जिसकी हर गेंद पर छक्का पड़ रहा है। लेकिन आप हमारी सरकार की आर्थिक कलाबाज़ियों की दाद दीजिए।


हमने अरबों का महंगा पेट्रोल छोड़कर गाड़ियों को देसी गन्ने का रस पिलाया ताकि हमारा कीमती विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange) बच सके। अब कमाल देखिए कि इसी बचाए हुए विदेशी मुद्रा भंडार से हम ब्राज़ील से 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट कर रहे हैं! यानी हमने कच्चे तेल के लिए अरबों की मिन्नतें करना छोड़ीं, तो अब चीनी के लिए ब्राज़ीलियन्स की खुशामद कर रहे हैं।

केजरीवाल साहब खामख्वाह रो रहे हैं कि पेट्रोल का पैसा चीनी में चला गया। अरे भई! हमारी देसी कड़क चाय में अब विदेशी (Imported) चीनी घुलेगी, क्या यह कोई छोटी तरक्की है? हमारी मोटरसाइकिल भी आजकल अजीब हरकतें कर रही है। कल सड़क पर झटके लेने लगी तो हमने मैकेनिक को दिखाया।

उसने प्लग खोला, सूंघा और बोला, "सर! बाइक का शुगर लेवल डाउन है, फौरन आधा किलो जलेबी खिला दें!" अब ट्रैफिक पुलिस चालान काटते वक्त लाइसेंस नहीं मांगेगी। सीधा पूछेगी, "गाड़ी की थ्री मंथ शुगर रिपोर्ट (HbA1c) दिखाओ, पिछले सिग्नल पर तुम्हारी गाड़ी मीठी डकारें ले रही थी!"

जल्द ही सर्विस स्टेशनों पर मैकेनिक नहीं, बल्कि हकीम बैठा करेंगे जो इंजन में माजून (ताकत की दवा) डालकर उसकी कमज़ोरी दूर करेंगे और डेंटिस्ट गाड़ियों के साइलेंसर चेक करेंगे कि कहीं ज्यादा मीठा पीने से इंजन में कीड़ा तो नहीं लग गया।

सरकार ने जमाखोरों पर भी क्रैकडाउन शुरू कर दिया है और थोक खरीदारों को पाबंद किया है कि वे 15 दिन से ज्यादा की चीनी स्टॉक नहीं कर सकते। अब वह दिन दूर नहीं जब सीआईडी (CID) और एंटी-नारकोटिक्स वाले रात के अंधेरे में मिठाई की दुकानों पर छापे मारा करेंगे।

हलवाई के गोदाम से अगर सोलहवें दिन की चीनी बरामद हो गई, तो उसे यूं हथकड़ियां लगाई जाएंगी जैसे वह कोई अंतरराष्ट्रीय तस्कर हो। पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में फख्र से बताएगी: "हमने एक खतरनाक गैंग को पकड़ा है जिसके कब्ज़े से दो किलो शुद्ध चीनी और एक कड़ाही चाशनी बरामद हुई है!"

चीनी की इस अंतरराष्ट्रीय उड़ान ने इंसानों से ज्यादा चींटियों को टेंशन में डाल दिया है। कल हमारे किचन में दो चींटियां दहाड़ें मार कर रो रही थीं,

जब से चीनी महंगी हुई है, बेगम साहिबा ने डिब्बे पर बायोमेट्रिक लॉक लगा दिया है! अब तो मीठे की शक्ल देखे भी जुमे-जुमे आठ दिन हो गए हैं।" चीनी का भाव इस कदर शाही हो चुका है कि अब शादियों में हक़ मेहर तोले में नहीं, बल्कि बोरियों में तय होगा। दुल्हन वाले फख्र से बताएंगे कि लड़के वालों ने सलामी में दो किलो खालिस इम्पोर्टेड चीनी दी है।

वह दिन दूर नहीं जब लोग परचून (किराने) वाले से कहेंगे, "लाला जी! दो किलो आटा दे दो, और हां, एक चीनी का पाउच (Sachet) भी देना, घर में मेहमान आ रहे हैं।" और अगर किसी नादान मेहमान ने गलती से चाय में दूसरी चम्मच चीनी मांग ली, तो इसे मेहमाननवाज़ी नहीं, बल्कि सीधी-सीधी 'हफ्ता वसूली' (रंगदारी) समझा जाएगा।

मेहमान भी इतने संस्कारी हो जाएंगे कि आधा कप फीकी चाय पीकर मेज़बान से कहेंगे, "माशाअल्लाह! आपकी बातों में जो मिठास है, वह ब्राज़ील की चीनी में कहां!" हमने तो महंगाई का सस्ता हल निकाल लिया है। चाय में मिठास कम लगे, तो हम सीधा सड़क पर निकल जाते हैं। किसी भी सरकारी बस के साइलेंसर के पीछे खड़े होकर दो लंबी सांसें खींचते हैं और चाय का घूंट भर लेते हैं।

यकीन मानें, इथेनॉल वाले धुएं से गन्ने के रस की जो मिठास सीधी दिमाग को चढ़ती है, वह दुनिया की किसी चीनी में नहीं! बस सरकार से एक ही गुज़ारिश है, अगर पेट्रोल में गन्ने का रस मिला ही दिया है, तो गर्मियों में इसमें थोड़ी बर्फ और पुदीना भी डाल दिया करें, ताकि सड़क पर चलते हुए गन्ने का ठंडा रस पीने का एहसास तो मुकम्मल हो!
Athar Kalim Ahmed/S.R.Husaini

Athar Kalim Ahmed/S.R.Husaini

महाराष्ट्र के अतहर कलीम अहमद और एस.आर.हुसैनी उर्दू समाचार पत्रों और विभिन्न वेबसाइट के लिए "आईना खाना" के नाम से हास्य और व्यंग्यात्मक कॉलम लिखते हैं।