क्या नीतीश और भाजपा के साथ प्रशांत किशोर की कोई सेटिंग हो गई है?
मुख्य सचिव समेत बिहार के टॉप अधिकारी प्रशांत किशोर के साथ क्यों फोटो खींचा रहे थे?
बिहार के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर की एक तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। आखिर मुख्य सचिव समेत बिहार के टॉप अधिकारी प्रशांत किशोर के साथ क्यों फोटो खींचा रहे थे। क्या यह बिहार की राजनीति में किसी बदलाव का संकेत तो नहीं हैं?
प्रशांत किशोर के बारे में वैसे भी माना जाता है कि इनके संबंध बीजेपी से भी उतने ही मधुर हैं, जितने जदयू के संग। नीतीश कुमार ने तो इन्हें एक समय पार्टी का उपाध्यक्ष ही बना दिया था। हांलांकि बाद में नीतीश कुमार ने एक न्यूज चैनल को सफाई देते कहा था कि अमित शाह के कहने पर ही मैंने प्रशांत किशोर को पार्टी में एंट्री दिया था।
Indian Express की एक खबर के अनुसार, अब एक बार फिर प्रशांत किशोर इस तस्वीर के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र बनाया गया है। हालांकि इसके एक दिन बाद शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय ने स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें कहा गया कि प्रशांत किशोर ने मुख्य सचिव से आगंतुक कक्ष में अलग से मुलाकात की थी, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अन्य बैठक पहले से चल रही थी।
बता दें कि प्रशांत किशोर ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मुलाकात की थी। इसके बाद सामने आई तस्वीरों में उनके साथ पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) और पटना आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी दिखाई दिए। इसे लेकर बहस छिड़ गई कि पहली बार विधायक बने प्रशांत किशोर के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर हुई बैठक में इतने वरिष्ठ अधिकारी क्यों मौजूद थे।
शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य सचिव कार्यालय ने बताया कि प्रशांत किशोर ने 20 अगस्त को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था और उन्हें 27 अगस्त का समय दिया गया। विज्ञप्ति में कहा गया, “27 अगस्त 2026 को मुख्य सचिव के कक्ष में पहले से एक अन्य बैठक चल रही थी, जिसमें कई अधिकारी मौजूद थे।”
विज्ञप्ति के अनुसार,
इसके बाद मुख्य सचिव ने प्रशांत किशोर से ‘आगंतुक कक्ष’ में मुलाकात की, जहां “कुछ अधिकारी पहले से मौजूद थे।” इसमें यह भी कहा गया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ परंपरागत रूप से आगंतुक कक्ष में ही बैठकें होती रही हैं।
हालांकि, आधिकारिक स्पष्टीकरण का जोर उस तस्वीर से बने माहौल और प्रशांत किशोर द्वारा बैठक के बारे में दी गई जानकारी से अलग नजर आता है। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि पहली बार विधायक बने प्रशांत किशोर के विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को सुनने के लिए बिहार सरकार के लगभग सभी शीर्ष अधिकारी एक साथ कैसे मौजूद थे।
क्या नीतीश और भाजपा के साथ प्रशांत किशोर की कोई सेटिंग हो गई है। क्या प्रशांत किशोर बिहार के अगले सीएम बनाए जा सकते हैं। ऐसे कई सवाल फिलहाल इस तस्वीर के आने के बाद बिहार की राजनीति को समझने वाले जानकारों और पंडितों के दिमाग में अभी से तैरने लगी है।
17 अगस्त को बांकीपुर विधायक के रूप में शपथ लेने वाले प्रशांत किशोर ने बैठक के बाद कहा था कि यह 18 अगस्त को डीजीपी विनय कुमार के साथ हुई उनकी मुलाकात का आंशिक फॉलो-अप था। उस दौरान उन्होंने यातायात, नशे के अवैध कारोबार और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले विक्रेताओं से कथित अवैध वसूली जैसे मुद्दे उठाए थे। प्रशांत किशोर ने कहा था कि गुरुवार को मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक गैर-पुलिस विषयों के साथ नागरिक सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी।
पद संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर 27 अगस्त की यह प्रशांत किशोर की दूसरी उच्चस्तरीय मुलाकात थी। इससे पहले 18 अगस्त को डीजीपी के साथ हुई बैठक में पटना की यातायात समस्याओं का स्थायी और तकनीक-आधारित समाधान तलाशने, नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने और रेहड़ी-पटरी वालों से कथित अवैध वसूली रोकने पर चर्चा हुई थी।
हालांकि, कई लोग मुख्य सचिव कार्यालय के स्पष्टीकरण को तस्वीर पर मचे राजनीतिक विवाद के बाद सामने आई प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। प्रशांत किशोर ने 30 जुलाई को हुए बांकीपुर उपचुनाव में 64,151 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को हराते हुए इस विधानसभा क्षेत्र पर भाजपा का तीन दशक पुराना दबदबा समाप्त कर दिया था।
इससे पहले बांकीपुर का प्रतिनिधित्व नितिन नवीन करते थे। जनवरी में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद राज्यसभा के लिए चुने जाने पर उन्होंने यह सीट खाली कर दी थी।