किसके इशारे पर IIT Delhi में सादे कपड़ों में Delhi Police के जवान बना रहे थे वीडियो?
प्रदर्शनकारी छात्रों का सवाल- Delhi Police के अधिकारी किसके अनुमति से कैंपस के भीतर दाखिल हुए?
IIT दिल्ली के छात्रों ने दावा किया है कि सादे कपड़ों में मौजूद Delhi Police के अधिकारी ने उनके प्रदर्शन का वीडियो बनाया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सवाल उठाया है कि आखिर Delhi Police के अधिकारी किसके अनुमति से कैंपस के भीतर दाखिल हुए। बता दें कि IIT दिल्ली के छात्र पिछले पांच दिनों से लगातार छात्र ऋषिकेश की आत्महत्या के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र ऋषिकेश की मां को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, Hostel आवंटन नीति में बदलाव और डीन के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

The Telegraph की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि
“भविष्य में इस वीडियो का इस्तेमाल छात्रों के खिलाफ किया जा सकता है। यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”
IIT दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने इस अखबार के साथ एक छात्र समूह को दिया अपना रिकॉर्डेड इंटरव्यू साझा किया। वीडियो में वह कहते हैं,
“हमने कैंपस सुरक्षा से जुड़े किसी भी व्यक्ति को वीडियो बनाने की अनुमति नहीं दी है। मुझे एक घटना के बारे में बताया गया है, जिसमें कोई व्यक्ति वीडियो बना रहा था। यह सही नहीं है। उसे कैंपस सुरक्षा के पास ले जाया गया। मैंने दिल्ली पुलिस को कैंपस में आने की अनुमति नहीं दी है।”
बता दें कि कैंपस में पुलिस के प्रवेश के लिए संस्थान प्रशासन की ओर से बुलाया जाना अनिवार्य है।
दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि कैंपस में घुसकर प्रदर्शन का वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। यह आरोप ऐसे समय सामने आया है, जब पांच सप्ताह पहले परीक्षा में धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोप लगे थे। पुलिस पर छात्रों को लाठियों से पीटने, आंसू गैस छोड़ने और पैलेट गन चलाने का आरोप था।
कई छात्रों ने बताया कि बुधवार शाम उन्होंने सादे कपड़ों में एक व्यक्ति को मोबाइल फोन से प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग करते देखा। जब छात्रों ने उसे रोका और सवाल किए तो उसने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया।
एक छात्र ने कहा,
“हम अपने ही कैंपस के भीतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है। कैंपस में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है, फिर पुलिस को भीतर आने की अनुमति कैसे मिली? “हमने उससे पूछा कि कैंपस में प्रवेश करने और प्रदर्शन का वीडियो बनाने की अनुमति किसने दी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। हमें इस हरकत का उद्देश्य नहीं पता, लेकिन हम इसे पुलिस का हस्तक्षेप मानते हैं।”
छात्र सोमवार से प्रदर्शन कर रहे हैं और दो एसोसिएट डीन को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि,
एसोसिएट डीन फॉर स्टूडेंट वेलफेयर ने द्वितीय वर्ष के MSc छात्र ऋषिकेश और उनकी मां से “असंवेदनशील” बातें कही थीं। ऋषिकेश की पिछले सप्ताह कैंपस में कूदकर जान देने से मौत हो गई थी। छात्र एसोसिएट डीन फॉर हॉस्टल मैनेजमेंट को भी हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बीमार होने के कारण ऋषिकेश एक महीने के लिए बिहार स्थित अपने घर चले गए थे, जिसके बाद उनका हॉस्टल का कमरा रद्द कर दिया गया।
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, ऋषिकेश पढ़ाई को लेकर परेशान थे और हॉस्टल में रहने की सुविधा नहीं मिलने के बाद उनका अवसाद और गंभीर हो गया था।
अखबार के साथ साझा किए गए वीडियो में IIT निदेशक बनर्जी बिना “उचित जांच” के एसोसिएट डीन फॉर स्टूडेंट वेलफेयर के इस्तीफे की मांग को खारिज करते नजर आते हैं। वह कहते हैं, “एसोसिएट डीन जितने जवाबदेह हैं, उतना ही मैं भी हूं। एक बाहरी समिति इस मामले की जांच कर रही है। कृपया बाहरी समिति की जांच पूरी होने का इंतजार करें।”
छात्रों ने ऋषिकेश के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि IIT दिल्ली प्रशासन ने अपने कल्याण कोष से छह लाख रुपये देने और एक फंड रेजर के जरिये परिवार के लिए कुछ अतिरिक्त राशि जुटाने का प्रस्ताव रखा है। छात्र चाहते हैं कि संस्थान परिवार को एक करोड़ रुपये देने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जताए और यह रकम जुटाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा घोषित करे।
छात्रों का आरोप है कि एसोसिएट डीन फॉर स्टूडेंट वेलफेयर वर्षों से कई विद्यार्थियों के साथ आहत करने वाली भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। वे मौजूदा और पूर्व छात्रों के ईमेल, टेक्स्ट मैसेज और गवाही जैसे सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।
छात्रों ने संस्थान द्वारा गठित जांच समिति का दायरा बढ़ाने की भी मांग की है, ताकि ऋषिकेश की मां के पुलिस को दिए बयान में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए असंवेदनशील व्यवहार के आरोपों की भी जांच हो सके। इसके अलावा, छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य और हॉस्टल आवंटन से जुड़े मामलों के लिए संस्थान से स्पष्ट नियम और प्रोटोकॉल घोषित करने की मांग की है।