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पेंगुइन ने क्यों सोनिया गांधी की किताब 'Belonging: a Journey of Love' को छापने से किया इनकार?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
पेंगुइन ने क्यों सोनिया गांधी की किताब 'Belonging: a Journey of Love' को छापने से किया इनकार?

पेंगुइन इंडिया ने किताब की पांडुलिपि में परिवर्तन करने को कहा था जिसे सोनिया गांधी ने अस्वीकार कर दिया।

पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा Belonging: a Journey of Love को छापने से इनकार कर दिया है। इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन इंडिया ने किताब की पांडुलिपि में परिवर्तन करने को कहा था जिसे सोनिया गाँधी ने अस्वीकार कर दिया।

इस किताब में सोनिया गांधी ने अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के बारे में लिखा है। यह किताब पेंगुइन इंडिया की तरफ से 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली थी लेकिन अब किताब में सोनिया गांधी के द्वारा परिवर्तन अस्वीकार करने के बाद प्रकाशन ने किताब छापने से इनकार कर दिया है। हालांकि अब पेंगुइन इंडिया के किताब न छापने पर अन्य प्रकाशक किताब छापने में रुचि दिखा रहे हैं। Harper Collins अब सोनिया गाँधी की किताब बिलॉंगइंग ए जर्नी ऑफ लव के प्रकाशन और वितरण में दिलचस्पी ले रहे हैं।


Belonging: a Journey of Love नामक यह पुस्तक सोनिया गाँधी के बचपन, प्रेम, परिवार और उनकी राजनीतिक जिंदगी की दिलचस्प कहानी है। कैसे एक इटली के छोटे गाँव में पैदा हुई एक लड़की भारत में राजनीतिज्ञ के रूप में एक उभर कर आती है। इस संस्मरण में सोनिया गाँधी अपने जीवन का दस्तावेज प्रस्तुत करती है। जो उनके निजी और राजनीतिक जीवन का वर्णन करता है।

इस पुस्तक में सोनिया गाँधी इंग्लैंड के कैंब्रिज में राजीव गाँधी से मिलने, शादी और साथ ही इंदिरा गांधी और राजीव गाँधी की मृत्यु का भी उल्लेख करती हैं। यह किताब सोनिया गाँधी के बचपन से लेकर उनके रजिनीतिक जीवन का दस्तावेज है। सोनिया गाँधी अपने राजनिक जीवन मैं आने वाले दबाव का विरोध और जीवन में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करती हैं। किताब आखिर मूल रूप से एक साहसी स्त्री की कहानी है जो जीवन को सवारने और देश की सेवा करने का कार्य करती है।

राहुल गाँधी ने एक्स पोस्ट में कहा है कि,


मैंने आपको जीवन की हर चुनौती का सामना अदम्य साहस और गरिमा के साथ करते देखा है। मैंने आपको और पापा को आखिरी बार 35 साल पहले देखा था। पुस्तक का विषय में बात करते हुए राहुल कहते हैं “मुझे खुशी और गर्व है कि आपकी कहानी - "अपनापन: प्रेम की यात्रा" - आखिरकार उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी जो आपसे प्यार करते हैं। मैं जानता हूँ कि आप जैसी निजी इंसान के लिए अपनी इस खूबसूरत कहानी को दुनिया को बताना कितना मुश्किल रहा होगा। आज, उनके जन्मदिन पर, मैं पापा को मुस्कुराते हुए और अपनी प्यारी सोनिया को गर्व से देखते हुए देख सकता हूँ। प्यार सहित, राहुल”

सूत्रों के मुताबिक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पांडुलिपि के एक हिस्से में कुछ “संपादकीय बदलाव और अंश हटाने” की मांग की थी, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया। इसी कारण प्रकाशक और लेखिका के बीच सहमति नहीं बन सकी। पेंगुइन इंडिया के पीछे हटने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशक इस किताब के प्रकाशन की दौड़ में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि Harper Collins भारत में पुस्तक के प्रकाशन और वितरण के लिए समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है।

किताब को 10 नवंबर को जारी किया जाना प्रस्तावित है। इसकी पहली घोषणा अमेरिका स्थित अल्फ्रेड ए. नॉफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक विभाग है। नॉफ के मुताबिक, किताब के पहले संस्करण की एक लाख प्रतियां छापने की योजना है।

इंडियन एक्स्प्रेस ने नॉफ और सोनिया गांधी के प्रतिनिधि डेविड गॉडविन से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन दोनों से संपर्क नहीं हो सका। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के सीईओ गौरव श्रीनागेश से भी पांडुलिपि में मांगे गए “बदलावों और अंशों को हटाने” को लेकर सवाल पूछे गए, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।

सोनिया गांधी इससे पहले कई किताबें लिख और संपादित कर चुकी हैं। हालांकि, इस पुस्तक पर काम कर चुके लोगों का कहना है कि यह उनके जीवन का अब तक का सबसे निजी और व्यापक विवरण है। नॉफ ने इसे “दुनिया की सबसे प्रमुख महिला नेताओं में से एक की रोमांचक आत्मकथा” बताया है, जिसमें प्रेम, परिवार और भारत जैसे हमेशा आकर्षित करने वाले देश की कहानी बेहद रोचक तरीके से प्रस्तुत की गई है।

नॉफ की ओर से जारी बयान में सोनिया गांधी के हवाले से कहा गया,

मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम विवरण उनके फैसलों के पीछे की वास्तविक प्रेरणाओं, उनके कार्यों और यहां तक कि उनकी मानवीय कमियों की सच्चाई तक पहुंच पाए हैं। मेरी कहानी पाठकों को उन सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का एक विशिष्ट दृष्टिकोण भी प्रदान करती है, जिन्हें मैंने छह दशकों के दौरान करीब से देखा है।”

इससे पहले इसी वर्ष पीआरएचआई ने एक बयान जारी कर कहा था कि,

उसने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को “प्रकाशित नहीं किया है।” हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में इस पुस्तक की एक मुद्रित प्रति दिखाई थी। नरवणे की आत्मकथा के कुछ अंश मीडिया में भी सामने आए थे, जिनमें गलवान में भारत-चीन सैन्य टकराव और अग्निपथ योजना से जुड़ा उनका विवरण शामिल था।

इस वर्ष जून में Penguin ने प्रसिद्ध ग्राफिक उपन्यासकार जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित पुस्तक ‘द वन्स एंड फ्यूचर रायट’ के प्रकाशन से हाथ खींच लिया है। उस समय सीईओ गौरव श्रीनागेश ने कहा था कि कानूनी समीक्षा के दौरान प्रकाशक ने लेखक के सामने सामग्री से जुड़े कुछ मुद्दे उठाए थे। इनमें भारत की सीमाओं को गलत तरीके से दिखाने वाला एक नक्शा भी शामिल था।