पीएम मोदी 18 घंटे काम करते हैं, फिर 70% लोगों को मुफ्त राशन देने की जरूरत क्यों?
देश नारों से नहीं चलता है, फैसलों से चलता है और मोदी सरकार के फैसले बताते हैं कि वो देश का विकास किसके लिए चाहते हैं।
कोई भी देश उस देश के रहने वाले लोगों से बनता है देश किस दिशा में प्रगति करेगा या उस देश का भविष्य कैसा होगा ये फैसले उस देश को चलाने वाले लोगों जो सत्ता में बैठते है उनसे तय होता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और किसी देश को लोकतांत्रिक देश मानने के पैमाने क्या होते हैं।
The Center of High Impact Philanthropy, University of Pennsylvania की रिपोर्ट Three ways to Frame and Measure Democracy में लोकतंत्र के विषय में Empowered citizen, fair processes, Responsive policy, information and communication और social cohesion को माना गया है। जब कोई देश इन सब विषयों पर ध्यान देता है और अपने देश के नागरिकों और उनके हितों को सर्वोपरि रखता है तथा उसके अधिकारों का मान रखता है तब हम उस देश को उस देश के लोगों के लिए अग्रसर समझते हैं।
वर्ष 2014 से देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में देश कि दशा कैसी है और देश किस दिशा में प्रगति कर रहा है ये जानने के लिए हम देश में हुए विकास और सरकार के लिए फैसलों का लोगों के असर पर पता चलता है। अगर हमें देश के शिक्षा का स्तर नरेंद्र मोदी के शासन के दौर में जानना है तो देश में शिक्षा के मुद्दों को संबोधित करना पड़ेगा और इसका सबसे ताजा उदाहरण देश में नीट पेपर को लेकर जंतर मंतर में हुआ प्रोटेस्ट है। नीट पेपर लीक की खबर के कारण National Testing Agency (NTA) को पेपर कैंसल करना पड़ा और दुबारा पेपर करवाना पड़ा। नीट पेपर के कारण लगभग 21 छात्रों ने आत्महत्या की। ये सिर्फ एक ही डाटा है जो बताता है देश किस दिशा में प्रगति कर रहा है।
देश का भविष्य स्कूलों में बनते है और जब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा तब देश का भविष्य बर्बाद ही होगा। वर्ष 2014 से लेकर 2026 तक लगभग 93 पेपर लीक होने का दावा आम आदमी पार्टी ने अपने एक्स हैन्डल पर किया है। साथ ही देश में ग्रैजुएशन के बाद लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार,
8.25% को ही सालभर में नौकरी मिल पा रही है और 80% में व्यावहारिक अनुभव की कमी है। देश की अर्थव्यवस्था देश की मजबूती का आधार तय करती है। फिलहाल देश की जीडीपी 6वें पायदान पर है।
नरेंद्र मोदी ने देश को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दावा किया था। फिलहाल वो दावा अभी हवा में ही है। वर्ष 2018 में किए दावे के अनुसार, भारत को 2025 तक 5 ट्रिलियन इकोनामी वाला देश बन जाना चाहिए था किन्तु अब ये दावा 2029 तक पूरे होने कि उम्मीद बताई जा रही है।
देश में रहने वाले लोगों के हितों का सरकार कितना ध्यान रखती है भारत देश धर्मनिरपेक्ष देश है। मतलब सरकार की नजर में सब धर्म बराबर है पर ये बात केवल बात ही नजर आती है। क्योंकि देश में आए दिन मोदी सरकार के दौर में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा दिखाई पड़ती है।
खुद नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के दौरान अपने भाषण में मुसलमानों को मंगलसूत्र चुराने वाले कहते है तथा उनके अनेक ऐसे बयान है जो मुसलमानों के खिलाफ होते हैं। एक चुनावी भाषण में मोदीजी ने मुसलमानों को लेकर बयान दिया था कि कपड़ों से उनकी पहचान होती है। वहीं क्रिसमस के दौरान 2025 में देश में ईसाई समुदाय के खिलाफ होने वाले बर्ताव के अनेक वीडियोज़ यूट्यूब में पड़े हुए हैं।
मोदी सरकार ने अपने अनेक फैसलों को मास्टरस्ट्रोक बताया है जिनमे नोटबंदी और Make in India भी है। मेक इन इंडिया को मोदी सरकार ने बहुत जोर शोर से प्रचार किया था और आज इन सबकी हालत सबको पता ही है। खुद नरेंद्र मोदी नोटबंदी की बात करना भूल गए हैं।
देश की आधी आबादी का हाल समझते हैं। नरेंद्र मोदी के दौर में खूब बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा दिया गया। आज बेटियों की हालत देश में किसी से छुपी नहीं है आए दिन रेप के मामले आते हैं। बीजेपी के अनेक नेता बेटियों के बारे में बयानबाजी करते रहते है। देश के नेता विपक्ष राहुल गांधी आए दिन इन सब मुद्दों के लिए बीजेपी को घेरते हैं। पुणे में राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज women’s स्पेशल महा रैली का आयोजन किया।
देश नारों से नहीं चलता है, फैसलों से चलता है। और बीजेपी के फैसले बताते हैं कि वो देश का विकास किसके लिए चाहते हैं। जब आम जन के लिए प्रधानसेवक 18 घंटे काम करते हैं तब 70% देश के लोगों को राशन बाटने की जरूरत क्यूं पड़ रही है।
Pritika Bara
प्रीतिका बड़ा दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विषय में आदिवासी साहित्य पर शोध कर रही हैं।