बैकफुट पर मोदी सरकार, E 20 के साथ E 10 पेट्रोल बेचने पर भी हो रहा विचार
E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
E 20 पेट्रोल को लेकर देशभर में वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्टरों के व्यापक विरोध के बाद मोदी सरकार अब झुकती हुई नजर आ रही है। देश में मानक पेट्रोल के रूप में केवल E20—यानी 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल—बेचे जाने को लेकर जारी बहस के बीच पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। देश की दूसरी सबसे बड़ी ईंधन खुदरा कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के चेयरमैन संजय खन्ना ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, क्योंकि दो अलग-अलग बेस फ्यूल बेचने से जुड़ी आपूर्ति और लॉजिस्टिक चुनौतियों पर चर्चा जारी है।
खन्ना ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के एक सवाल के जवाब में कहा,
जिन विकल्पों पर विचार हो रहा है, उनमें पुराने वाहनों के लिए E10 ईंधन उपलब्ध कराना भी शामिल है। फिलहाल इसी संभावना पर काम किया जा रहा है। इसकी आपूर्ति से जुड़ी क्या चुनौतियां होंगी और क्या हम मोटर स्पिरिट यानी पेट्रोल के एक अतिरिक्त ग्रेड को समानांतर रूप से संभाल सकते हैं—इन सभी पहलुओं पर चर्चा और काम चल रहा है। यही वजह है कि अभी हमारे पास कोई तैयार जवाब नहीं है। निश्चित रूप से यह उन विकल्पों में शामिल है, जिन पर विचार किया जा रहा है। इसे किस रूप में और कितने स्तर तक लागू किया जाएगा, इसका विवरण विभिन्न स्तरों पर तैयार किया जा रहा है।”
इससे पहले 19 अगस्त को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि सरकार और पेट्रोलियम उद्योग के भीतर शुरुआती स्तर पर इस बात की चर्चा चल रही है कि क्या E20 के साथ पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल भी बेचा जा सकता है।
भारत ने पिछले वर्ष ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था। यह उपलब्धि मूल समय-सीमा से पांच वर्ष पहले हासिल की गई। हालांकि, E20 पेट्रोल को लेकर कई वर्गों ने आपत्ति जताई है। दावा किया जा रहा है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किए गए पुराने वाहनों में इससे माइलेज घट सकता है और इंजन के पुर्जों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।
सरकार इन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करती रही है। उसका कहना है कि पुराने वाहनों में माइलेज की कमी अधिकतम तीन से पांच प्रतिशत तक हो सकती है और E20 के फायदे इस नुकसान से कहीं अधिक हैं। सरकार इसे अधिक स्वच्छ और बेहतर ईंधन बताती है। उसने इस दावे को भी लगातार खारिज किया है कि E20 से इंजन के पुर्जे खराब हो सकते हैं। इसके बावजूद यह सवाल उठता रहा है कि वाहन मालिकों को शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 में से चुनाव करने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा।
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, ये चर्चाएं अभी शुरुआती चरण में हैं। इनमें देश की जटिल ईंधन खुदरा आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े तकनीकी और गैर-तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि E20 के खिलाफ कुछ वर्गों की नाराजगी और उपभोक्ताओं के पास विकल्प न होने की शिकायत के कारण ये चर्चाएं शुरू हुईं। यह चिंता विशेष रूप से उन पुराने वाहनों और दोपहिया वाहनों को लेकर है, जिन्हें E10 पेट्रोल के लिए प्रमाणित किया गया था।
सरकार ने जुलाई में कहा था कि देशभर में एक ही बेस फ्यूल के कई ग्रेड उपलब्ध कराने से “बहुत बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती” पैदा होगी। इससे लागत बढ़ने के साथ भारत के जटिल ईंधन वितरण नेटवर्क की परिचालन क्षमता भी प्रभावित होगी। सरकार का यह भी कहना था कि मौजूदा E20 ईंधन शुद्ध पेट्रोल और कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ एवं बेहतर है। इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा चुका है, इसलिए कई कारणों से दोबारा कम मिश्रण वाले ईंधन की ओर लौटना उचित नहीं होगा।
भारत में पेट्रोल दूसरा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला पेट्रोलियम ईंधन है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में लगभग 4.3 करोड़ टन पेट्रोल की खपत हुई थी।
इस बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पुजारी ने 18 अगस्त को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक आलेख में E20 के साथ E10 जैसे कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को भी उपलब्ध कराने की वकालत की थी। हालांकि, लेख में व्यक्त विचार निजी थे, फिर भी यह पहली बार था जब सरकार के किसी इतने वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से पेट्रोल के अधिक विकल्प देने की मांग की।
नागेश्वरन और पुजारी ने लिखा था,
पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 जैसे कम मिश्रण वाले ईंधन का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराने से लोगों की अधिकतर चिंताएं दूर होंगी। इससे एथेनॉल की कुल खपत बढ़ने के बजाय घटेगी और जब तक वाहनों को तकनीकी रूप से अनुकूल बनाने का कार्यक्रम पूरा नहीं होता, तब तक मौजूदा वाहन बेड़े को सुरक्षा मिलेगी।”
दोनों लेखकों ने यह माना कि इंजन खराब होने को लेकर सोशल मीडिया पर जताई जा रही चिंतियां तथ्यों की कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं। फिर भी उन्होंने देश में मौजूद लाखों पुराने दोपहिया वाहनों को लेकर चिंता जताई, जिनका निर्माण E20 ईंधन के इस्तेमाल के लिए नहीं किया गया था।
वाहन उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद निर्मित और बेचे गए पेट्रोल वाहनों को ही पूरी तरह E20-अनुकूल माना जाता है। तेल उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पेट्रोल के दो बेस वेरिएंट एक साथ उपलब्ध कराना “सरल और सीधा” काम नहीं है तथा इसमें कई तरह की जटिलताएं सामने आएंगी।
पहचान उजागर न करने की शर्त पर अधिकारी ने कहा,
“यह लगभग एक नया पेट्रोल वेरिएंट शुरू करने जैसा होगा और वह भी बड़े पैमाने पर। बेस फ्यूल E20 के अलावा हमारे पास दो-तीन प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट पहले से हैं, लेकिन बेस पेट्रोल की तुलना में उनकी खपत बेहद कम है। इसलिए E20 के साथ सीमित मात्रा में ऐसे ईंधन उपलब्ध कराना ज्यादा मुश्किल नहीं है। लेकिन यदि E10 को बड़ी मात्रा में बेचना है तो मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था के समानांतर लगभग एक नया सप्लाई नेटवर्क तैयार करना पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह E20 पर स्थानांतरित हो चुकी है।”
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर एक या दो भूमिगत टैंक ही होते हैं। E20 के साथ E10 उपलब्ध कराने के लिए हजारों पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल के लिए अलग-अलग टैंकों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके अलावा दोनों ईंधनों के लिए अलग डिस्पेंसर भी लगाने होंगे।