Economy

मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी E20 पेट्रोल से नाराज

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी E20 पेट्रोल से नाराज

CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि एथेनॉल की कम मात्रा वाले पेट्रोल का विकल्प फिर से उपलब्ध कराना चाहिए।

देश में एथेनॉल की कम मात्रा वाले पेट्रोल का विकल्प फिर से उपलब्ध कराना चाहिए। Indian Express में मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को प्रकाशित एक लेख में यह सुझाव दिया है। विवादित ईंधन नीति में बदलाव के खिलाफ उपभोक्ताओं में बढ़ती नाराज़गी के बीच यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पेट्रोल के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही है।


E20 यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला होता है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर के पेट्रोल पंपों पर बिक्री के लिए यही एकमात्र पेट्रोल उपलब्ध है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तेल आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण पर अंकुश लगाने में मदद करना है। लेकिन इस कदम के बाद वाहनों की परफॉर्मेंस और ऑटो पार्ट्स को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर व्यापक चिंताएं सामने आई हैं। कई वाहन मालिक सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं और सरकार से कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के विकल्प भी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

नागेश्वरन ने सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख में लिखा है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ कम एथेनॉल वाला पेट्रोल, मसलन E10, फिर से उपलब्ध कराया जाए तो इससे जनता की ज्यादातर चिंताएं दूर हो जाएंगी।” यह लेख आर्थिक मामलों के विभाग में सलाहकार आकाश पुजारी के साथ मिलकर लिखा गया है। दोनों ने स्पष्ट किया कि लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं। हालांकि, भारत में शीर्ष सरकारी अधिकारियों का सार्वजनिक रूप से सरकार के रुख से असहमति जताना दुर्लभ है।

भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस संबंध में रॉयटर्स के सवाल का तत्काल जवाब नहीं दिया। पिछले महीने सरकार ने कहा था कि E0 या E10 जैसे कम एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को दोबारा उपलब्ध कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

यह लेख Reuters की पिछले सप्ताह प्रकाशित उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें बताया गया था कि देश की प्रमुख वाहन कंपनियों ने E20 पेट्रोल में संदूषण को लेकर अपनी चिंताओं पर निजी तौर पर चर्चा की थी। इसके कुछ दिनों बाद वाहन उद्योग के एक संगठन ने सरकार को शिकायत पत्र भेजा था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

CEA वी. अनंत नागेश्वरन के लेख में कहा गया है कि उपलब्ध सबूत इंजन को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं का समर्थन नहीं करते, लेकिन पुराने वाहनों पर E20 के कुछ अन्य प्रभावों को लेकर वास्तविक चिंताएं हैं।

लेख में कहा गया कि भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हैं। पुराने रबर सील, जिन्हें एथेनॉल के अनुकूल नहीं बनाया गया था, एक अलग समस्या हैं। इन सील को बदलकर एथेनॉल के अनुकूल बनाने में वर्षों लगेंगे। जब तक वाहनों को अनुकूल बनाने का कार्यक्रम पूरा नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा वाहन की सुरक्षा करनी चाहिए।

CEA ने लेख में कहा है कि,

लोगों में तेजी से यह शिकायत फैल रही है कि सरकार का E20 पेट्रोल इंजनों को खराब कर देता है और वाहन का ईंधन भी जल्दी खत्म होता है। यह आरोप जोर-शोर से लगाया जा रहा है, लेकिन इसके मुख्य दावे में सच्चाई नहीं है। फिर भी इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी गलती होगी, क्योंकि इस शोर के पीछे एक वास्तविक समस्या और उससे भी बड़ा सवाल छिपा है।

भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ ऐसे पुराने दोपहिया वाहन हैं, जो BS4 मानक से पहले बने थे और कार्बोरेटर पर चलते हैं। कार्बोरेटर ईंधन मिश्रण में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन को पहचानकर उसके अनुसार खुद को समायोजित नहीं कर सकता। इसलिए E20 इस्तेमाल करने पर इंजन जितनी हवा खींचता है, उसके अनुपात में ईंधन कम पहुंचता है और इंजन ज्यादा गर्म होने लगता है। इसके अलावा पुराने रबर सील भी एक अलग समस्या हैं। जो सील एथेनॉल के अनुकूल नहीं बनाए गए थे, वे इस ईंधन के संपर्क में आने पर खराब होने लगते हैं, भले ही इंजन का तापमान कुछ भी हो।

CEA ने लिखा है कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ कम मिश्रण वाला पेट्रोल, मसलन E10, दोबारा उपलब्ध कराने से जनता की अधिकांश चिंताएं दूर हो सकती हैं। इससे कुल एथेनॉल की खपत बढ़ने के बजाय कम होगी और जब तक पुराने वाहनों को एथेनॉल के अनुकूल बनाने का कार्यक्रम पूरा नहीं होता, तब तक देश के मौजूदा वाहन को भी सुरक्षा मिल सकेगी।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ऑटो इंडस्ट्री की तरफ से देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने केंद्र सरकार को आगाह किया था कि E20 पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो सकता है और E20 पेट्रोल में दूषित तत्व क्लोराइड है। Reuters के अनुसार, मारूति सुजुकी, टाटा मोटर्स और मंहिद्रा कंपनी के आंतरिक ई-मेल से इसका पर्दाफाश हुआ है। ई-मेल के जरिये मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के शीर्ष अधिकारियों ने 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल यानी E20 में दूषित तत्व क्लोराइड को लेकर अपनी चिंताओं पर चर्चा की थी और केंद्र सरकार को इस संबंध में आगाह भी किया था।