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कार कंपनियों के ई-मेल से हुआ खुलासा, E 20 से इंजन होता है खराब

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
कार कंपनियों के ई-मेल से हुआ खुलासा, E 20 से इंजन होता है खराब

मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा कंपनी को पता था कि E20 पेट्रोल में क्लोराइड है।

ऑटो इंडस्ट्री की तरफ से देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने केंद्र सरकार को आगाह किया था कि E20 पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो सकता है और E20 पेट्रोल में दूषित तत्व क्लोराइड है। Reuters के अनुसार, मारूति सुजुकी, टाटा मोटर्स और मंहिद्रा कंपनी के आंतरिक ई-मेल से इसका पर्दाफाश हुआ है। ई-मेल के जरिये मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के शीर्ष अधिकारियों ने 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल यानी E20 में दूषित तत्व क्लोराइड को लेकर अपनी चिंताओं पर चर्चा की थी और केंद्र सरकार को इस संबंध में आगाह भी किया था।


मारुति, टाटा, महिंद्रा और SIAM के बीच साझा किए गए ग्रुप ई-मेल में,

मारुति के वरिष्ठ अधिकारी अनूप भट ने E 20 पेट्रोल में क्लोराइड की अधिक मात्रा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर 26 जुलाई को पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ निजी तौर पर चर्चा हुई थी।

हांलाकि यह बात अलग है कि ऑटोमोबाइल उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने पिछले हफ्ते भारत सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दिलाए जाने के कुछ ही घंटों बाद कि एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल सुरक्षित है, E20 पेट्रोल में मिलावट/दूषित तत्वों को लेकर सरकार को एक हफ्ते पहले भेजी अपनी शिकायत वापस ले ली। संगठन ने कहा कि कुछ आंकड़ों की और जांच किए जाने की जरूरत है।


Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के अधिकारियों के आपसी संवाद से पता चलता है कि 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल यानी E20 में दूषित तत्व है जो वाहनों के इंधन को खराब कर सकता है। इतना ही नहीं इन कंपनियों ने व्यापक स्तर पर इंधन परीक्षण भी किया था जिसके आंकड़े अब सामने आ गए हैं। यह परीक्षण मोदी सरकार द्वारा पिछले साल से देशभर में E20 लागू किए जाने के बाद किया गया। कार कंपनियों के ईमेल पहली बार दिखाते हैं कि सार्वजनिक रूप से सरकार के E20 अभियान का समर्थन करने के बावजूद कंपनियां निजी तौर पर इसमें क्लोराइड और नमी जैसे दूषित तत्वों को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि ये तत्व वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बता दें कि सरकार ने प्रदूषण कम करने और तेल आयात घटाने के उद्देश्य से E20 को बढ़ावा दिया है।

Reuters द्वारा देखे गए, पहले सार्वजनिक नहीं किए गए उद्योग के आंकड़ों और ईमेल से पता चलता है कि

कई वाहन कंपनियां पहले ही बड़े पैमाने पर परीक्षण कर चुकी थीं। उन्होंने एक साल के दौरान भारत के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 21 में पेट्रोल पंपों से 250 से अधिक ईंधन नमूने एकत्र किए थे। इन परीक्षणों में 18 राज्यों के कई नमूनों में क्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई। साथ ही नमी की मात्रा भी अधिक मिली।

निजी ईमेल के बारे में पूछे जाने पर SIAM ने Reuters से कहा कि ये आंकड़े केवल आंतरिक स्तर पर साझा करने, चर्चा और सत्यापन के लिए थे और इन्हें बहुत कम वाहन कंपनियों ने एकत्र किया था। Reuters द्वारा देखे गए SIAM के आंतरिक ईमेल में शामिल मारुति, टाटा और महिंद्रा की भारत के कार बाजार में संयुक्त हिस्सेदारी करीब 67% है।

SIAM ने कहा कि “परीक्षण का आधार और नमूनों की संख्या किसी निर्णायक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसलिए यह पत्र वापस ले लिया गया।” संगठन के मुताबिक यह पत्र अनजाने में भेज दिया गया था। SIAM ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर एक उचित वैज्ञानिक अध्ययन कराने का इरादा रखता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रीहरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि,

SIAM का पत्र मिलने से दो हफ्ते पहले ही भारत की तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन में दूषित तत्वों की जांच के लिए कड़े परीक्षण शुरू कर दिए थे। पुरी के मुताबिक, दूषित ईंधन के केवल चार मामले पाए गए।

सरकारी ईंधन कंपनियों ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि व्यापक, रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि “ईंधन दूषित होने को लेकर किसी तरह की चिंता की कोई वजह नहीं है। महिंद्रा ने कहा कि उसके अधिकारी के ईमेल से निकाले गए निष्कर्ष “पूरी तरह निराधार और गलत” हैं। कंपनी के मुताबिक उद्योग के आंकड़े सीमित और शुरुआती स्तर के हैं तथा उसे E20 को लेकर कोई समस्या नजर नहीं आती। मारुति और टाटा ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।

E20 को लेकर वाहन मालिकों में नाराजगी भी देखी गई है। सैकड़ों लोगों ने आरोप लगाया है कि इससे उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है और पार्ट्स खराब हो रहे हैं। SIAM पहले कह चुका है कि

क्लोराइड की अधिक मात्रा वाहन के पुर्जों में जंग लगा सकती है, जबकि ईंधन में नमी अधिक होने पर पेट्रोल भरवाने के तुरंत बाद वाहन बंद भी हो सकता है।

उद्योग द्वारा ग्रुप ईमेल में साझा किए गए राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक क्लोराइड का स्तर इस प्रकार दर्ज किया गया।

राजस्थान: 6 से 570 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) , नई दिल्ली: 1.4 से 420 ppm और महाराष्ट्र: 10 से 357 ppm। भारत सरकार के मुताबिक क्लोराइड की स्वीकार्य सीमा 3 ppm है।

आंकड़ों में नमी की मात्रा भी काफी अधिक दिखाई गई। आंध्र प्रदेश में यह 13,000 ppm और उत्तर प्रदेश में 12,500 ppm तक पहुंची, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित स्वीकार्य मानक 3,000 ppm है।

दूषित तत्व आने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि SIAM ने अपने अब वापस लिए जा चुके पत्र में कहा था कि E20 लागू होने के बाद से उसने क्लोराइड के स्तर में बढ़ोतरी देखी है। संगठन ने सरकार से तेल विपणन कंपनियों को इसका मूल कारण पता लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। नमी के मामले में SIAM के पत्र में कहा गया था कि इसकी वजह पेट्रोल पंपों पर मौजूद भूमिगत भंडारण टैंकों और पाइपलाइनों का अपर्याप्त रखरखाव हो सकता है।

महिंद्रा के फ्लूइड टेक्नोलॉजी के सीनियर प्रिंसिपल इंजीनियर आर. रामप्रभुने ईमेल में कहा कि,

ऑर्गेनिक क्लोराइड वह दूषित तत्व है, जो उद्योग में देखी जा रही वाहनों की बेहद तेजी से खराबी के लिए जिम्मेदार है और यह “200 किलोमीटर के भीतर” इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने लिखा,

ईंधन भरवाने के तुरंत बाद सामने आने वाले ज्यादातर मामले ऑर्गेनिक क्लोराइड के कारण हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि महिंद्रा के पास पेट्रोल पंपों से लिए गए ईंधन नमूनों के आंकड़ों के रूप में इसके मजबूत सबूत हैं।

महिंद्रा के रामप्रभु और मारुति के अनूप भट ने Reuters के सवालों का जवाब नहीं दिया।