कर्नाटक में BLO का आरोप, मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने लिए दबाव बनाया गया
कुछ लोगों ने कहा कि आवेदनों में उन्हें आपत्तिकर्ता बताया गया है, जबकि उन्होंने किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आवेदन दिया ही नहीं था।
कर्नाटक के बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग वाले बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन सामने आए हैं। कई मतदान केंद्रों के बूथ स्तर अधिकारियों यानी बीएलओ ने आरोप लगाया है कि उन पर इन फॉर्मों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि आवेदनों में उन्हें आपत्तिकर्ता बताया गया है, जबकि उन्होंने किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आवेदन दिया ही नहीं था।
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे आवेदन कम से कम छह मतदान केंद्रों पर लाए गए थे। इनमें वीरभद्र नगर के चार मतदान केंद्र और शेट्टीगली स्थित सरकारी कन्नड़ उच्च प्राथमिक विद्यालय के दो केंद्र शामिल हैं। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
बेलगावी नगर निगम से होने का दावा करने वाले दो व्यक्ति बड़ी संख्या में पहले से छपे फॉर्म-7 लेकर मतदान केंद्रों पर पहुंचे थे। इन फॉर्मों में मतदाताओं के नाम और अन्य जानकारियां दर्ज थीं। हालांकि, आपत्तिकर्ताओं के नाम कहीं हाथ से लिखे गए थे और कहीं खाली छोड़ दिए गए थे। बताया गया है कि आवेदनों में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी।
वीरभद्र उर्दू मॉडल स्कूल में बूथ स्तर एजेंट यानी बीएलए मीरसाब सनादी ने बताया कि इन आवेदनों में अपना नाम देखकर वह हैरान रह गए। उनके मुताबिक, सूची में उनके भाई, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के नाम भी शामिल थे।
सनादी ने कहा,
मैं कम से कम पिछले 15 वर्षों से बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 196 पर बूथ स्तर एजेंट हूं। लेकिन पिछले सप्ताह स्कूल में कम से कम 380 फॉर्म-7 आवेदन देखकर मैं चौंक गया। इनमें मेरा, मेरे भाई, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के नाम हटाने की मांग की गई थी।
बीएलओ ने ‘The Hindu को बताया कि दोनों व्यक्ति बार-बार उनसे फॉर्मों पर हस्ताक्षर करके तत्काल लौटाने को कह रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने इसका विरोध किया, क्योंकि वे आवेदनों में दर्ज मतदाताओं को जानते थे। उनका कहना था कि ये मतदाता कई वर्षों से उसी इलाके में रह रहे हैं।
आरोप है कि इसके बाद दोनों व्यक्तियों ने किसी को फोन किया। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ उदयकुमार बसवंतप्पा तलवार बताया और बीएलओ को फॉर्मों पर हस्ताक्षर करने का निर्देश दिया।
हालांकि, तलवार ने The Hindu से बातचीत में ऐसे निर्देश देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि किसी ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है और उन्होंने बीएलओ को इन आवेदनों पर हस्ताक्षर करने के लिए नहीं कहा था।
कुछ बीएलओ ने बताया कि दबाव के कारण उन्होंने फॉर्मों पर हस्ताक्षर कर दिए। वहीं, अन्य अधिकारियों ने अपने पर्यवेक्षकों और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
कांग्रेस कार्यकर्ता अमान सैत ने कहा कि पूछताछ किए जाने पर दोनों व्यक्तियों ने पहले खुद को नगर निगम से जुड़ा बताया था। बाद में उन्होंने दावा किया कि वे डॉ. रवि पाटिल अस्पताल से संबंधित हैं। सैत के मुताबिक, फॉर्मों में आपत्तिकर्ता के रूप में दर्ज कुछ लोगों से संपर्क किया गया। इन लोगों ने पुष्टि की कि आवेदनों पर उनके नाम और फोन नंबर लिखे थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए उन्होंने ये आवेदन जमा नहीं किए थे। सैत ने बताया कि मामला तुरंत अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बाद आवेदनों का एक सेट वापस हासिल कर लिया गया। लेकिन अन्य मतदान केंद्रों पर इसी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकी।
एक मामले में शशिकांत जाधव के नाम से कई फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए गए थे। संपर्क किए जाने पर जाधव ने पुष्टि की कि फॉर्मों में दर्ज मतदाता पहचान पत्र यानी ईपीआईसी की जानकारी और फोन नंबर उनके थे। लेकिन उन्होंने कहा कि ये आवेदन उन्होंने नहीं भरे थे।
रिपोर्ट में भालकी में भी मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल होने की बात कही गई है। वहां दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 23 सितंबर को समाप्त होने के बावजूद आवेदन जमा किए जाते रहे।
वैधानिक फॉर्म-10 रिपोर्ट के अनुसार, 24 से 29 सितंबर के बीच कुल 1,131 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,123 आवेदनों को थोक में दाखिल किए गए आवेदनों की श्रेणी में रखा गया। निर्धारित अवधि के बाद जमा हुए आवेदनों पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही विचार किया जाएगा। अंतिम सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है।