Exclusive: अब गुजरात में किताब पढ़ना हुआ गुनाह, Gen Z पर गुंडों का हमला
अहमदाबाद में किताबें पढ़ रहे Gen Z पर हिन्दुत्ववादी हमला
सच्चाई गुजरात की – १
कल अहमदाबाद में वस्त्रापुर इलाके में एक बाग में किताबें पढ़ रहे मोटे तौर पर Gen Z पर कुछ गुंडों ने हमला बोल दिया। किताबें पढ़ रहे लोग करीब ३०-३५ युवा थे। इस की वजह यह थी कि ये किताबें पढना एक विरोध प्रदर्शन का ही मामला था।
मामला यह था कि अहमदाबाद के नजदीक आये हुए इलाके शीलज गाँव में एक निजी स्कूल ‘आनंद निकेतन स्कूल’ में नोबेल शांति पारितोषिक से पुरस्कृत मलाला युसूफजाई की किताब ‘I Am Malala’ और यूरोप में हिटलर की क्रूरता दर्शाती एक छोटी बच्ची एनी फ्रेंक की डायरी बच्चों और शिक्षकों के लिए पढने के लिए लाई गई थी, इस का विरोध विद्यार्थियों के माँ-बाप ने और अन्य लोगों ने गत ११ अगस्त के दिन किया था,और उन्होंने स्कूल पर धावा ही बोल दिया था।
इस के बाद अहमदाबाद के जिला शिक्षाधिकारी ने स्कूल को यह आदेश दिया था कि ये दोनों किताबें स्कूल में रखी न जाए। स्कूल ने इन किताबों को भी अपने ग्रंथागार से हटा दिया था ऐसा सुनने में आया था।

इस घटना के विरोध में ही इन दो किताबों की फोटो के साथ आज एक युवा ने वस्त्रापुर के म्युनिसिपल बाग में किताबें पढने का खुला कार्यक्रम शाम के चार से छ: बजे तक रखा था। जो कि फेसबुक पर एक पोस्टर के साथ घोषित भी किया गया था। किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर इस में निमंत्रण नहीं दिया गया था। फिर भी सबहुत से लोग अपने आप वहाँ आये थे। मैं भी इस में दो घंटे तक वहीं किताबें पलट रहा था।
करीब करीब 40 अंग्रेजी किताबें, खास तौर पर सामाजिक और राजकीय मुद्दों पर चर्चा करनेवाली किताबें, वहाँ पढ़ने के लिए रखी गई थी। इनमें मलाला और एनी फ्रेंक की किताबें अंग्रेजी और गुजराती में थी। इस के अलावा सुभाषचंद्र बोस, भगतसिंह, अरुंधती रॉय, महात्मा गाँधी, चे गुवेरा आदि की किताबें भी थी. मेरी ‘संविधान की उद्देशिका’ किताब भी इस में शामिल थी, और अभी भी मैंने जो अशोक कुमार पाण्डेय की किताब ‘बीसवीं सदी के तानाशाह’ का गुजराती अनुवाद किया वह किताब भी इस में शामिल थी।

सब लोग किताबें लोग देख रहे थे और घास पर या बेंच पर बैठे-बैठे शांति से पढ़ रहे थे। वहाँ उपस्थित लोगों में ज़्यादातर युवा लड़के-लड़कियाँ थे। पीने के पानी की और किताबों की व्यवस्था आयोजक ने ही की थी। कोई अगर चाहे तो अपनी कोई भी किताब ला कर भी पढ़ सकता था, ऐसा पोस्टर में भी लिखा गया था। ऐसे भी दोचार युवा थे कि जो अपनी किताबें ले कर आये थे और वे अपनी ही किताबें पढ़ रहे थे। किसी पर कोई बंदिश नहीं थी और किताबें पढने का यह कार्यक्रम किसी भी संस्था के नाम तहत नहीं आयोजित किया गया था। यह सिर्फ़ दो-चार युवाओं की पहल थी, इरादा यह था कि ऐसे पढ़ाई का कार्यक्रम आगे भी चलता रहे, लोग महत्त्वपूर्ण किताबों से परिचित हों, पढ़ें-समझें।

सब शांति से चल रहा था लेकिन करीब छ: बजे के बाद करीब 20-25 गुंडों का एक गुट बाग में आया और वह अलग अलग किताबें पढ़ रहे लोगों पर चिल्लाते हुए टूट पड़ा। किताबें पढ़ रहे युवाओं को से ये लोग उलझने लगे और फिर डंडे से भी उन्होंने मारना शुरू किया। जब युवाओं ने विरोध किया तो काफी हाथापाई हुई। करीब दस युवा इस झड़प में घायल हुए हैं। जो मारने वाले लोग थे, वे बजरंग दल या विश्व हिन्दू परिषद या फिर बीजेपी के ही हो सकते हैं। वस्त्रापुर पुलिस थाने में मामला चल रहा है,
ऐसा अभी समाचार मिला है।
यहाँ एक बात का ज़िक्र करना लाजिम होगा कि 2014 में गुजरात सरकार के करीब 37,000 स्कूलों में दक्षिणपंथी लेखक दीनानाथ बत्रा की किताबें लाखों रूपये के खर्चे से भेज दी गई थी। गुजरात में यही है शिक्षा का भगवाकरण. न सही पढ़ते हैं, न सही पढने देते हैं। सरकारी स्कूलों/कॉलेजों की लाइब्रेरी में दक्षिणपंथी किताबें भर दी गई हैं और अगर कोई खुद ढंग का कुछ पढ़ना चाहे तो उसके साथ यह सब होता है।
गुजरात में जो तानाशाही अंतिम ढाई दशक से चल रही है इस का यह ताज़ा नमूना है। सिर्फ़ सरकार की तानाशाही है ऐसा नहीं है, गुजरात के लोग भी तानाशाह बन चूके हैं। RSS ने सिर्फ तानाशाह शासक नहीं बनाये, हिंदुत्व के नाम पर लोगों को भी तानाशाही मानसिकता वाले बना दिया है।
यही गुजरात का विकास मॉडल है, संवादविहीन विकास का मॉडल।
ता.२७-०८-२०२६. शाम ९.३५.
Pro. Hemantkumar Shah
प्रो शाह जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और गुजरात में लंबे समय तक अध्यापन के बाद लेखन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।