एडमिशन में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन करने पर JMI University ने चार छात्रों को किया निलंबित
विश्वविद्यालय की 2026-27 की स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे था छात्र।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय की 2026-27 की स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले चार छात्रों को निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है।
Indian Express की खबर के अनुसार, विश्वविद्यालय ने छात्रों को निलंबित विरोध प्रदर्शन के लिए किया। क्योंकि छात्र जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 2026-2027 में स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया में गड़बड़ियां पाई जाने का दावा कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक निलंबित किए गए छात्रों के नाम ध्रुव चौहान, तबरेज़ अफसर, एबिन बेसिल और मोहम्मद जासिम हैं। चारों छात्र NSUI के छात्र संगठन से जुड़े हुए हैं। NSUI( National Students Union of India) कांग्रेस का छात्र संगठन है। NSUI ने अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और प्रशासन से प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की मांग की है।
प्रवेश परीक्षा मेंअनिमियता को लेकर विरोध कर रहे छात्रों को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया, ये छात्रों का आरोप है। जिसके जवाब में प्रशासन ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को केवल क्षेत्र खाली करने को कहा था क्योंकि वो निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।
विरोध स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया को लेकर हुआ। स्पॉट राउन्ड प्रवेश प्रक्रिया हर साल जुलाई-अगस्त में नियमित कटऑफ सूची के समाप्त होने के बाद शेष खाली सीटों को भरने के लिए किया जाता है। प्रदर्शन इस आरोप को लेकर शुरू हुआ कि परीक्षा सूची में उच्च रैंक के छात्रों को सीट देने के बजाय प्रतीक्षा सूची में निचले स्थान पर मौजूद उम्मीदवारों को प्रवेश दे दिया गया।
द हिंदू की खबर के मुताबिक विश्वविद्यालय पहले ऑनलाइन पंजीकरण आयोजित करता था किन्तु इस शैक्षणिक वर्ष में पंजीकरण ऑफलाइन कर दिया गया। छात्र ये आरोप लगा रहे हैं कि इस बदलाव में पारदर्शिता की कमी है। छात्र ये भी आरोप लगा रहे हैं कि इस प्रक्रिया के तहत अधिकारियों को मनमाने ढंग से सीटे आवंटित करने की छूट मिली तथा इस प्रक्रिया से जो उम्मीदवार योग्य थे वो वंचित हो गए । कैंपस में विवाद तब बढ़ा जब प्रतीक्षा सूची में नीचे स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश दे दिया गया, जबकि उनसे ऊंची रैंक वाले छात्रों को सीट नहीं मिली। छात्रों ने इस साल स्पॉट एडमिशन ऑफलाइन कराने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। इसी प्रक्रिया के आधार पर खाली सीटों का आवंटन किया गया और मेरिट तथा प्रतीक्षा सूचियां जारी की गईं।
हालांकि, विश्वविद्यालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। जामिया के प्रवेश पोर्टल के अनुसार, जुलाई और अगस्त में 2026-27 सत्र के लिए ऑफलाइन स्पॉट रजिस्ट्रेशन से जुड़े नोटिस जारी किए गए थे।
NSUI ने चारों छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विरोध किया है। संगठन ने गुरुवार को जारी बयान में छात्रों का निलंबन और परिसर में प्रवेश पर लगी रोक तत्काल वापस लेने की मांग की। NSUI का कहना है कि छात्रों के शैक्षणिक और परिसर संबंधी अधिकारों को प्रभावित करने वाली किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई में उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और छात्रों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने विश्वविद्यालय से प्रवेश से जुड़ी छात्रों की चिंताओं का समाधान “खुले और पारदर्शी संवाद” के माध्यम से करने की भी मांग की है।
प्रवेश से जुड़ा यह विवाद छात्रों द्वारा परीक्षा नियंत्रक को दी गई शिकायतों पर केंद्रित है। इनमें स्पॉट एडमिशन के आधार, मेरिट और प्रतीक्षा सूचियों के प्रकाशन तथा खाली सीटों को भरने के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंडों पर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों ने जम्मू-कश्मीर के निवासियों, कश्मीरी प्रवासियों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित सीटों को लेकर भी चिंता जताई है।
विश्वविद्यालय की यह कार्रवाई बुधवार को सुरक्षा कर्मियों द्वारा केंद्रीय कैंटीन से प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के बाद सामने आई है। NSUI ने आरोप लगाया कि छात्रों को बलपूर्वक हटाया गया, जबकि जामिया प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि प्रदर्शन निर्धारित स्थान के बजाय किसी दूसरे स्थान पर किया जा रहा था।
कारवाई की वजह प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के आचरण और जेएमआई अधिकारियों के साथ उनके संवाद को बताया है । विश्वविद्यालय के मुख्य अधीक्षक ने आरोप लगाया है कि तबरेज़ अफसर और एबिन बेसिल ने 24 अगस्त को केंद्रीय कैंटीन में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में मदद की थी, जबकि विश्वविद्यालय की अधिसूचना में गेट नंबर 18 को छात्रों के जमावड़े और विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया था।
जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रतिबंधित छात्रों के संदर्भ में विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने बिलिंग काउंटर और लड़कियों के कॉमन रूम तक जाने का रास्ता बाधित किया, प्रोक्टोरियल विभाग द्वारा निर्देश देने के बावजूद छात्रों ने प्रदर्शन जारी रखा। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में बाहरी लोग और पूर्व छात्र भी शामिल हुए तथा राजनीतिक नारे भी छात्रों द्वारा लगाए गए ।
24 अगस्त को हुए विरोध प्रदर्शन के विषय में विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया है छात्रों से संपर्क करने और बातचीत को सुविधाजनक बनाने के प्रयास किए गए थे इसमे प्रॉक्टोरियल विभाग के साथ बैठक भी शामिल थी बातचीत के अनुरोध के बाद प्रॉक्टर रात में उत्तरी परिसर गए तथा केन्द्रीय कैन्टीन में छात्रों से मिले।
विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों पर हुए प्रशासनात्मक कारवाई में प्रशासनिक कार्यो में बाधा डालने तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से शिकायत भी शमिल है जिनमें मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, भौतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र और विश्वविद्यालय पॉलिटेक्निक विभाग शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से विभागों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं जैसी अन्य सुविधाओं का नियमित कामकाज प्रभावित हुआ है जिससे कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है।