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IIT Delhi के निदेशक ने प्रदर्शनकारी छात्रों को कैंपस से बाहर निकालने की दी धमकी

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
IIT Delhi के निदेशक ने प्रदर्शनकारी छात्रों को कैंपस से बाहर निकालने की दी धमकी

आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रदर्शनकारी छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रदर्शनकारी छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि,

प्रदर्शन के दौरान स्थिति “गंभीर रूप से बिगड़ गई” और नारों में “अशोभनीय, अपमानजनक और धमकी भरी भाषा” का इस्तेमाल किया गया। अगर छात्र प्रदर्शन करना बंद नहीं करेंगे तो उन्हें कैंपस से बाहर कर दिया जाएगा।


Indian Express की एक खबर के अनुसार, यह चेतावनी 31 वर्षीय एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के विरोध में छात्रों के आधी रात को किए गए प्रदर्शन के बाद आई है। छात्र लगातार पांचवें दिन प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी बैनर लेकर मार्च कर रहे थे, जिन पर लिखा था-

आईआईटी दिल्ली के छात्र न्याय की मांग करते हैं! जांच, मुआवजा और इस्तीफा। हम ऋषिकेश के साथ खड़े हैं।

इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने संस्थान के मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग कर दी थी।

शुक्रवार को छात्रों को भेजे आधिकारिक संदेश में बनर्जी ने कहा कि छात्र प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के आधार पर कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद, “दुर्भाग्य से गुरुवार, 27 अगस्त 2026 की रात स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गई।”

उन्होंने कहा,

“उस रात 10:30 बजे से 12:30 बजे के बीच प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने अपना आंदोलन कैंपस के आवासीय इलाकों तक बढ़ा दिया। उन्होंने फैकल्टी आवासों के ठीक सामने प्रदर्शन किया और नारों में अशोभनीय, अपमानजनक तथा धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया।”

बनर्जी ने आगे कहा, “इस तरह का व्यवहार फैकल्टी सदस्यों और उनके परिवारों की सुरक्षा, निजता और शांति को प्रभावित करता है। इनमें छोटे बच्चे और बुजुर्ग आश्रित भी शामिल हैं। आवासीय क्षेत्रों, कक्षाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और कैंपस के शांतिपूर्ण कामकाज में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ संस्थान अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।”

उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए बनर्जी ने लिखा, “बाहरी जांच समिति ने काम शुरू कर दिया है। बेनेवोलेंट फंड से परिवार को सहायता देने की मंजूरी मिल चुकी है। फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से एक अलग फंड भी बनाया गया है। अगले सप्ताह एक बाहरी लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी। हम छात्र प्रतिनिधियों और अन्य छात्रों के साथ लगातार सद्भावना के साथ बातचीत कर रहे हैं।”


31 वर्षीय ऋषिकेश कुमार की शनिवार को कैंपस की एक इमारत की छठी मंजिल से कूदने के बाद मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। छात्रों ने कुमार की मौत की स्वतंत्र जांच, डीन, एसोसिएट डीन (छात्र कल्याण), एसोसिएट डीन (छात्रावास प्रबंधन) और भौतिकी विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कुमार के परिवार के लिए कम से कम एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की है।

छात्रों का दावा है कि 2023 के बाद से कैंपस में आत्महत्या की यह आठवीं घटना है। हालांकि, आईआईटी दिल्ली प्रशासन ने इस्तीफों की मांग या मुआवजे की किसी निश्चित राशि को स्वीकार नहीं किया है।

The Wire की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच विज्ञान के ज्ञान को पढ़ाने वाला यह प्रौद्योगिकी संस्थान मीडिया के लिए अपने दरवाजे बंद कर चुका है। शाम करीब 4 से 6 बजे तक मीडियाकर्मी आईआईटी दिल्ली के मुख्य प्रवेश द्वार पर जमा थे। वे रविवार से कैंपस में चल रहे विरोध प्रदर्शन को कवर करना चाहते थे। लेकिन उन्हें अंदर आने नहीं दिया गया। मुख्य प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और अंदर जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही थी। सुरक्षाकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी मीडियाकर्मी को संस्थान के भीतर प्रवेश न दिया जाए।

आईआईटी दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में एमएससी फिजिक्स के दूसरे वर्ष के छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद कैंपस में चल रहा यह विरोध सिर्फ एक छात्र की मौत पर शोक का प्रदर्शन नहीं रह गया है। अब संस्थान के अन्य छात्र उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जिसके भीतर वे पढ़ते हैं, रहते हैं और मानसिक संकट के दौरान मदद की उम्मीद करते हैं।

आईआईटी दिल्ली के भीतर हो रहा यह विरोध प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि आम तौर पर देश के इस प्रीमियर संस्थान में इस तरह का प्रदर्शन नहीं देखा जाता है।

छात्रों का कहना है कि ऋषिकेश की मौत को केवल उसकी व्यक्तिगत या मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखना उन परिस्थितियों को नजरअंदाज करना होगा, जिनसे वह अपनी वापसी के बाद लगातार जूझ रहा था, जैसे कि हॉस्टल न मिलना, एकडेमिक प्रोजेक्ट न मिलना, सेमेस्टर से नाम वापस लेने की जटिल प्रक्रिया और प्रशासन से मिला असंवेदनशील व्यवहार।

इन विरोध प्रदर्शन में शामिल आईआईटी दिल्ली में दर्शनशास्त्र में पीएचडी कर रहे एक छात्र ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया,

यह आईआईटी में सुसाइड का पहला मामला नहीं है। पिछली ऐसी घटनाओं को देखें तो एक पैटर्न सा दिखाई देता है। आमतौर पर वे लोग, खासकर हाशिए पर रहने वाले समुदाय से आने वाले छात्र, जो कैंपस में अपने लिए जगह नहीं खोज पाते, इस स्थिति तक पहुंचते हैं।’

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 महीनों में आईआईटी दिल्ली में आठ छात्रों ने आत्महत्या की है। प्रदर्शनरत छात्र इसे ‘व्यवस्थागत विफलता’ मानते हैं और संस्थान को मेंटल हेल्थ के प्रति असंवेदनशील बताते हैं।

जुलाई 2025 में ऋषिकेश आईआईटी दिल्ली में दाख़िला लिया था। वह बिहार के पटना जिले के रहने वाले थे। 2025 में पिता को खोने के बाद ऋषिकेश मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परेशानियों का सामना करने लगे। छात्रों द्वारा जारी किए गए एक नोट के मुताबिक, इस साल मार्च में होली के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और आईआईटी दिल्ली के अस्पताल में करीब एक सप्ताह उनका इलाज हुआ। इसके बाद उन्हें दिल्ली के विमहंस (VIMHANS) अस्पताल में लगभग एक महीने के लिए भर्ती कराया गया। इलाज के बाद ऋषिकेश की स्थिति में सुधार हुआ और मेडिकल फिटनेस क्लीयरेंस मिलने पर वह आईआईटी वापस आए।

छात्रों द्वारा जारी नोट के मुताबिक, वापसी के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। लंबे इलाज के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई थी और वह परीक्षा की तैयारी में पीछे रह गए थे। उन्होंने सेमेस्टर (सेकंड सेमेस्टर से) से नाम वापस लेने की मांग की और घर जाने का फैसला किया। लेकिन जुलाई में कैंपस लौटने पर उन्हें पता चला कि हॉस्टल से उनका नाम हटा दिया गया है। सेमेस्टर से नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनसे आईआईटी दिल्ली के अस्पताल से मेडिकल क्लीयरेंस मांगा गया। छात्रों का कहना है कि यह एक ऐसी मांग थी, जिसके बारे में उन्हें पहले से जानकारी नहीं दी गई थी।

छात्र कहते हैं कि,

‘प्रोजेक्ट नहीं मिलना, कम नंबर मिलना, इन सबको केवल व्यक्तिगत विफ़लता की तरह नहीं देखा जा सकता। जब कोई छात्र पहले ही दुख और ख़राब मेंटल हेल्थ से जूझ रहा हो, तब संस्थान के सहयोग का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।