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उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, FIR की मांग करने पर राहुल गांधी पर ही केस दर्ज

TCN Desk TCN Desk | 58m ago · 4 min read
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, FIR की मांग करने पर राहुल गांधी पर ही केस दर्ज

जिन्होंने दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई उनके खिलाफ ही शिकायत दर्ज कर दी गई।

कहावत है उल्टा चोर कोतवाल को ही डांटे। जिन्होंने दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई उनके खिलाफ ही शिकायत दर्ज कर दी गई। उत्तराखंड के हल्द्वानी में रविवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर राहुल गांधी की नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक दिन बाद दर्ज हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए ‘शुद्धिकरण हवन’ को लेकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। यह हवन कांग्रेस अध्यक्ष और मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के कुछ दिनों बाद हुआ था।

राहुल गांधी ने इस घटना को ‘अपराध’ बताते हुए कहा था कि,

यह देशभर में दलितों के साथ होने वाली ‘छुआछूत’ को दिखाता है और ‘बीजेपी-आरएसएस की मानसिकता’ को उजागर करता है। उन्होंने दोहराया था कि कांग्रेस चाहती है कि हल्द्वानी में हवन कराने वालों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए।

Indian Express की एक खबर के अनुसार, हल्द्वानी के पुलिस अधीक्षक (नगर) मनोज कुमार कत्याल ने ‘बताया कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर जवाहर नगर कॉलोनी निवासी अमित कुमार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। रविवार को दर्ज कराई गई शिकायत में 26 वर्षीय अमित कुमार ने बताया कि वह वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। उन्होंने दावा किया कि 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित ‘स्वच्छता अभियान और धार्मिक अनुष्ठान’ में उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय के अन्य लोगों के साथ हिस्सा लिया था। उनका कहना है कि इस आयोजन का किसी व्यक्ति या जाति से कोई संबंध नहीं था।


शिकायत में कुमार ने कहा कि इसके बावजूद,

राहुल गांधी ने 29 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना किसी सत्यापन के इसे ‘छुआछूत’ से जुड़ा कृत्य और अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध बताया। साथ ही, उन्होंने इस अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।”

अमित कुमार ने कहा कि स्वयं वाल्मीकि समुदाय से होने के बावजूद उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया गया, जो छुआछूत में विश्वास रखता है और दलित विरोधी है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के आरोपों के बाद समुदायों के बीच तनाव और वैमनस्य बढ़ा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा धर्म, नस्ल या अन्य आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाले कृत्यों से संबंधित है।

इसके अलावा बीएनएस की धारा 299 भी लगाई गई है, जो किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने के उद्देश्य से उसके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने से जुड़ी है।

राहुल गांधी पर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(Q) भी लगाई गई है। यह प्रावधान किसी लोकसेवक को झूठी या निराधार जानकारी देकर उसकी शक्तियों का इस्तेमाल अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचाने या परेशान करने के लिए कराने से संबंधित है। इससे पहले शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस को ‘मुद्दाविहीन’ पार्टी बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि हवन करने वाले लोग बीजेपी के कार्यकर्ता नहीं थे।

बता दें कि शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोदी सरकार में दलितों पर हो रहे हिंसा और अत्याचार को लेकर हमला बोला था। राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान करने वालों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद श्रीराम सेना के सदस्यों ने उसी मैदान में ‘शुद्धिकरण हवन’ किया। कांग्रेस का आरोप है कि यह अनुष्ठान खड़गे के दलित होने के कारण किया गया।

दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में राहुल गांधी ने कहा था कि यह घटना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस अध्यक्ष के लिए इंसाफ मांग रहे हैं। आज नहीं तो कल न्याय मिलेगा। ये भूल जाएं कि खड़गे जी को न्याय नहीं मिलेगा।


राहुल ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि,

कांग्रेस ने तय कर लिया है कि उत्तराखंड में अपने अध्यक्ष के लिए न्याय लेकर रहेगी “अगर एक्शन नहीं लेगी तो हमारा रिएक्शन आएगा।” उन्होंने पूरे विवाद को संविधान और सामाजिक बराबरी की लड़ाई से जोड़ते हुए कहा कि “BJP का नया और पुराना संगठन एक ही है। हमारी लड़ाई संविधान बचाने की है।

नेता विपक्ष ने कहा था,

“भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ता छुआछूत का व्यवहार कर रहे हैं, जो कानूनन अपराध है। “शुद्धिकरण भेदभाव का ही दूसरा नाम है।”