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CRPF का हैरतअंगेज दावा, पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं

TCN Desk TCN Desk | 49m ago · 5 min read
CRPF का हैरतअंगेज दावा, पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं

CRPF ने यह जवाब तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद साकेत गोखले की तरफ से दायर RTI के बाद दिया है।

एक आरटीआई का जवाब देते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने दावा किया है कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन नहीं है। हैरानी की बात ये है कि कानून के तहत CRPF को RTI अधिनियम से छूट प्राप्त है, लेकिन भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में यह छूट लागू नहीं होती। CRPF ने इस मामले में तुरंत आवेदक को जवाब भेज दिया।


CRPF ने यह जवाब तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद साकेत गोखले की तरफ से दायर RTI के बाद दिया है। साकेत गोखले ने एक्स पोस्ट करते कहा कि,

मेरी RTI के जवाब में CRPF ने यह दावा करते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकार उल्लंघन नहीं है। जब इस फैसले के खिलाफ अपील की गई, तो अपीलीय प्राधिकारी ने भी इसी आधार पर दोबारा जानकारी देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि,

पहले मोदी-शाह सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट के इस्तेमाल से ही इनकार किया। फिर जब सच्चाई सामने आई, तो उसने पीड़ितों की कुल संख्या का विवरण देने से मना कर दिया।और अब यह बेहद हैरान करने वाला है कि भारत की राजधानी में निहत्थे युवाओं पर पैलेट गन—जिन पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबंध होने का दावा किया गया है—का इस्तेमाल अमित शाह के अधीन CRPF द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन नहीं माना जा रहा है। किसी भी सभ्य लोकतंत्र में ऐसा तर्क दिया जाना बेहद चौंकाने वाला है।

गौरतलब है कि दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठी चार्ज किया गया था और साथ ही पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया था शुरुआत में पुलिस और सरकार प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही है पैलेट गन चलाए जाने के वीडियो मौजूद होने और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लगातार विपक्ष द्वारा हमलावार होने के बाद जब नेता विपक्ष राहुल गांधी 21 अगस्त को पैलेट गन की फायरिंग से घायल हुए युवक साहिल की FIR दर्ज करने थाने गए। राहुल गांधी के लगातार सात घंटे धरना देने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की


गौरतलब है इसी दौरान राहुल गांधी साहिल के साथ कैमरों और पत्रकारों के सामने आए और उन्होंने एक छोटी प्लास्टिक की डिब्बी हाथ में उठाई। डिब्बी खोलकर उन्होंने उसमें मौजूद चीजें अपनी हथेली पर निकालकर पत्रकारों को दिखाईं।

राहुल गांधी ने कहा,

"ये हैं पैलेट्स, देख लीजिए इनको, अच्छी तरह से देख लीजिए, ये हैं पैलेट्स।"

इसके बाद गांधी ने पूछा कि ये छर्रे कहां से आए और खुद ही जवाब दिया:

"ये इनके शरीर से आए हैं।"

उन्होंने साहिल से अपनी चोटें दिखाने को कहा। काले चश्मे पहने साहिल ने अपनी टी-शर्ट की आस्तीन ऊपर की और चोटों को दिखाया।

राहुल गांधी ने कहा,

"ये छर्रे इनके यहां लगे हैं। 200 छर्रे इनके शरीर के अंदर हैं और तीन छर्रे इनकी आंख में हैं।"

इसके बाद उन्होंने Lady Hardinge Medical College और AIIMS की रिपोर्टें दिखाईं और कहा कि इन रिपोर्टों में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की जानकारी दी गई है।

पैलेट गन के चपेट में आने वाले युवक का नाम साहिल लोचब है खबरों के मुताबिक पैलेट गन के इस्तेमाल से साहिल की एक आँख की रौशनी चली गई है साहिल का आरोप है कि प्रोटेस्ट में शामिल स्टूडेंट्स पर पैरामिलिट्री फोर्स की ओर से पैलेट-गन का जो इस्तेमाल किया गया, उसी के छर्रे लगने से उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। इस संदर्भ में साकेत गोखले ने RTI के हवाले से जानकारी मांगी थी साकेत गोखले पूर्व सांसद है और वर्तमान में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

बता दें कि 20 जुलाई को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा बड़ा विवाद बन गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री को जिम्मेदार मानते हुए उनसे इस्तीफे देने तक की मांग कर चुके हैं। विपक्ष अमित शाह से छात्रों पर हुए दमन को लेकर जवाब देने को कह रहे थे, लेकिन संसद में अमित शाह ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया।

The Hindu की एक रिपोर्ट के मुताबिक संसद मार्ग पुलिस स्टेशन की डेली डायरी में विरोध प्रदर्शन के दौरान RAF के जवानों द्वारा एंटी-रायट गन और प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल का उल्लेख है। डायरी की एंट्री के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान RAF के जवानों ने एंटी-रायट गन से दो राउंड और प्लास्टिक पैलेट के दो राउंड चलाए थे।इस मामले के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है। खास तौर पर उन आरोपों की जांच की मांग की जा रही है, जिनमें कहा गया है कि छात्रों को पैलेट और भीड़ नियंत्रण के दूसरे तरीकों से चोटें आईं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की है। यह समिति पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, आंसू गैस और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए अन्य तरीकों से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।