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ईरान को पता था अंकारा में ट्रंप के होटल का फ्लोर?

TCN Desk TCN Desk | 23h ago · 4 min read
ईरान को पता था अंकारा में ट्रंप के होटल का फ्लोर?

नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान होटल के पास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा भी गया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सटीक लोकेशन की जानकारी थी। साथ ही, उनके विमान को निशाना बनाने में सक्षम मिसाइल से संभावित हमले का खतरा भी था। ईरानी ऑपरेटिव्स को यह भी पता था कि ट्रंप अपने होटल की किस मंजिल पर ठहरे हुए थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका को खुफिया जानकारी के कई ऐसे इनपुट मिले थे, जिनसे ऐसा संकेत मिला था। इस खुफिया जानकारी के बारे में जानने वाले दो अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अधिकारियों को ट्रंप को ले जा रहे विमान के खिलाफ जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल के एक खतरे का पता चला था। खबरों के मुताबिक, नाटो शिखर सम्मेलन स्थल के पास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा भी गया था।


ट्रंप प्रशासन के अनुसार, इस खुफिया जानकारी को इतना गंभीर माना गया कि सुरक्षा के लिए एक विस्तृत डिकॉय यानी भटकाने वाला अभियान चलाया गया। ट्रंप सार्वजनिक रूप से पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए, लेकिन इसके बाद उन्हें गुप्त रूप से एक कैटरिंग कंटेनर के भीतर छिपाकर एयरपोर्ट से बाहर ले जाया गया और फिर एक सैन्य विमान में स्थानांतरित कर दिया गया, जो उन्हें तुर्किये से बाहर लेकर गया। एयर फोर्स वन वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, पत्रकारों और सैन्य कर्मियों को लेकर रवाना हुआ। जाहिर तौर पर इस विमान का इस्तेमाल एक डिकॉय यानी भटकाने वाले विमान के रूप में किया गया। विमान में मौजूद यात्रियों को खतरे की पूरी गंभीरता के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार,

इस ऑपरेशन से संभवतः ट्रंप पर मंडरा रहा खतरा राष्ट्रपति के विमान में मौजूद दूसरे लोगों की ओर भटका दिया गया। विमान में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सहयोगी स्टीफन मिलर तथा स्टीवन चेउंग भी मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक 8 जुलाई को अंकारा से ब्रिटेन की उड़ान के दौरान यात्रियों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। बाद में ट्रंप गुप्त रूप से दोबारा एयर फोर्स वन में शामिल हो गए और कैमरों के सामने उसी विमान से बाहर निकले। इससे ऐसा दिखाई दिया कि उन्होंने पूरी यात्रा एयर फोर्स वन में ही की थी।

अमेरिकी अधिकारियों के पास ट्रंप की वापसी के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करने के लिए केवल कुछ घंटे थे। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने खतरे का आकलन करने और उससे निपटने की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद तैयार की गई योजना में दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले विमानों में से एक को डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किया गया। ट्रंप ने टेलीविजन कैमरों के सामने सार्वजनिक रूप से पुराने एयर फोर्स वन में सवार होकर कहा था कि वह इसी विमान से उड़ान भरेंगे। लेकिन वह इस विमान से तुर्किये से रवाना नहीं हुए। ट्रंप को गुप्त रूप से विमान से उतारा गया, फिर उन्हें लोगों की नजरों से छिपाते हुए एयरपोर्ट के एक कैटरिंग कंटेनर में ले जाया गया और वहां से C-32A विमान में पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का सैन्य संस्करण है। इसके बाद यह छोटा विमान ट्रंप को गुप्त रूप से ब्रिटेन ले गया, जबकि राष्ट्रपति का 747 विमान अलग से रवाना हुआ। उसमें पत्रकार, व्हाइट हाउस के कर्मचारी और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सवार थे।

द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक,

विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इस खतरे की जानकारी थी। उन्होंने इस ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद की और बाद में खुद भी डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किए गए विमान में सवार होकर रवाना हुए।

इस असामान्य सुरक्षा रणनीति की कुछ पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारियों ने आलोचना की है। उनका कहना था कि,

डिकॉय विमान में मौजूद लोगों को भी सुरक्षा दी जानी चाहिए थी या कम से कम उन्हें खतरे की जानकारी दी जानी चाहिए थी। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विश्वसनीय खतरे की स्थिति में राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए असाधारण कदम उठाना उचित हो सकता है।

व्हाइट हाउस ने इस ऑपरेशन से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दिया। ट्रंप ने बाद में कहा कि उन्होंने सीक्रेट सर्विस की सलाह का पालन किया था। उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि दूसरे विमान में मौजूद यात्रियों को ज्यादा खतरे में डाला गया था। ट्रंप ने तर्क दिया कि जिस विमान में वह यात्रा कर रहे थे, संभव है कि वास्तव में उसी के निशाना बनाए जाने की आशंका अधिक रही हो।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी साजिशों के निशाने पर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में चुनाव प्रचार के दौरान एक हमलावर की गोली उन्हें छूते हुए निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा स्थित उनके गोल्फ कोर्स पर एक अन्य हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, हत्या की ये दोनों कोशिशें ईरानी खतरों से संबंधित नहीं थीं।