International

UNGA में गरजे ईरानी राष्ट्रपति, बोले- ‘हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे और न ही घुटने टेकेंगे'

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 5 min read
UNGA में गरजे ईरानी राष्ट्रपति, बोले- ‘हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे और न ही घुटने टेकेंगे'

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि हमने पूरी ताकत के साथ अपने देश की रक्षा की।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र की आम बहस के दूसरे दिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता “आतंकवाद की शिकार” रही है और अमेरिका के ईरान पर किए गए हमले “गैरकानूनी” थे।

पेजेश्कियन ने कहा,

मैं ऐसे ईरान से आता हूं, जहां हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या कारण के हत्या कर दी गई।” उन्होंने ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले का भी जिक्र किया और कहा कि युद्ध के पहले ही दिन एक प्राइमरी स्कूल को निशाना बनाया गया।


Al Jazeera की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन के भाषण शुरू करते ही अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का एक अधिकारी अपनी सीट से उठा, अपना ब्रीफकेस उठाया, चश्मा उतारा और बैठक से बाहर चला गया।


ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि,

ईरान ने अमेरिका के हमलों का जवाब दिया, लेकिन उसने नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

उन्होंने कहा,

हमारे निर्दोष लोगों को कायरतापूर्ण हमलों और आक्रमणों का निशाना बनाया गया। हमने पूरी ताकत के साथ अपने देश की रक्षा की।

पेजेश्कियन ने दावा किया कि ईरान ने पिछले 200 वर्षों में किसी पर हमला नहीं किया है, लेकिन इसके बावजूद उसे क्षेत्र में अस्थिरता का स्रोत और आतंकवादी बताया जाता है।


उन्होंने कहा,

हम शक्ति इसलिए नहीं चाहते कि हमला या आक्रमण करें। हम प्रगति के लिए ऊर्जा चाहते हैं, हथियारों से समाजों को धमकाने के लिए नहीं।

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि,

उनके देश की रक्षा प्रणाली इस तरह तैयार की गई है कि कोई भी ईरानी शहरों पर बमबारी को बिना जवाब के रहने की उम्मीद न करे।

उन्होंने कहा,

हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अपने देश की रक्षा के लिए हमें किसी की अनुमति या मंजूरी की जरूरत नहीं है। ईरान अपनी ताकत का इस्तेमाल क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के लिए नहीं करना चाहता। “हम अपनी सुरक्षा दूसरों की असुरक्षा में नहीं तलाशते।

पेजेशकियन ने एक बार फिर कहा कि,

ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल को ईरान का “स्वाभाविक अधिकार” बताया।

उन्होंने कहा,

हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे और उस अधिकार को नहीं छोड़ेंगे जो स्वाभाविक रूप से हमारा है।

ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि इनका सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर लोगों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि,

बीमार, निर्दोष, गरीब और समाज के सबसे वंचित लोग इन प्रतिबंधों का निशाना बन रहे हैं। पेजेशकियन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपने “अवैध लक्ष्यों” को हासिल करने के लिए किसी देश की पूरी आबादी को नुकसान पहुंचाना चाहता है।

पेजेश्कियन ने इजरायल के परमाणु हथियारों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि,

जब इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं, तो निरीक्षकों को ईरान भेजने की मांग क्यों की जाती है। उन्होंने कहा, “उनके पास परमाणु हथियार हैं और निरीक्षक हमारे यहां हैं। वे [इजरायल] हत्या करते हैं, जबकि हम पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं और हमें सजा दी जाती है।

गाजा का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने,

इजरायल पर 70,000 से ज्यादा लोगों की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गाजा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा पर एक खुला घाव है और यह नागरिकों को पीड़ा से बचाने में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विफलता का प्रतीक बन चुका है।


उन्होंने कहा कि दशकों से प्रस्ताव पारित किए जाते रहे हैं, लेकिन कब्जा और हिंसा जारी है। उनके मुताबिक, जब तक कब्जा, आक्रमण और अन्याय जारी रहेगा, “प्रतिरोध जारी रहेगा। पेजेश्कियन ने कहा कि गाजा में भारी तबाही और लगातार हो रही मौतों के बावजूद लोगों का प्रतिरोध के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को उसकी जमीन से बेदखल किया जाता है, उसके घर पर बमबारी की जाती है और उस पर हमला होता है, तो वह प्रतिरोध करेगा। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे लोगों के पास इसके अलावा क्या विकल्प है—“बदमाशी के आगे झुक जाना, अपने घर और जमीन से बेदखल हो जाना और इन खतरों के सामने चुप रहना?

अपने भाषण के अंत में पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि प्रतिबंधों, दबाव और धमकियों के बढ़ने के साथ ईरानी जनता का प्रतिरोध भी बढ़ेगा।


उन्होंने कहा,

“हम कभी अपना सिर नहीं झुकाएंगे और न ही घुटने टेकेंगे।”

पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान बातचीत और वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन वह “ताकत की भाषा” को स्वीकार नहीं करेगा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस के दूसरे दिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने भी हिस्सा लिया। पहले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कहा था कि उनके सामने यह “बड़ा फैसला” है कि ईरान के साथ समझौता किया जाए या “इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म” किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच “बहुत अच्छी” बातचीत हुई है।

वहीं, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत कई नेताओं ने गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के युद्ध की निंदा की।