Politics

भाजपा सरकार ने महाराष्ट्र में फर्जी लाभार्थियों को बांट दिए 9,605 करोड़ : रिपोर्ट

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
भाजपा सरकार ने महाराष्ट्र में फर्जी लाभार्थियों को बांट दिए 9,605 करोड़ : रिपोर्ट

माना जाता है कि विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की जीत में इस योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की प्रमुख ‘लाडकी बहिण योजना’ शुरुआत से ही राज्य के खजाने पर भारी बोझ डालने के आरोपों का सामना कर रही है। अब सामने आया है कि इस योजना के तहत 9,605 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को दिए गए, जो योजना के लिए पात्र ही नहीं थे। यानी फर्जी लाभार्थियों को 9,605 करोड़ रुपये बांट दिए गए

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने वाली यह योजना जुलाई 2024 में शुरू की गई थी। माना जाता है कि विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की जीत में इस योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पिछले दो वर्षों में लाभार्थियों की सूची की कई बार जांच और छंटनी की गई, लेकिन इसके बावजूद सभी अपात्र लाभार्थियों को बाहर नहीं किया जा सका। हिंदुस्तान टाइम्स (HT) को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने जून 2026 तक 92 लाख अपात्र लाभार्थियों पर 9,605 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।


इनमें से 62 लाख लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरी नहीं करने के कारण हटाया गया। 16 लाख लोगों को इसलिए सूची से बाहर किया गया क्योंकि उनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख की निर्धारित सीमा से अधिक थी। 3.6 लाख लाभार्थी पहले से ही संजय गांधी निराधार अनुदान योजना का लाभ ले रहे थे। 2.5 लाख लोगों को इसलिए हटाया गया क्योंकि उनके परिवार का कोई अन्य सदस्य भी इस योजना में पंजीकृत था। इसके अलावा, 1.8 लाख लाभार्थियों की उम्र 65 वर्ष से अधिक थी, जबकि 4.5 लाख लाभार्थी सरकारी कर्मचारी थे। जिला स्तर पर सत्यापन के बाद अन्य 1.7 लाख लाभार्थियों को भी योजना से बाहर कर दिया गया।

फिलहाल योजना के तहत पात्र लाभार्थियों की संख्या 1.657 करोड़ है। हालांकि, नवंबर 2025 तक लगातार 17 महीनों के दौरान 2.1 करोड़ से अधिक लोगों को भुगतान किया गया था। फरवरी से मई 2025 के बीच लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 2.472 करोड़ तक पहुंच गई थी। इसके चलते हर महीने 3,640 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जबकि वास्तविक पात्र लाभार्थियों के हिसाब से करीब 2,450 करोड़ रुपये ही दिए जाने चाहिए थे।

राज्य सरकार ने 24 महीनों में इस योजना पर कुल 76,261 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस अवधि में भुगतान की कुल 39.758 करोड़ क्रेडिट एंट्री होनी चाहिए थीं, लेकिन वास्तव में 46.1 करोड़ क्रेडिट एंट्री दर्ज की गईं।

RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, इसके कारण 6.403 करोड़ अतिरिक्त क्रेडिट एंट्री के जरिए अपात्र लाभार्थियों के खातों में 9,605 करोड़ रुपये पहुंच गए।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार ज्यादातर अपात्र लाभार्थियों से यह रकम वापस नहीं वसूलेगी। केवल उन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से पैसे की वसूली की जाएगी, जिन्होंने योजना के तहत हर महीने 1,500 रुपये की राशि प्राप्त की थी।

लाडकी बहिण योजना की देखरेख करने वाले राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “

मुख्यमंत्री ने जून में राज्य विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इस फैसले की घोषणा की थी। अधिकारी ने कहा, “हमने जिला कलेक्टर कार्यालयों को सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से राशि की वसूली करने के लिए पत्र लिखा है और इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। ऐसे 4.5 लाख लाभार्थी हैं, जिन्होंने शुरुआती महीनों में योजना का लाभ लिया था और उनसे पैसे की वसूली की जानी है। अन्य लाभार्थियों से रकम वापस नहीं ली जाएगी।

अधिकारी के अनुसार, ई-केवाईसी पूरी नहीं करने वाले 62 लाख लाभार्थियों में से कई ने यह प्रक्रिया इसलिए पूरी नहीं की क्योंकि उन्हें डर था कि पात्र न होने के बावजूद योजना का लाभ लेने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्यापन अभियान के दौरान कई श्रेणियों के अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटा दिया गया, लेकिन तब तक उन्हें भुगतान किया जा चुका था। इसके कारण योजना के तहत मासिक भुगतान बढ़कर 3,640 करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि पात्र लाभार्थियों के हिसाब से करीब 2,450 करोड़ रुपये का ही भुगतान होना चाहिए था।

RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार, दो वर्षों में महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना पर कुल 76,261 करोड़ रुपये खर्च किए। इस दौरान 39.7 करोड़ भुगतान होने चाहिए थे, लेकिन वास्तव में 46.1 करोड़ भुगतान किए गए। इस तरह अतिरिक्त 6.4 करोड़ भुगतान एंट्री दर्ज हुईं, जिनके जरिए ऐसे लाभार्थियों को 9,605 करोड़ रुपये दिए गए, जिन्हें बाद में अपात्र पाया गया।

राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि,

सरकार केवल उन सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से रकम की वसूली करेगी, जिन्होंने योजना का लाभ लिया था। अधिकारी के मुताबिक, अन्य अपात्र लाभार्थियों से भुगतान की गई रकम वापस नहीं ली जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, अब योजना के तहत करीब 1.6 करोड़ महिलाएं पात्र बनी हुई हैं।

लाडकी बहीण योजना के कारण महाराष्ट्र सरकार के वित्त पर पड़ रहे दबाव को लेकर लगातार विवाद होता रहा है। हर महीने होने वाली जांच में भी बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के योजना में शामिल होने के मामले सामने आए थे। माना जाता है कि नवंबर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को 288 में से 230 सीटें जिताने में इस योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अक्टूबर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और राज्य मंत्री छगन भुजबल ने दावा किया था कि.

लाडकी बहीण योजना के कारण सरकार के सभी विभागों को धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

फरवरी में राज्य मंत्री गणेश नाईक ने भी स्वीकार किया था कि इस योजना के कारण सरकारी विभागों पर वित्तीय दबाव पड़ा है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि योजना को बंद नहीं किया जाएगा। जुलाई 2025 में योजना की समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया था कि 14,000 से अधिक पुरुषों ने 10 महीने तक इस योजना के तहत हर महीने पैसे प्राप्त किए थे। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार राज्य की वित्तीय परेशानियों के कारण योजना के लाभार्थियों की संख्या कम कर रही है।