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200 रुपये प्रति महीने मिलने वाले पेंशन से संतुष्ट हैं देश के बुजुर्ग : मोदी सरकार के मंत्री

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
200 रुपये प्रति महीने मिलने वाले पेंशन से संतुष्ट हैं देश के बुजुर्ग : मोदी सरकार के मंत्री

बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन राशि पिछले 19 वर्षों से नहीं बदली गई है।

केंद्र सरकार ने बुजुर्गों को मिलने वाली महज 200 रुपये प्रति माह की पेंशन का बचाव करते हुए कहा है कि लोग इससे संतुष्ट हैं।

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने मानसून सत्र के दौरान पिछले दिनों लोकसभा में बताया कि इस राशि में संशोधन की फिलहाल कोई योजना नहीं है। यह पेंशन राशि पिछले 19 वर्षों से नहीं बदली गई है।

The Telegraph की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सांसद सुनील बोस ने सरकार से पूछा था कि क्या उसने पेंशन की पर्याप्तता का कोई आकलन किया है और क्या इसकी राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव है।

गौरतलब है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) चलाता है, जिसके तहत कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को पेंशन देने के लिए तीन उप-योजनाएं संचालित की जाती हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 60 से 79 वर्ष की आयु के लोगों को हर महीने 200 रुपये दिए जाते हैं। वहीं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग व्यक्तियों को 300 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 40 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं को 300 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। 80 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इन सभी लाभार्थियों को 500 रुपये प्रति माह मिलने लगते हैं। फिलहाल NSAP के तहत 3.09 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।

मंत्री पासवान ने अपने लिखित जवाब में कहा,

समय-समय पर मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा NSAP योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने के लिए विभिन्न अध्ययन और मूल्यांकन किए गए हैं। इन आकलनों से पता चलता है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन संतोषजनक रहा है और अधिकांश लाभार्थियों ने पेंशन के लिए चयन, मंजूरी और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर कुल मिलाकर संतुष्टि जताई है।

उन्होंने आगे कहा,

अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि पेंशन सहायता से लाभार्थियों को भोजन, स्वास्थ्य सेवा आदि जैसी आवश्यक जरूरतों का खर्च पूरा करने में मदद मिली है। इससे इन जरूरतों के लिए परिवार के सदस्यों पर उनकी निर्भरता कम हुई है।”

पेंशन की राशि बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने संसाधनों से अतिरिक्त वित्तीय सहायता देकर केंद्र की सहायता राशि में बढ़ोतरी कर सकते हैं। फिलहाल वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता 50 रुपये से लेकर 3,800 रुपये प्रति माह प्रति लाभार्थी तक है।

मंत्री ने कहा,

फिलहाल NSAP के तहत दी जाने वाली सहायता राशि में संशोधन का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि 200 रुपये या 300 रुपये प्रति माह की राशि असहाय बुजुर्गों और विधवाओं के साथ मजाक से कम नहीं है। उन्होंने कहा, “NSAP के तहत मिलने वाली राशि को न तो महंगाई के हिसाब से बढ़ाया गया है और न ही लगभग दो दशकों से इसमें कोई संशोधन किया गया है। यह रकम इतनी भी नहीं है कि लाभार्थी इससे एक दिन का खर्च चला सकें। यह केंद्र प्रायोजित योजना है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर पैसा खर्च नहीं करना चाहती। अगर राज्य 200 रुपये से ज्यादा देना चाहते हैं तो केंद्र चाहता है कि अतिरिक्त खर्च राज्य खुद उठाएं।”

उन्होंने कहा कि इस योजना के लाभार्थियों के लिए गरीबी रेखा से नीचे (BPL) होना एक पात्रता मानदंड है, लेकिन कई राज्य BPL सूची को अपडेट नहीं कर रहे हैं। इसके कारण अब बहुत से गरीब लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उनके नाम BPL सूची में शामिल नहीं हैं।

ग्रामीण विकास से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने भी पेंशन राशि नहीं बढ़ाने को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय की आलोचना की है। समिति ने 11 अगस्त को संसद से की गई अपनी सिफारिश में कहा, “यह तथ्य कि पेंशन राशि में संशोधन पर विचार किया गया था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया, इस मुद्दे पर नए सिरे से और तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता को और रेखांकित करता है।

अब बड़ा सवाल ये है कि संविधान की कल्याणकारी राज्य की अवधारणा मोदी सरकार के एजेंडे में है नहीं, लेकिन राज्यों में सत्तारुढ़ भाजपा को अपनी सरकार बनानी होती है तो चुनाव से पहले योजना बना कर, कोई नई स्कीम लाकर महिलाओं को 10-10 हजार रुपये बांट दिए जाते हैं और वोट खरीद लिए जाते हैं (बिहार विधानसभा चुनाव 2025 इसका ताजा उदाहरण है), लेकिन जब पहले से चली आ रही पेंशन योजनाओं की राशि बढ़ाने की मांग होती है तो सत्तारुढ़ भाजपा सरकार हाथ खड़े कर देती है।