राहुल गांधी ने लड़कियों से क्यों कहा, मनुस्मृति के पितृसत्तात्मक पिंजरे को तोड़ना होगा
राहुल गांधी ने मनुस्मृति के एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय से लड़कियों को बंधनों में जकड़ कर रखा है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के चौथे संस्करण में युवतियों और छात्राओं से बातचीत की। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं।
राहुल गांधी ने शनिवार को मनुस्मृति के एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय से लड़कियों को बंधनों में जकड़ कर रखा है। उन्होंने पुणे में अपने छात्र संपर्क कार्यक्रम के केवल युवतियों और छात्राओं के लिए आयोजित संस्करण में मौजूद युवतियों से इस “पिंजरे को तोड़ने” का आह्वान किया।
लड़कियों के लिए आयोजित इस विशेष छात्र संपर्क कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह युवाओं को भाषण देने के बजाय उनकी बातें सुनने आए हैं और राजनीति पर चर्चा करने नहीं आए हैं। राहुल गांधी ने कहा,
“मैं युवाओं को भाषण देने या राजनीति पर चर्चा करने नहीं, बल्कि उनकी बात सुनने आया हूं। महिलाओं को पुरुषों के साथ अपने रिश्तों से तय होने वाली पहचान तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा,
“महिलाओं को केवल बेटी, पत्नी या मां की पहचान तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।”
इसके बाद राहुल गांधी ने मनुस्मृति का उल्लेख किया और उसके एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें महिलाओं को पिता, पति और पुत्रों के अधिकार में रहने की बात कही गई है, जिसे उन्होंने “शर्मनाक” बताया। राहुल गांधी ने कहा,
मनुस्मृति कहती है कि बचपन में महिला अपने पिता की होती है। युवावस्था में वह अपने पति की होती है। जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों की हो जाती है। महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। यह मनुस्मृति का सीधा उद्धरण है। ये शब्द शर्मनाक हैं, क्योंकि ऐसे शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे।
मनुस्मृति, जिसे मनु के नियम (Laws of Manu) के नाम से भी जाना जाता है, संस्कृत का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसमें हिंदू समाज में कानूनी और सामाजिक कर्तव्यों से जुड़े विचार बताए गए हैं। भाजपा और आरएसएस मनुस्मृति के नियमों के हिसाब से ही चलती है।

राहुल गांधी ने महिलाओं के सामने आने वाली हिंसा के तीन रूप बताए- प्रत्यक्ष शारीरिक हिंसा, आर्थिक हिंसा और अवसरों से वंचित किए जाने से होने वाली हिंसा। उन्होंने कहा, “हिंसा के तीन प्रकार हैं। पहला है प्रत्यक्ष हिंसा।” इसके उदाहरण के रूप में उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, उत्पीड़न तथा शारीरिक और यौन हिंसा से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख किया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि भारत में हर साल लगभग 4.5 लाख लड़कियों की जन्म से पहले ही हत्या कर दी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों, शिक्षण संस्थानों और अन्य जगहों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ऐसे आंकड़ों का भी हवाला दिया, जिनके अनुसार 29-30 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक हिंसा का सामना करती हैं, जबकि हर 100 में से लगभग 6 महिलाएं यौन हिंसा का सामना करती हैं।
उन्होंने कहा,
50 प्रतिशत महिलाएं सुरक्षा संबंधी चिंताओं और हिंसा के खतरे के कारण अपनी शिक्षा या रोजगार छोड़ देती हैं। वे स्कूल छोड़ देती हैं या अपनी नौकरी छोड़ देती हैं।
गांधी ने सुरक्षा को लेकर महिलाओं की चिंताओं से होने वाले आर्थिक नुकसान को भी हिंसा का एक रूप बताया। उनका दावा था कि एक औसत भारतीय महिला सुरक्षा से जुड़े उपायों पर हर साल अतिरिक्त 17,500 रुपये खर्च करती है। अंत में राहुल गांधी ने महिलाओं से “पिंजरे को तोड़ने” का आह्वान करते हुए युवाओं से अपनी अलग पहचान और व्यक्तित्व को स्वीकार करने की बात कही।
महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में छात्रोंओं और महिलाओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (COEP) के छात्रावास में हाल ही में तनाव की स्थिति बनी थी।

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने युवा प्रतिभागियों से छात्रों और देश से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। कांग्रेस पार्टी पुणे में होने वाले इस कार्यक्रम की कई दिनों से तैयारियां कर रही थी। कार्यक्रम से पहले महाराष्ट्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी पुणे में डेरा डाले हुए थे। यह कार्यक्रम राहुल गांधी की चल रही ‘छात्रों की गूंज’ पहल का हिस्सा था, जिसके माध्यम से वह छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और युवाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
पुणे में यह कार्यक्रम ऐसे समय में भी आयोजित हुआ जब कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि कार्यक्रम से पहले COEP छात्रावास में छात्राओं को डराया-धमकाया गया। ये आरोप शुक्रवार को परिसर में ABVP और NSUI के सदस्यों के बीच हुई झड़प के बाद सामने आए। छात्रों के साथ राहुल गांधी की यह बातचीत उस मुलाकात के बाद हुई, जिसमें उन्होंने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी और 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ज्यादती के बारे में उनकी बातें सुनी थीं।