'फोर्स्ड लेबर' के नाम पर ट्रंप का भारत पर वार, लगाया 10% टैरिफ
अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) का हवाला देते हुए भारत पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है।
अमेरिका ने गुरुवार को भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU) समेत दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया। अमेरिका का कहना है कि ये कदम उन देशों पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, जहां Forced Labour से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कानून नहीं है।
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये नए टैरिफ शुक्रवार को अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे से लागू हो जाएंगे। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने इस साल की शुरुआत में अस्थायी तौर पर 10% टैरिफ लगाया था, जिसकी अवधि अब खत्म हो रही है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के अनुसार, नए टैरिफ 10% से 12.5% तक होंगे और अमेरिका के लगभग 99.4% आयातित व्यापार को कवर करेंगे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा,
"अमेरिका में जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर लगभग एक सदी से प्रतिबंध है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसे ही सख्त कदम उठाएं।"
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, जिन देशों ने जबरन मजदूरी के खिलाफ प्रभावी नियम लागू किए हैं, उन्हें 10% वाले कम टैरिफ वर्ग में रखा गया है। इनमें भारत, कनाडा, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने की योजना थी, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े सकारात्मक संवाद के बाद भारत को 10% वाले वर्ग में रखा गया।
वहीं, चीन और जापान जैसे देशों पर 12.5% टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों को उच्च शुल्क वाले वर्ग में रखा गया है। हालांकि, जिन उत्पादों पर पहले से ही अलग सेक्टर आधारित टैरिफ लागू हैं, जैसे स्टील और एल्युमिनियम, उन पर इन नए टैरिफ का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) मुक्त व्यापार समझौते के तहत आने वाले सामान भी इन नए शुल्कों से बाहर रहेंगे।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन नए टैरिफ को कई महीनों की जांच के बाद तैयार किया गया है। सरकार का दावा है कि इन्हें इस तरह बनाया गया है ताकि भविष्य में अदालत में कानूनी चुनौती मिलने पर भी ये टिक सकें।