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अमेरिकी सांसद ने क्यों कहा, भारत में ईसाइयों के खिलाफ लाया जा रहा कानून?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago
अमेरिकी सांसद ने क्यों कहा, भारत में ईसाइयों के खिलाफ लाया जा रहा कानून?

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत के FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई है।

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ये बदलाव भारत-अमेरिका संबंधों में चिंता का एक बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। अमेरिकी सांसद ने मंगलवार को कहा कि FCRA में प्रस्तावित संशोधन भारत सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे और यह “ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला” होगा।

वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन सांसद मूर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत में ईसाइयों का इतिहास उस समय से है, जब प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस द एपोस्टल मालाबार तट पहुंचे थे। लेकिन इतने लंबे ईसाई इतिहास के बावजूद भारत की संसद विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों में ऐसे संशोधनों पर विचार कर रही है, जो सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे।” पहली बार अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने गए मूर ने कहा,

“यह ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। अगर यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय होगा।”

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में सरकार को एक “नामित प्राधिकरण” (Designated Authority) बनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। यदि किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, वह अपना पंजीकरण वापस कर देता है या नवीनीकरण नहीं होने के कारण उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है, तो यह प्राधिकरण उस संगठन को मिले विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगा। विधेयक में यह भी कहा गया है कि यदि ऐसी संपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका धार्मिक स्वरूप बरकरार रहे। प्रस्तावित कानून में अधिनियम के उल्लंघन के लिए अधिकतम सजा को भी पांच साल की कैद से घटाकर एक साल करने का प्रावधान है।

विधेयक में FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए विदेशी अंशदान के न्यूनतम इस्तेमाल की सीमा तय करने का भी प्रस्ताव है। जिन संगठनों ने पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान 10 लाख रुपये से कम विदेशी अंशदान प्राप्त किया है या उसका उपयोग किया है, वे अब नवीनीकरण के पात्र नहीं रह सकते हैं। अन्य प्रस्तावित प्रावधानों में विदेशी अंशदान को दूसरे संगठनों को ट्रांसफर करने पर कड़ी पाबंदियां, विदेश से मिलने वाले धन को प्राप्त करने और इस्तेमाल करने के लिए सख्त समय-सीमा तथा परियोजनाओं, गतिविधियों, वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की विस्तृत अनिवार्यता शामिल है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को कुल 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान मिला। FCRA पोर्टल के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 FCRA प्रमाणपत्र सक्रिय थे, जबकि 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके थे और 15,212 को समाप्त माना गया था। विपक्षी दलों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और कई नागरिक समाज समूहों का कहना है कि इन संशोधनों से केंद्र सरकार को विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों पर व्यापक नियंत्रण मिल जाएगा।

चर्चों और धार्मिक संगठनों ने खास तौर पर चिंता जताई है कि दशकों से विदेशी दान की मदद से बनाए गए स्कूल, अस्पताल, कल्याणकारी संस्थान और दूसरी संपत्तियां उनके FCRA पंजीकरण के समाप्त या रद्द होने की स्थिति में सरकारी नियंत्रण में आ सकती हैं।

ये चिंताएं विशेष रूप से केरल में ज्यादा सामने आई हैं, जहां कई ईसाई संगठन बड़े शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान चलाते हैं और ऐतिहासिक रूप से विदेशी अंशदान पर निर्भर रहे हैं। हालांकि, सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों का बचाव करते हुए कहा है कि इनका उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाना, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

Newslaundry की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल देश में ईसाई समुदाय के साथ हिंसा की 300 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक ईसाई समुदाय पर हमले की घटना सामने आई है। यह आंकड़े 'क्रिश्चियन अंडर अटैक' रिपोर्ट के हवाले से दिया गया है। रिपोर्ट को स्वतंत्र पत्रकार अलिशान जाफरी, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन, यूनिटी ऑफ कम्पैशन से मिनाक्षी सिंह, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के लईक अहमद खान और नदीम खान ने तैयार किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक,

उत्तर भारत में ईसाइयों के खिलाफ होने वाले हमले पिछले नौ महीनों में तेज़ी से बढ़े हैं। एक जनवरी 2021 से सितम्बर 2021 के बीच उत्तर प्रदेश में 66, छत्तीसगढ़ में 47, झारखण्ड में 30 और मध्य प्रदेश में 26 मामले सामने आए हैं. यानी केवल इन चार राज्यों में ही बीते नौ महीनों में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की 169 घटनाएं हुई हैं। उत्तर प्रदेश में ईसाइयों के खिलाफ सबसे अधिक 66 हिंसक मामले दर्ज किए गए हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार यूपी के शाहजहांपुर, राय बरेली, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, आजमगढ़ आदि जगहों पर ईसाईयों को डराया-धमकाया गया है। जब उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की तो प्रशासन द्वारा उल्टा उनपर ही मामला दर्ज कर लिया गया।