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2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अब लगेगा चार्ज?

TCN Desk TCN Desk | 49m ago · 5 min read
2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अब लगेगा चार्ज?

2000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने का रास्ता अब साफ हो गया है।

2000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने का रास्ता अब साफ हो गया है। सरकार ने सोमवार रात अधिसूचना जारी कर दी है कि 2000 रुपये तक UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। पहले नियम था किसी भी UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन सरकार की नई अधिसूचना जारी होने के बाद अब यह संभावना प्रबल हो गई है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट करने पर चार्ज लगेगा।

2000 रुपये से ज़्यादा पेमेंट पर कितना चार्ज लगाना है इसका फ़ैसला NPCI (National Payment Corporation of India) को करना है। यह रेट 0.3 से 0.5% होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका मतलब हुआ कि 5000 रुपये का सामान ख़रीदा तो 15 से 25 रुपये दुकानदार चुकाएगा। यह चार्ज ग्राहक को नहीं देना है। लोग एक दूसरे से लेनदेन करेंगे तो उन्हें कोई चार्ज नहीं लगेगा चाहे अमाउंट कितना भी हो

यानी 5000 रुपये के ऑनलाइन पेमेंट पर 15 से 25 रुपये एक्स्ट्रा लगेगा जोकि ग्राहक नहीं दुकानदार को देना होगा। अब भला कौनसा दुकानदार 25 रुपये जेब से देगा वो सीधा ग्राहक से कैश मांगेगा UPI लेगा ही नहीं। यानी घूम फिरकर घाटा ग्राहक का है।


केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन और RuPay नेटवर्क वाले डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने पर रोक लगा दी है। हालांकि, इस फैसले से अधिक राशि वाले मर्चेंट भुगतान पर भविष्य में शुल्क लगाने की संभावना खुली हुई है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों की सूची में शामिल किया है, जिन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

अधिसूचना के अनुसार,

कोई भी बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रदाता इन माध्यमों से भुगतान करने या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं वसूल सकता। यह फैसला अगस्त 2026 में संसद द्वारा ‘कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित किए जाने के बाद आया है। इस कानून के जरिए सरकार को उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को निर्धारित करने का अधिकार दिया गया था, जिन्हें शुल्क से कानूनी सुरक्षा मिलती रहेगी।

इस संशोधन के बाद आशंका जताई गई थी कि भविष्य में UPI लेनदेन मुफ्त नहीं रहेगा। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि,

ह संशोधन केवल सरकार को जरूरी प्रावधान करने का अधिकार देता है और उपभोक्ताओं को UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने यह भी कहा था कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया जाता है, तो वह एक निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू होगा। MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान की प्रोसेसिंग के बदले बैंकों या पेमेंट सेवा प्रदाताओं द्वारा व्यापारियों से वसूला जाता है।

नई अधिसूचना का यह मतलब नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर तुरंत शुल्क लगने लगेगा। अधिसूचना में केवल यह तय किया गया है कि 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन को शुल्क से सुरक्षा मिलेगी। इससे अधिक राशि वाले मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू करने के लिए सरकार को अलग से नीति या नियम जारी करना होगा।

सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो उसका भुगतान ग्राहकों के बजाय व्यापारियों को करना होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान मुफ्त बने रहेंगे। अधिक राशि वाले कुछ मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू होने से बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को कमाई का नया स्रोत मिल सकता है। वहीं, छोटी राशि के डिजिटल भुगतान आम उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त बने रहेंगे।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI द्वारा संचालित UPI लेनदेन की संख्या के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की 2025 की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई थी।

अगस्त में UPI के जरिए 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। महीने के कुल UPI लेनदेन में Google Pay और Walmart के स्वामित्व वाले PhonePe की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई रही। नए नियमों के तहत RuPay नेटवर्क वाले डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान भी शुल्क-मुक्त बने रहेंगे।

बता दें कि महीने भर पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि,

अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा या नहीं। सरकार की ओर से भुगतान कानून में प्रस्तावित संशोधनों के बाद देश में फ्री डिजिटल भुगतान व्यवस्था के भविष्य को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद मल्होत्रा ने कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (अमेंडमेंट) बिल, 2027 को लेकर अभी चर्चा चल रही है। RBI का फिलहाल मुख्य ध्यान यह तय करने पर नहीं है कि भविष्य में इस व्यवस्था का खर्च कैसे उठाया जाएगा, बल्कि देश के डिजिटल भुगतान ढांचे को और मजबूत करने पर है।

मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में गवर्नर ने कहा,

"इसकी लागत किसी न किसी को चुकानी ही होगी। हम सभी चाहते हैं कि यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचा लगातार मजबूत हो और अधिक कुशल बने। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। फिलहाल यही हमारी प्राथमिकता है।"