‘एक देश, एक चुनाव’ पर चर्चा से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, बैठक रद्द
इस प्रस्तावित बैठक को लेकर न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण का सवाल उठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही संसदीय समिति के साथ मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी है। यह बैठक 6 अक्टूबर को होनी थी।
शीर्ष अदालत ने कहा है कि प्रस्तावित संविधान संशोधन भविष्य में न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर इस पर चर्चा करना उचित या वांछनीय नहीं होगा।
संसदीय समिति को भेजे गए संदेश में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि,
जिस प्रस्ताव की संवैधानिक वैधता भविष्य में अदालत के सामने आ सकती है, उस पर प्रशासनिक पक्ष से बातचीत करना उचित नहीं है। अदालत के इस निर्णय के बाद संसदीय समिति और मौजूदा न्यायाधीशों के बीच प्रस्तावित संवाद नहीं होगा।
Bar and Bench की एक रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने इस बैठक के लिए ‘अनौपचारिक बातचीत’ का अनुरोध किया था। प्रस्तावित कार्यक्रम को ‘स्थानीय अध्ययन दौरा’ बताया गया था। बैठक का अनुरोध 28 सितंबर को किया गया और इसे विधायी कार्य विभाग के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को विभाग को सूचित किया कि वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रस्ताव पर चर्चा की है और बैठक रद्द करने का निर्णय लिया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, विपक्ष की ओर से आपत्ति उठाए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी ने भी शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों से मिलने की योजना छोड़ दी। इस प्रस्तावित बैठक को लेकर न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण का सवाल उठाया गया था।
इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि,
जेपीसी 6 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के साथ चर्चा करने वाली है। सिब्बल ने इस प्रस्तावित बातचीत को अभूतपूर्व और असंवैधानिक बताते हुए इसका विरोध किया था।
उनका कहना था कि,
भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले किसी विधेयक के बारे में पदासीन न्यायाधीशों को जानकारी दे या उनके साथ इस तरह चर्चा करे। उन्होंने कहा कि यह कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है।
सिब्बल ने तर्क दिया कि संसद का काम कानून बनाना है, जबकि न्यायपालिका का काम उन कानूनों की वैधता की जांच करना है। यदि प्रस्तावित संविधान संशोधन संसद से पारित हो जाते हैं और बाद में उन्हें अदालत में चुनौती दी जाती है, तो इन्हीं न्यायाधीशों को उनकी संवैधानिक वैधता पर फैसला करना पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा न्यायाधीशों के साथ समिति की प्रस्तावित बातचीत पर सवाल उठाया। सिब्बल ने कहा,
यह संविधान का मजाक है।” उनकी आपत्ति विशेष रूप से उन न्यायाधीशों के साथ चर्चा को लेकर थी, जो भविष्य में इस कानून की संवैधानिकता पर सुनवाई करने वाली पीठ का हिस्सा बन सकते हैं।
भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है। इन दोनों विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। समिति अब तक राजनीतिक दलों, विधायकों, संवैधानिक विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ परामर्श कर चुकी है। समिति ने यह भी बताया है कि एक साथ चुनाव कराने के संवैधानिक प्रभावों पर उसने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से भी राय ली है।
हालांकि, सिब्बल की आपत्ति पूर्व मुख्य न्यायाधीशों या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से सलाह लेने को लेकर नहीं थी। उन्होंने पदासीन न्यायाधीशों और संसदीय समिति के बीच बातचीत पर सवाल उठाया था। उनका तर्क था कि भविष्य में जिन न्यायाधीशों को कानून की वैधता पर निर्णय देना पड़ सकता है, उनके साथ विधेयक पर पहले से चर्चा करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े इन विधेयकों के लिए संविधान में संशोधन आवश्यक हैं। प्रस्तावों ने संघवाद, लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल, सदनों के समय से पहले भंग होने तथा संविधान के मूल ढांचे से जुड़े सवालों पर बहस छेड़ दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी बैठक रद्द करने के अपने संदेश में भविष्य की न्यायिक समीक्षा की संभावना को प्रमुख आधार बनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन पर प्रशासनिक स्तर की चर्चा उचित नहीं होगी। वहीं, जेपीसी के सामने इन विधेयकों और उनके संवैधानिक प्रभावों की जांच का विषय बना हुआ है।