जंतर-मंतर से झारखंड तक, सरकार से क्यों इतने गुस्से में है छात्र?
झारखंड की राजधानी रांची में छात्र पिछले करीब एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं।
झारखंड की राजधानी रांची में छात्र पिछले करीब एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
इस बीच आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली है, जब NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने भी छात्रों को अपना समर्थन दे दिया। प्रदर्शनकारी छात्र फिलहाल रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराई जाए। छात्रों का कहना है कि केवल एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है। छात्र उन परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित करने की भी मांग कर रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर गड़बड़ी हुई है। इनमें खास तौर पर 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा शामिल है। इसके अलावा छात्र उन भर्ती एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं, जिन पर परीक्षा प्रक्रिया और OMR शीट में कथित हेरफेर के आरोप हैं। छात्र JPSC और JSSC की भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं, ताकि परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके और भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।
इस आंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं। उन्होंने रविवार रात से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना है कि छात्रों ने विरोध के बाकी सभी लोकतांत्रिक रास्ते आजमा लिए हैं। महतो के मुताबिक, छात्र जुलाई की शुरुआत से ही यह मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित गड़बड़ियों से जुड़े सबूत सौंपे, प्रदर्शन किए और संविधान मार्च भी निकाला। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर महतो ने कहा कि,
यह आंदोलन "किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के लिए है।" उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील भी की है।
दरअसल इस आंदोलन के पीछे मुख्य वजह 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा है। आरोप है कि इस परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुईं। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID ने भर्ती प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अगले ही दिन CID ने उनके आधिकारिक आवास समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली।
इसके बाद कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। CID ने खियांगते से कई बार पूछताछ की है। शुक्रवार, 31 जुलाई को उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले एक अभ्यर्थी को भी गिरफ्तार किया गया है। JPSC ने 25 से 27 जुलाई के बीच होने वाली संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को "अपरिहार्य परिस्थितियों" का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया। CID की जांच अभी जारी है।
कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन के बाद झारखंड के छात्रों के इस आंदोलन को और मजबूती मिली है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए छात्र नेताओं से बात की और स्वतंत्र जांच की उनकी मांग का समर्थन किया। CJP के समर्थन के बाद झारखंड में चल रहे आंदोलन पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान गया है।
विपक्षी BJP ने इस मुद्दे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है। BJP भी मामले की CBI जांच की मांग कर रही है और सरकार पर नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगा रही है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाएं आयोजित कराने की जिम्मेदारी ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को दी गई। उन्होंने परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस पर "दोहरा रवैया" अपनाने का भी आरोप लगाया। BJP सांसद संजय सेठ और निशिकांत दुबे ने भी CBI जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा CID जांच पर्याप्त नहीं है।
झारखंड के BJP सांसदों ने कथित JPSC पेपर लीक की CBI जांच की मांग को लेकर संसद के बाहर भी प्रदर्शन किया।
हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। उन्होंने राजनीतिक दलों को आंदोलन के मंच का इस्तेमाल करने देने का भी विरोध किया है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है, झारखंड के बाहर से भी आंदोलन को समर्थन मिलने लगा है और राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में छात्र आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ राज्य की CID मामले की जांच कर रही है, तो दूसरी तरफ छात्र CBI जांच और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। अब आंदोलन का अगला रुख काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि झारखंड सरकार छात्रों की इन मांगों पर क्या फैसला करती है।