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खराब भीड़ प्रबंधन और भगदड़ ने बिहार के मंदिर में ली 7 लोगों की जान

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
खराब भीड़ प्रबंधन और भगदड़ ने बिहार के मंदिर में ली 7 लोगों की जान

बिहार के लखीसराय जिले में सोमवार सुबह अशोक धाम मंदिर में भगदड़ मचने से सात लोगों की मौत हो गई।

बिहार के लखीसराय जिले में सोमवार सुबह अशोक धाम मंदिर में भगदड़ मचने से सात लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, बिहार के सबसे पुराने शिव मंदिरों में से एक अशोक धाम में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने के कारण यह हादसा हुआ।


भगदड़ की वजह बताते हुए लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने कहा,

घटना सुबह करीब 6:40 बजे हुई, जब कुछ युवकों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की।” हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन के इस दावे से अलग बात कही और भगदड़ के लिए खराब भीड़ प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया

लखीसराय के जिलाधिकारी के अनुसार, मंदिर में इतनी भारी भीड़ थी कि श्रद्धालुओं की कतार अशोक धाम हॉल्ट तक पहुंच गई थी, जहां लोकल ट्रेनें रुकती हैं।

उन्होंने बताया कि,

हॉल्ट पर दो ट्रेनें रुकी थीं। अचानक वहां एक बिजली का खंभा गिर गया। यह खंभा पुरुषों की कतार के दाईं ओर था। खंभा गिरते ही अफवाह फैल गई कि लोगों पर बिजली का तार गिर गया है, जबकि वह केबल का तार था। इससे बाईं ओर महिलाओं की कतार पर दबाव बढ़ गया और महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगीं।

घायलों को इलाज के लिए स्थानीय चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अन्य अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे। अशोक धाम स्थित इंद्रमणेश्वर मंदिर में हिंदू कैलेंडर के सावन महीने के तीसरे सोमवार को पूजा-अर्चना के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई। तीसरे सोमवार के अवसर पर करीब 50 हजार श्रद्धालु लखीसराय पहुंचे थे।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ,

रविवार रात से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। कतार छह किलोमीटर से अधिक लंबी हो गई थी। एक श्रद्धालु को मंदिर के अंदर पहुंचने के लिए औसतन चार घंटे इंतजार करना पड़ रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों ने भगदड़ के लिए भीड़ प्रबंधन की कमी को जिम्मेदार ठहराया। मंदिर में अनुमानित 50 हजार लोग जुटे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, बिजली के खंभे में करंट होने की अफवाह फैलते ही श्रद्धालुओं में दहशत मच गई और लोग भागने लगे। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भीड़ बेचैन हो गई थी और लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे थे। उन्होंने कहा, “स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया।”

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि रविवार रात से ही मंदिर में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। उन्होंने बताया, “कतार छह किलोमीटर से ज्यादा लंबी थी। एक श्रद्धालु को मंदिर के अंदर पहुंचने में औसतन चार घंटे लग रहे थे।”

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भगदड़ पर दुख जताते हुए घटना को हृदयविदारक बताया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगदड़ में घायल लोगों के तत्काल और समुचित इलाज के निर्देश दिए गए हैं।


उन्होंने एक्स पर लिखा,

लखीसराय के अशोक धाम में हुई घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से मन अत्यंत व्यथित है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के समुचित और शीघ्र उपचार के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।”

बिहार के मंदिर में हुई यह भगदड़ हाल के दिनों में हुई ऐसी कई घटनाओं की नई कड़ी है। इससे कुछ दिन पहले ओडिशा में वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान अचानक भीड़ बढ़ने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। जनवरी 2025 में प्रयागराज में संगम पर आयोजित कुंभ मेले में भगदड़ से 30 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले 70 वर्षों में कुंभ मेले के दौरान यह छठी भगदड़ थी। प्रशासन भीड़ प्रबंधन को लेकर सचेत नहीं रहती है। जब कोई बड़ा हादसा होता है तो लोगों को और सरकार को भीड़ प्रबंधन की समझ आती है। प्रयागराज में कुंभ के दौरान हादसे के बाद ही सरकार जगी थी।

इसी महीने आंध्र प्रदेश के तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के पास भी भगदड़ मची थी। मुफ्त दर्शन पास लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जमा हुए थे। इस हादसे में कम से कम छह लोगों की मौत हुई थी और 35 लोग घायल हुए थे।