कांग्रेस ने PM मोदी के इस्तीफे और CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की उठाई मांग, बढ़ा विवाद
कांग्रेस कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी “वोट चोरी” के लिए इस्तीफा देने को कहा।
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल रोकने और इस प्रक्रिया के बाद सूची से हटाए गए 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की। प्रस्ताव में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी “वोट चोरी” के लिए इस्तीफा देने को कहा।
नई दिल्ली में हुई बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में SIR, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों पर चर्चा हुई।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव आयोग के प्रमुख पर दबाव डाल रहे हैं और कहा कि PMमोदी को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने शुरुआती वक्तव्य के अंशों में खड़गे ने इस विवाद पर कांग्रेस की पांच मांगें रखीं।
पहली मांग,
मतदाता सूचियों में हुए बड़े बदलावों का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करने की है।
दूसरी मांग,
जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी और अपील का अवसर दिया जाए।
तीसरी मांग,
राजनीतिक दलों को मतदाता सूची का डेटा समय पर और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्रारूप में मिले।
चौथी मांग,
गंभीर विसंगतियां सामने आने पर स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
और पांचवीं मांग,
चुनाव संबंधी आंकड़ों और फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है।
खड़गे ने कहा कि,
सबसे जरूरी बात मतदाताओं का यह भरोसा है कि उनका वोट सुरक्षित है। उनके मुताबिक कांग्रेस इस विवाद को केवल चुनाव जीतने या हारने के सवाल के रूप में नहीं देखती। पार्टी इसे मतदाताओं के अधिकारों, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को सड़कों से संसद तक उठाएगी। खड़गे ने ऐसी चुनाव आयोग व्यवस्था की जरूरत बताई जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों भरोसा कर सकें।
विवाद का एक प्रमुख कारण चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरें हैं। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने SIR, नए मतदाताओं के नाम दर्ज करने वाले Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची तक पहुंच और आयोग की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक,
पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की गईं। कांग्रेस का कहना है कि इन खबरों के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित फैसले आयोग ने सामूहिक रूप से लिए थे या नहीं।
चुनाव आयोग ने अपने कामकाज का बचाव किया है। उसका कहना है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य बात है। आयोग के अनुसार, उसके फैसलों को पूरा कानूनी आधार प्राप्त है और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

मतभेदों की खबरों के बाद हुई आयोग की पहली बैठक से जुड़े प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी से संबंधित थे; उनका नीतिगत फैसलों या आईटी प्रभाग के मामलों से संबंध नहीं था।
कांग्रेस ने SIR पर आयोग के हालिया कदमों को अपर्याप्त बताया है। पार्टी का आरोप है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम छूटने की आशंका दूर करने के लिए अधिक स्पष्ट आंकड़ों और प्रभावी अपील व्यवस्था की जरूरत है। सोमवार को भी खड़गे ने कहा था कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों ने आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने SIR के साथ फॉर्म 6, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा मतदाता डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण के मुद्दे उठाए थे। हालांकि, इन आरोपों और आयोग के जवाब के बीच मतदाता सूचियों में बदलाव के कारणों पर मतभेद बने हुए हैं।
इस बीच पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने एक खुले पत्र में ज्ञानेश कुमार पर चल रहे SIR के दौरान कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ने विपक्षी दलों से यह भी आग्रह किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के इस्तीफा देने तक वे चुनावों का बहिष्कार करें।
यह पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह की अपील है; कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव में रखी गई मांगों से इसे अलग समझना जरूरी है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। कांग्रेस अब इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सहयोगी दलों के साथ रणनीति बनाने की तैयारी में है। विपक्षी दलों की बुधवार को बैठक प्रस्तावित है, जिसमें संयुक्त अभियान और संसद में कुमार को हटाने की मांग से जुड़ा एक और नोटिस देने पर विचार हो सकता है। फिलहाल विवाद का केंद्र यही सवाल है कि मतदाता सूचियों में हुए बदलावों की पूरी जानकारी लोगों तक कैसे पहुंचे और जिनका नाम हटाया गया है, उन्हें अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर कैसे मिले।