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विवाद के बाद फार्म 6 पर चुनाव आयोग ने मारी पलटी, हटा दिया नियम

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
विवाद के बाद फार्म 6 पर चुनाव आयोग ने मारी पलटी, हटा दिया नियम

अब SIR पूरा हो चुके क्षेत्रों में नया मतदाता बनने के लिए आवेदन करते समय यह घोषणा अनिवार्य नहीं होगी।

दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में किए गए जिस बदलाव को गैरकानूनी बताया था और जिसके बाद देशभर में जिस तरह तूफान मचा, कांग्रेस पार्टी के नेताओं- कार्यकर्ताओं ने देशभर में विरोध- प्रदर्शन किया, अब उस बदलाव को चुनाव आयोग ने वापस ले लिया है।

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक,

भारत निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 से जुड़ी विवादित घोषणा की अनिवार्यता उन राज्यों में हटा दी है, जहां मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पूरा हो चुका है। अब यह घोषणा केवल उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आवेदकों के लिए अनिवार्य रहेगी, जहां एसआईआर की प्रक्रिया अभी जारी है। इस घोषणा को जोड़ने के तरीके पर आयोग के भीतर से ही आपत्तियां सामने आई थीं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की बात उठाई, कानूनविदों और कई पूर्व मुख्य़ चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बाद चुनाव आयोग को आखिरकार अपने गैरकानूनी विवादित फैसले वापस लेने ही पड़े।


Form 6 के विवादित बदलाव में,

आवेदकों से पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची से अपना पारिवारिक संबंध बताने को कहा गया था। इसके तहत उन्हें जानकारी देनी होती थी कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं। संबंधित नाम मौजूद होने पर मतदान केंद्र और सूची में क्रम संख्या का विवरण भी मांगा जाता था।

अब SIR पूरा हो चुके क्षेत्रों में नया मतदाता बनने के लिए आवेदन करते समय यह घोषणा अनिवार्य नहीं होगी।

चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर ये बदलाव उस फैसले के कुछ दिनों बाद किए गए हैं, जिसमें आयोग ने घोषणा की जरूरत केवल जारी SIR वाले क्षेत्रों तक सीमित रखने का निर्णय लिया था। इस तरह पोर्टल पर आवेदन की व्यवस्था को आयोग के फैसले के अनुरूप बदला गया है। हालांकि, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण अभी चल रहा है, वहां आवेदन करने वालों को यह अतिरिक्त जानकारी देना अब भी जरूरी होगा।

यह मामला अंग्रेजी अखबार The Indian Express की उन रिपोर्टों के बाद चर्चा में आया, जिनमें Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में घोषणा जोड़े जाने और इस पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का विवरण सामने रखा गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद केवल घोषणा में मांगी गई जानकारी को लेकर नहीं था। सवाल यह भी था कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े निर्धारित फॉर्म में ऐसी अतिरिक्त शर्त किस अधिकार और प्रक्रिया के तहत जोड़ी गई।

अखबार ने 12 जुलाई को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ECINET पर ऑनलाइन जमा किए जाने वाले Form 6 के दो हिस्सों के बीच एक नई घोषणा शामिल की गई थी। इसमें आवेदक से पिछली SIR की सूची में उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम की जानकारी मांगी गई थी। साथ ही बूथ और क्रम संख्या बताने को कहा गया था। लेकिन उसी समय आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकने वाले Form 6 में यह घोषणा मौजूद नहीं थी।

इसके बाद पिछले सप्ताह The Indian Express ने रिपोर्ट किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस घोषणा को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी। दोनों आयुक्तों ने कहा था कि इस तरह का बदलाव निर्धारित संशोधन प्रक्रिया के जरिए ही किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और विवरण में सुधार से जुड़े फॉर्म में संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

चुनाव आयुक्त संधू ने इस बदलाव को “अनधिकृत/गैरकानूनी” बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी। Form 6 से जुड़ी यह घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद के प्रमुख मुद्दों में शामिल थी। इससे आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के पालन को लेकर उठ रही आपत्तियां भी सामने आईं। बदलाव को गैरकानूनी बताने की बात रिपोर्ट में संधू की आपत्ति के रूप में दर्ज है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले दस महीनों में संधू और जोशी ने कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां आधिकारिक रिकॉर्ड पर दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में उन्होंने आयोग के कामकाज के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने का मुद्दा उठाया था। Form 6 की घोषणा को लेकर असहमति इसी व्यापक विवाद का हिस्सा थी। दोनों आयुक्तों की आपत्तियों ने यह सवाल सामने रखा कि आयोग के फैसले कैसे लिए जा रहे थे और उनमें निर्धारित प्रक्रिया का कितना पालन हो रहा था।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना रहा है कि Form 6 में कोई संशोधन किया ही नहीं गया था। आयोग के अनुसार, यह घोषणा SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त आवश्यकता थी। उसने यह भी कहा है कि बिहार SIR पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा को बरकरार रखा था। फिलहाल बदलाव के बाद इसकी अनिवार्यता का दायरा सीमित हो गया है: जहां SIR पूरी हो चुकी है, वहां घोषणा जरूरी नहीं होगी; जहां प्रक्रिया जारी है, वहां यह शर्त लागू रहेगी।