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राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार को किया तलब, DUSU चुनाव में NSUI की हार पर मांगा जवाब

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार को किया तलब, DUSU चुनाव में NSUI की हार पर मांगा जवाब

कन्हैया से छिनेगा NSUI का प्रभार?

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) का चुनाव कांग्रेस के लिए युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच परखने का मौका था। लेकिन पार्टी की छात्र इकाई NSUI चार सदस्यीय केंद्रीय पैनल की एक भी सीट नहीं जीत सकी। चुनाव के कई सप्ताह बाद राहुल गांधी ने अब इस हार पर NSUI के प्रभारी कन्हैया कुमार से जवाब मांगा है।

सोमवार को राहुल गांधी ने NSUI के प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ को चुनाव नतीजों की समीक्षा के लिए बुलाया। बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक,

राहुल गांधी ने दोनों नेताओं से पूछा कि अध्यक्ष पद की जीत के इतने करीब होने के बावजूद NSUI का प्रदर्शन इतना खराब कैसे रहा। बताया जा रहा है कि उन्होंने सवाल किया, “हम अध्यक्ष पद जीतने के बहुत करीब थे, फिर क्या हुआ?

सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने चुनाव प्रबंधन पर नाराज़गी जताई और रणनीति, उम्मीदवारों के चयन तथा प्रचार अभियान पर विस्तृत जवाब मांगा। वेणुगोपाल ने भी कथित तौर पर कन्हैया कुमार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि टिकट बांटते समय कुमार ने उम्मीदवारों की ज़िम्मेदारी ली थी, तो नतीजे उम्मीदों से इतने अलग क्यों रहे?

बैठक में दीपांशु शौकीन का मामला भी उठा। NSUI के पूर्व सदस्य शौकीन ने उपाध्यक्ष पद का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और जीत हासिल की। वह 2023 से छात्र राजनीति में सक्रिय थे और 2023 तथा 2024 के चुनावों में NSUI के लिए प्रचार कर चुके थे। इस बार भी उन्होंने संगठन से टिकट मांगा था, लेकिन वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से पूछा कि शौकीन को संगठन में जगह क्यों नहीं दी गई। दोनों नेताओं ने जवाब दिया कि शौकीन ने कुछ ऐसी शर्तें रखी थीं जिन्हें मानना संभव नहीं था। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी इस मामले को संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं थे। शौकीन ने जीत के बाद दिए बयान में राहुल गांधी को अपना नेता बताते हुए बिना नाम लिए चुनाव मैनेजरों पर सवाल उठाया था।

हालांकि, कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने शौकीन को टिकट न दिए जाने के दावे पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि शौकीन को अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकराकर उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। सवाल यह उठाया जा रहा है कि आखिर शौकीन को उपाध्यक्ष का टिकट देने में क्या दिक़्क़त थी? क्या उपाध्यक्ष पद वीर चतरथ के लिए खाली करवाया गया?


DUSU के नतीजों में RSS से जुड़े छात्र संगठन ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीते। उपाध्यक्ष पद पर शौकीन विजयी रहे, जबकि NSUI का खाता नहीं खुला।

यह हार कांग्रेस के लिए ऐसे समय आई , जब पार्टी युवा मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत अलग-अलग शहरों में छात्रों से संवाद हुआ है। ऐसे में DUSU के नतीजों ने संगठन के भीतर यह सवाल खड़ा किया है कि युवा संपर्क अभियान ज़मीनी संगठनात्मक ताकत में कितना बदल पा रहा है। जिस दिन नतीजे आए, उसी दिन राहुल गांधी का इंदौर में छात्रों की गूँज का कार्यक्रम था।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में देश के विभिन्न मुद्दों और आंदोलनों में जेन-ज़ी युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि DUSU जैसे बड़े छात्र चुनाव में मिली हार की विस्तार से समीक्षा ज़रूरी है।

कांग्रेस के भीतर और बाहर से कन्हैया के नेतृत्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों ने इन नतीजों के बाद कन्हैया को NSUI के प्रभारी पद से हटाए जाने की मांग की है।

यह भी सवाल उठाया गया कि कन्हैया जेन जी के पूरे आंदोलन से दूर रहे, न वह किसी दिन जंतर मंतर गए और न ही बिहार या किसी और प्रदेश में इस आंदोलन में शामिल हुए।

साथ ही, कांग्रेस नेता के पुत्र वीर चतरथ को उपाध्यक्ष पद का टिकट देने को लेकर सवाल उठाए गए। वीर चतरथ NSUI के उपाध्यक्ष पद के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में कोई प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे और तीसरे स्थान पर रहे।

माना जाता है कि कन्हैया राहुल गांधी के क़रीब हैं इसलिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी उन्हें इस पद से हटाएंगे?