राहुल गांधी और निर्मला सितारमन में छिड़ी जुबानी जंग, क्या है टाटा ट्रस्ट के अंदर चल रहे विवाद की कहानी?
राहुल गांधी का यह बयान टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया।
टाटा समूह जो देश के सबसे बड़े और भरोसेमंद उद्योगपति घरानों में गिना जाता है, आजकल अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चा में है। विवाद सिर्फ़ इस बात का नहीं है कि टाटा सन्स की कमान किसके हाथ में रहेगी, बल्कि इस पर भी है कि कंपनी को शेयर बाज़ार में लिस्ट कराया जाए या नहीं। लेकिन अब ये उद्योग जगत के अंदर का विवाद सियासी रूप लेता जा रहा है। कल लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि टाटा समूह को “आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है।” वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके बयान पर पलटवार करते हुए कारोबारी मामले को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी का आरोप और निर्मला सीतारमण का जवाब
राहुल गांधी ने बुधवार सुबह X पर लिखा- “टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा। आप कब तक चुप रहेंगे? जब तक वे आपको भी अपने कब्ज़े में नहीं ले लेते?”
करीब छह घंटे बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कारोबारी और कानूनी मामलों को बिना ठोस आधार के आपराधिक बताना ठीक नहीं है। उन्होंने राहुल पर भारतीय उद्योगों और कारोबारियों की उपलब्धियों को बार-बार निशाना बनाने का आरोप भी लगाया।
लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। शाम को राहुल गांधी वित्तमंत्री को जवाब देते हुए X पर लिखा- एक और सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि पिछले साल 7 अक्टूबर को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और दूसरे ट्रस्टियों की अमित शाह के आवास पर बैठक क्यों हुई थी। राहुल ने पूछा कि आखिर ऐसा कौन-सा कारोबारी या कानूनी मामला था, जिसके लिए टाटा समूह के इन लोगों को गृह मंत्री के घर बुलाया गया था?
इस बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
बैठक के दावे की क्या है सच्चाई?
8 अक्टूबर 2025 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने नई दिल्ली में अमित शाह और निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। रिपोर्ट में PTI के हवाले से बताया गया कि, बैठक में चंद्रशेखरन भी मौजूद थे। नोएल टाटा के साथ TVS मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन और वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा भी शामिल हुए। बैठक गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर हुई, लेकिन इसका आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया।
CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि केंद्र सरकार टाटा ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ते तनाव पर नज़र रख रही है। रिपोर्ट में चार ट्रस्टियों- डेरियस खंबाटा, जहांगीर एच. सी. जहांगीर, प्रमित झावेरी और मेहली मिस्त्री- पर नोएल टाटा के नेतृत्व को कमज़ोर करने की कोशिश करने के आरोप लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।
इन सबके बीच अब सवाल ये उठता है की आखिर विवाद की असली वजह क्या है।
क्या है विवाद?
विवाद को समझने के लिए टाटा ट्रस्ट्स और टाटा सन्स के रिश्ते को समझना ज़रूरी है। MINT की एक रिपोर्ट के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स का नेतृत्व नोएल टाटा करते हैं। यह 14 चैरिटेबल ट्रस्टों का समूह है, जो समाजसेवा और जनहित के काम करता है। इनमें से सात ट्रस्टों के पास टाटा सन्स के शेयर हैं।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा सन्स की 27.98 प्रतिशत और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पांच छोटे ट्रस्टों की हिस्सेदारी मिलाकर इन परोपकारी संस्थाओं के पास कंपनी के कुल 65.9% शेयर हैं। शापूरजी पलोनजी परिवार के पास 18.38% हिस्सेदारी है। टाटा समूह की नौ कंपनियों के पास 12.86 प्रतिशत और सात व्यक्तियों के पास बाकी 2.87% शेयर हैं।
टाटा सन्स समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। इसके तहत आने वाली 26 कंपनियां शेयर बाज़ार में लिस्टेड हैं। मार्च 2026 के अंत में इन कंपनियों की कुल बाज़ार कीमत करीब 277 अरब डॉलर थी। इसलिए टाटा सन्स के नियंत्रण और भविष्य को लेकर होने वाला कोई भी फैसला पूरे समूह के लिए अहम है।
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सवाल
एन. चंद्रशेखरन टाटा सन्स के चेयरमैन हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है। 12 अगस्त को उन्होंने कहा था कि वह दोबारा इस पद पर नहीं रहना चाहेंगे। उन्होंने इसकी वजह नोएल टाटा के विरोध को बताया था, जो उनके मुताबिक साल की शुरुआत से जारी था।
हालांकि, 17 सितंबर को टाटा सन्स के बोर्ड ने उन्हें तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा चेयरमैन बनाने का फैसला किया। बोर्ड के कहने पर चंद्रशेखरन भी इसके लिए राज़ी हो गए। लेकिन नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले पर आपत्ति जताई। टाटा ट्रस्ट्स ने नियुक्ति की प्रक्रिया को गैरकानूनी बताते हुए सवाल उठाया कि क्या फैसला लेते समय कंपनी के नियमों का सही तरीके से पालन किया गया था। इसके बाद नोएल टाटा ने बोर्ड को पांच पत्र लिखे। उन्होंने फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बैठक में हुई चर्चा का पूरा रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
शेयर बाज़ार में लिस्टिंग पर टकराव
इस विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा टाटा सन्स को शेयर बाज़ार में लिस्ट कराने का है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सितंबर 2022 में टाटा सन्स को बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की श्रेणी में रखा था और सितंबर 2025 तक शेयर बाज़ार में लिस्ट होने का निर्देश दिया था। टाटा सन्स ने करीब 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ चुकाने के बाद मार्च 2024 में कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना पंजीकरण रद्द करने की मांग की, ताकि लिस्टिंग से बचा जा सके। लेकिन आरबीआई ने 12 सितंबर को इस मांग को खारिज कर दिया और नियमों का पालन करने को कहा।
टाटा ट्रस्ट्स भी कंपनी को शेयर बाज़ार में लिस्ट कराने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में कंपनी के भविष्य को लेकर ट्रस्ट्स, बोर्ड और नियामक संस्था के बीच मतभेद और अहम हो गए हैं।
Md. Tousif
मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।
