पंजाब में वोट चोरी के आरोप के बीच चुनाव आयोग का 27-28 अक्टूबर को दौरा
इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि 20 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में नशे से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुँचे हैं और पंजाब सरकार मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जाँच CBI को सौंपने की घोषणा कर दी ।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों वाली टीम 27और 28 अक्टूबर को पंजाब का दौरा करेगी। टीम राजनीतिक दलों, नागरिक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से बातचीत करके तथा प्रदेश में सुरक्षा, मतदाता सूचियों और मतदान संबंधी व्यवस्थाओं का आकलन करेगी । पंजाब में 27–28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित निर्वाचन आयोग के दौरे को केवल चुनावी तैयारियों की नियमित समीक्षा मानना पर्याप्त नहीं होगा। राज्य में इस समय नशे का संकट, कानून-व्यवस्था, मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण, प्रशासनिक निष्पक्षता और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं।
वर्तमान परिस्थितियों में इस दौरे का महत्व केवल प्रशासनिक निरीक्षण तक सिमित नहीं माना जा सकता है। यह पंजाब में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक दलों की शिकायतों को आयोग के सामने रखने का अवसर भी है। मुख्य विपक्षी दलों कांग्रेस शिरोमणि अकाली दल (बादल ) बहुजन समाज पार्टी भारतीय जनता पार्टी व अन्य राजनीतिक समूह की आपत्तियों और सुझावों को भी परखने की प्रक्रिया होगी ।
क्या निर्धारित समय पूर्व भी चुनाव हो सकते है चुनाव
इस दौरे से चुनाव की तारीख घोषित होने का संकेत मानना अभी उचित नहीं होगा लेकिन पिछले 2022 के कार्यक्रम के आधार पर अनुमान जरूर चर्चा में आ सकते हैं । 2021 में चुनाव आयोग के दौरे 15-16 दिसंबर के 23 दिन बाद 8 जनवरी 2022 को चुनावों की घोषणा हो गई थी। पंजाब की वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक है। इस दौरे से अरविंद केजरीवाल के बठिंडा में दिए गए बयान कि उनके पास पुख्ता जानकारी है कि पंजाब में जल्दी चुनाव हो सकते है की योजना की ओर संकेत होते दिख रहा है।
पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं। आयोग सुरक्षा, प्रशासनिक क्षमता और चुनावी सामग्री की उपलब्धता का आकलन करके चुनाव के चरणों की तैयारी तय कर सकता है। एक चरण में मतदान होगा या किसी विशेष परिस्थिति में अलग व्यवस्था की जरूरत होगी या चुनाव के चरण बढ़ सकते हैं यह समीक्षा आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगी ।
आयोग किन मुद्दों पर ध्यान दे सकता है ?
इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि 20 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में नशे से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुँचे हैं और पंजाब सरकार मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जाँच CBI को सौंपने की घोषणा कर दी । इससे नशे और सुरक्षा का मुद्दा चुनावी राज्य की राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद न्याय के लिए 3 महीने के इंतज़ार करने का आश्वासन की बात के राजनितिक हलकों में अलग अलग मायने निकले जाने लगे हैं।
पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित की गई। अख़बारों में अलग अलग प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इसमें लगभग 2.01 करोड़ मतदाता हैं। रिपोर्ट में प्रारंभिक सूची की तुलना में 13.60 लाख नामों की शुद्ध कमी बताई गई है, जबकि नए मतदाता भी जोड़े गए। मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ाकर 25,332 किए जाने की सूचना है। यह बदलाव अपने-आप में गलत नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं है, लेकिन आयोग के दौरे पर राजनीतिक दल नाम काटे जाने , नए युवा मतदाताओं के पंजीकरण और दावों-आपत्तियों के निपटारे पर स्पष्ट जानकारी की मांग रख सकते हैं हालांकि सभी राजनीतिक दल राज्य में हुयी एस आई आर प्रक्रिया को संतोषजनक होने की प्रतिक्रियाएँ पहले ही दे चुके है। आम आदमी पार्टी: सरकार की चुनावी तैयारियों और कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड पर सवालों का जवाब देने तथा प्रशासनिक तैयारी प्रस्तुत करने की समीक्षा चुनाव आयोग की टीम करेगी ।
कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा
अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती प्रदेश पंजाब के संदर्भ में कानून व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। प्रदेश में नियमित पुलिस प्रमुख (डी जी पी ) की नियुक्ति साढ़े चार साल बाद कुछ समय पहले ही की गई है। भाजपा सुरक्षा, नशे के विरुद्ध कार्रवाई और चुनावी व्यवस्था पर अपने मुद्दे आयोग के सामने उठाने के अवसर को खोना नहीं चाहेगी । शिरोमणि अकाली दल और अन्य दल मतदाता सूची ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केंद्रों, स्थानीय शिकायतों और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्थाओं पर अपनी चिंताओं को दर्ज कराने की पहल करेंगे। आयोग यह देख सकता है कि पुलिस की तैयारी अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई संवेदनशील इलाकों की पहचान और चुनाव के समय हिंसा रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रहे आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप इस समीक्षा को अतिरिक्त महत्व दे देते है। आयोग को संवेदनशील मतदान केंद्रों, पुलिस की तैयारी, केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवश्यकता और धन, शराब तथा नशीले पदार्थों के अवैध इस्तेमाल पर नियंत्रण की समीक्षा करनी अत्यंत आवश्यक हो जाती है। हालांकि, सामान्य कानून-व्यवस्था की समस्या और चुनाव को प्रभावित करने वाली विशिष्ट सुरक्षा आशंका में अंतर करना जरूरी है।
प्रशासनिक निष्पक्षता
राजनीतिक दलों के लिए महत्त्वपूर्ण प्रश्न होगा कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस सभी दलों के साथ समान व्यवहार कर रहे हैं। शिकायतों के निस्तारण, अधिकारियों की निष्पक्षता, चुनावी खर्च और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर स्पष्ट जवाबदेही माँगी जा सकती है। क्योंकि प्रदेश में कुछ समय पहले हुए नगर निकाय के चुनावों के समय राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार की कारगुजारियों पर काफी बवाल हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय में पंजाब के नगर निकाय चुनाव के 50 वार्डों में चुनावी अनियमितता और धांधलियों के आरोप साबित होने के बाद हाल ही दिए निर्णय में दोबारा चुनाव कराये जाने के आदेश दिए हैं।
राजनीतिक दलों के लिए इस दौरे का अर्थ
चुनाव आयोग की वरिष्ठ अधिकारियों वाली टीम का दौरा सामान्य चुनाव-पूर्व तैयारी का हिस्सा है। आयोग 2027 में पांच चुनावी राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा ले रहा है। आम तौर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों का पूरा आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले संबंधित राज्यों का दौरा करता है। दौरे की तारीख का पंजाब के विधानसभा सत्र के साथ संयोग राजनीति में कई तरह के अनुमानों को प्रेरित भी करता है। इसलिए 27–28 अक्टूबर के दौरे के कुछ समय बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना प्रबल होती है।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा नशे और कानून-व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर हमले तेज कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता-विरोधी माहौल को अपने पक्ष में बदलने और अकाली दल अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के घटनाक्रम में भाजपा ने नशे के मुद्दे को प्रमुख राजनीतिक विषय बनाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जवाब में भाजपा की मंशा और केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वर्तमान आम आदमी पार्टी अपनी सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर उठने वाले सवाल से चिंतित है।
राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन संबंधित निर्णयों और चुनावी कार्यक्रमों की गति और राजनीति का पुनर्मूल्यांकन करने को विवश हो सकते हैं। पारम्परिक रूप से पंजाब में भा ज पा और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन में ही चुनाव लड़ते रहे हैं लेकिन इस बार अभी तक गठबंधन के बारे में स्थितियां स्पष्ट नहीं हुयी है। भारतीय जनता पार्टी अबकी बार अकेले ही पुरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की बात को बार बार दोहरा चुकी है। कांग्रेस ने अपनी कलह का हल करके नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह को कप्तानी सौंपी है और जीत की संभावनाओं को मजबूत करने की कवायद में जुट गयी है।
कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण बिन्दु पर आयोग को स्थिति को स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा। संवेदनशील मतदान केंद्रों और चुनावी हिंसा की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान किन मापदंडों पर की जाएगी? नकदी, शराब, नशीले पदार्थों और अन्य प्रलोभनों के विरुद्ध कार्रवाई की निगरानी कैसे होगी? दौरे के बाद सामने आई कमियों को दूर करने के लिए क्या समय-सीमा और जवाबदेही तय होगी? इस दौरे का वास्तविक महत्व आयोग द्वारा किये जाने वाले निष्पक्ष आकलन से आँका जायेगा। पंजाब के आगामी चुनाव में विश्वसनीयता की असली कसौटी केवल यह नहीं होगी कि चुनाव समय पर हो जाएँ। कसौटी यह होगी कि हर पात्र मतदाता को वोट देने का अवसर मिले, हर दल को समान राजनीतिक अवसर मिले और प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष दिखाई देने के साथ वास्तव में निष्पक्ष भी हो। आयोग का यह दौरा इन प्रश्नों पर ठोस जवाबदेही तय करने का अवसर है।
Jagdeep Singh Sindhu
वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विवेचक जगदीप सिंह सिंधू राष्ट्रीय हिंदी दैनिक हरिभूमि,पीपल्स समाचार,महाकौशल आदि में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह एफ एम रेडियो तरंग 104 के पूर्व स्टेशन हेड तथा पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं।
