कुछ नहीं बदला पिछले साढ़े चार सालों में पंजाब में, केजरीवाल-भगवंत मान ने सिर्फ अपने चेहरे चमकाए
पंजाब में मतदाताओं के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी असंतोष व्याप्त है।
16 मार्च 2027 को आम आदमी पार्टी के पंजाब (पूर्ण राज्य दिल्ली से तुलना में ) में सत्ता के 5 साल पूरे हो जायेंगे। 2022 में पंजाब ने पूरा भरोसा आम आदमी पार्टी पर जताया और पूर्ण बहुमत दिया। 'रंगला पंजाब' केवल राजनीतिक संवाद और प्रचार में दिखता रहा जबकि वास्तविकता में आम आदमी पार्टी को अब फिर से चुनावों में जाने के लिए माताओं, बहनों और बेटियों के लिए सम्मान राशि की किस्तों पर निर्भर होना पड़ रहा है। साढ़े चार साल के कार्यकाल में पंजाब में किये गए 'बदलाव' 'कटटर ईमानदार' और व्यवस्था परिवर्तन के वादे की वास्तिवकताओं में असंतोष प्रदेश के मतदाताओं के साथ साथ उनके अपने समर्थकों,कार्यकर्ताओं और विधायकों में भी व्याप्त है।

आम आदमी पार्टी की राजनीति की बुनियाद ही भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से निकली है। पंजाब के 2022 घोषणापत्र में मजबूत लोकपाल और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का वादा प्रमुख था। लेकिन पंजाब के लोकपाल जस्टिस विनोद कुमार शर्मा का कार्यकाल 8 अक्टूबर 2025 को समाप्त होने के बाद सितंबर 2026 तक नया लोकपाल नियुक्त नहीं हुआ। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने सरकार से इस देरी पर जवाब मांगा।

जिस पार्टी ने लोकपाल को अपनी राजनीति का प्रतीक बनाया, उसकी अपनी राज्य सरकार में लगभग एक साल तक लोकपाल का पद खाली क्यों रहा इस सवाल का जवाब पार्टी के पास नहीं है। पंजाब में नियमित पुलिस प्रमुख पिछले 4 .5 साल से सरकार लगा नहीं पायी।
2023 की शुरुआत में, पंजाब सिविल सर्विस (PCS) और IAS के कई अधिकारी पांच दिन की सामूहिक हड़ताल पर चले गए। यह प्रशासनिक हड़ताल तब शुरू हुई जब राज्य के विजिलेंस ब्यूरो ने एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि नौकरशाही का मानना था कि इसके लिए सरकार की उचित मंज़ूरी नहीं ली गई थी।
पंजाब के सबसे ऊँचे प्रशासनिक पद पर काफी खींचतान देखने को मिली, जो 2024 के आखिर में तब चरम पर पहुँच गई जब अनुराग वर्मा की जगह 1992 बैच के IAS अधिकारी के.ए.पी. सिन्हा को अचानक पंजाब का नया मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया गया। अनुराग वर्मा का पद घटाकर उन्हें राज्य में राजस्व और कृषि विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी दे दी गई।
विपक्षी पार्टियों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस अचानक हुए फेरबदल को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी की केंद्रीय लीडरशिप के बीच पर्दे के पीछे चल रहे तनाव से जोड़ा था।
पंजाब कैबिनेट ने एक विवादित आदेश पास किया, जिसके तहत मुख्यमंत्री से राज्य के प्रमुख विकास प्राधिकरणों—जैसे कि पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड (PRTPD)—के चेयरमैन के तौर पर उनकी पारंपरिक भूमिका छीन ली गई और ये अधिकार सीधे मुख्य सचिव को सौंप दिए गए। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा समेत विपक्ष के नेताओं ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों का "खतरनाक ह्रास" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुने हुए मुख्यमंत्री को दरकिनार कर एक गैर-चुने हुए नौकरशाह को अधिकार सौंपने से लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था कमजोर हुई है।
केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य में चल रहे कथित प्रशासनिक "रेट कार्ड" घोटाले की जांच शुरू की है, जिसमें कथित तौर पर अच्छी पोस्टिंग और नौकरशाहों के तबादले नकद पैसे लेकर किए जा रहे थे। ED ने पंजाब पुलिस पर दबाव डाला कि वे 'ट्रांसफर के बदले कैश' वाले भ्रष्टाचार के रैकेट की ओर इशारा करने वाले सबूतों के आधार पर FIR दर्ज करें। इसके बाद राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच इनकार और टकराव की स्थिति पैदा हो गई, जो हाई कोर्ट में एक गंभीर संवैधानिक विवाद का मुद्दा बन गया। विपक्ष ने बार-बार मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ राजनीतिक अधिकारी इस रैकेट में शामिल थे।

जुलाई 2026 में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के राजनीतिकरण के बाद राजनीति के अपराधीकरण के गंभीर आरोप लगाए थे। जाखड़ ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद मेयर व नगर परिषद अध्यक्षों के चुनावों के दौरान, भगवंत मान सरकार ने नौकरशाही का इस्तेमाल किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अभूतपूर्व तरीके से कमजोर किया।
पंजाब सरकार एक प्राइवेट कंपनी, Adglobal360 India Pvt. Ltd. को अपनी ऑनलाइन रेप्युटेशन और नागरिकों के फ़ीडबैक को मैनेज करने के लिए 'लेटर ऑफ़ इंटेंट' (LoI) जारी करने के बाद बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गई है। सूचना और जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) के आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत 10,59,00,000 रुपये है। इसका मकसद ऑनलाइन रेप्युटेशन मैनेजमेंट, एनालिटिक्स और पब्लिक कम्युनिकेशन में मदद करना है। इस कदम की विपक्ष के नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर अपनी तारीफ़ और इमेज बनाने के लिए टैक्स देने वालों के पैसे बर्बाद करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी सोशल मीडिया पर अपनी तारीफ़ करवाने के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रही है, जबकि राज्य को और गहरे आर्थिक संकट में धकेल रही है।

पंजाब गंभीर आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज के जाल में फंस चुका है जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कभी देश का अन्न भंडार कहलाने वाला पंजाब आज अपने कर्मचारियों को वेतन देने और बुनियादी व्यवस्थाएं चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। कुल बकाया कर्ज 4.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुँच चुका है। वर्ष 2027 तक अनुमानित कर्ज 4.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाने की जानकारी मिल रही है।
राजस्व आय का लगभग 25% हिस्सा केवल कर्ज और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। 2026 - 27 के लिए 2 लाख 60 हजार 437 करोड़ रूपए का वार्षिक बजट पेश किया गया। 2026-27 के बजट अनुमानों के अनुसार पंजाब का राजस्व घाटा 21,955 करोड़ रुपये यानी GSDP का 2.2% और राजकोषीय घाटा 39,971 करोड़ रुपये यानी 4.1% अनुमानित है। 2025-26 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 4.2% था। मार्च 2026 के अंत में राज्य की बकाया देनदारियां GSDP के लगभग 45.1% पर अनुमानित थीं।
आम आदमी पार्टी की सरकार ने बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां देने को अपनी उपलब्धियों में शामिल किया है। लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप भी सामने आया है। 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फार्मेसी अधिकारियों की नियुक्ति पर रोक लगाई, जहां भर्ती परीक्षा में कथित धोखाधड़ी/अनियमितता की जांच का प्रश्न उठा। पंजाब स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन की नियुक्तियों पर भी चयन प्रक्रिया को लेकर न्यायिक सवाल उठे।
2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब को नशामुक्त बनाने का बड़ा राजनीतिक वादा किया था। लेकिन 2026 में नशा अभी भी पंजाब की राजनीति के केंद्र में है। भारतीय जनता पार्टी ने इसी मुद्दे को अपने नशा मुक्त पंजाब अभियान के माध्यम से प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है। साढ़े चार साल से अधिक सत्ता में रहने के बाद नशे के खिलाफ अभियान का outcome क्या है इस पर स्पष्ट अभी कुछ नहीं।

नशामुक्त पंजाब अभियान की पोल हाल की घटना में खुल गई जब वित्त मंत्री हरपाल चीमा की सभा में एक व्यक्ति ने सार्वजनिक सभा में सवाल पूछ लिया और बाद में प्रताड़ना के चलते उसने आत्महत्या कर ली थी।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में इंसाफ की गारंटी देने वाले अरविंद केजरीवाल और भगवंत सिंह मान अब खामोश है। उनकी पार्टी के अमृतसर से विधायक पूर्व पुलिस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने ही अरविन्द केजरीवाल और भगवंत को सवालों में घेर लिया जिसके कारण उनको पार्टी से निष्कासित होना पड़ा।
पंजाब में कानून-व्यवस्था भी आम आदमी पार्टी सरकार की परीक्षा का क्षेत्र रहा है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के 2023 के टीवी इंटरव्यू, जिनमें एक इंटरव्यू पंजाब पुलिस की हिरासत से हुआ था, को लेकर पुलिस अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच का आदेश दिया। कांग्रेस और भाजपा जैसे विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि जेलों के अंदर से जबरन वसूली (Extortion calls) और आपराधिक साजिशें अब भी बेरोकटोक जारी हैं।

आलोचकों और राजनीतिक नेताओं का यह भी तर्क है कि खुलेआम गोलीबारी और आपराधिक वारदातों के कारण आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। राज्य प्रशासन और सरकार गैंगस्टरों के सफाए के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल और विशेष अभियानों का हवाला दे रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और विश्लेषक इसे पूरी तरह वर्तमान सरकार की विफलता की श्रेणी में रख रहे हैं।
केजरीवाल ने मंचों से दावा किया था कि सरकार की नीतियों का ऑडिट होना चाहिए के पंजाब की ऐसी स्थिति क्यों हो गई। आम आदमी पार्टी की पंजाब में सरकार का राजनीतिक ऑडिट देखा जाए तो AAP सरकार इन 10 सवालों पर कितना खरा उतरी है यह आकलन भी देखना चाहिए। आम आदमी पार्टी का 2022 का वादा “व्यवस्था बदलने” का था। इसलिए 2027 में उसका मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि उसने कितनी योजनाएं शुरू कीं, बल्कि इस आधार पर भी होगा कि उसने पंजाब की पुरानी संरचनात्मक समस्याओं—कर्ज, रोजगार, उद्योग, कृषि, नशा, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही में क्या और कितना संस्थागत बदलाव या सुधार किया या स्थिति पहले से भी ज्यादा ख़राब हो गयी ।
Jagdeep Singh Sindhu
वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विवेचक जगदीप सिंह सिंधू राष्ट्रीय हिंदी दैनिक हरिभूमि,पीपल्स समाचार,महाकौशल आदि में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह एफ एम रेडियो तरंग 104 के पूर्व स्टेशन हेड तथा पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं।
