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केजरीवाल के दो चेहरे... दिल्ली में विक्टिम कार्ड और पंजाब में तानाशाही

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 8 min read
केजरीवाल के दो चेहरे... दिल्ली में विक्टिम कार्ड और पंजाब में तानाशाही

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार पत्रकारों के पीछे पड़ गई है।

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट हटाने या उनके सोशल मीडिया अकाउंट को प्रतिबंधित करने को मौलिक अधिकार पर आक्रमण मानती है, लेकिन वहीं पंजाब में उनकी पार्टी की सरकार पत्रकारों पर उसी तरह का आक्रमण करती है, जिसका आरोप वो दिल्ली में केंद्र की भाजपा सरकार पर लगाते रहते हैं। इसके लिए केजरीवाल की पार्टी कॉपीराइट स्ट्राइक को हथियार बनाती है। इतने बड़े पैमाने पर कॉपीराइट स्ट्राइक के नियमों का बेजा इस्तेमाल करने के मामले में आम आदमी पार्टी पहली राजनीतिक पार्टी है। The Reporters Collective ने अरविंद केजरीवाल के इसी दोमुंहापन या कहें तो दोहरे चरित्र को उजागर किया है।

दरअसल पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार पत्रकारों के पीछे पड़ गई है। पिछले साल अक्टूबर से लेकर अभी तक पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने फेसबुक पर पत्रकारों द्वारा अपलोड किए गए कम-से-कम 48 वीडियो और पोस्ट पर कॉपीराइट का दावा किया है। बता दें कि ये सभी सामग्री पंजाब की AAP सरकार की आलोचना से जुड़ी थीं।

जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच चार फेसबुक पेजों को उस सामग्री पर कॉपीराइट उल्लंघन के नोटिस मिलने के बाद हटा दिया गया, जिस पर AAP ने अपना अधिकार जताया था। पांचवां पेज पंजाब पुलिस के एक नोटिस के बाद हटाया गया और उस पर अलग से पांच कॉपीराइट नोटिस भी आए थे। जब ये पांचों पेज हटाए गए, तब उनके कुल फॉलोअर्स की संख्या 30 लाख से अधिक थी।


AAP लगातार दूसरी पार्टियों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), पर मीडिया को नियंत्रित करने और उसकी आवाज दबाने के आरोप लगाती रही है। 7 अगस्त को AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि Gen Z प्रदर्शनों के दौरान सरकार-विरोधी सामग्री पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया यूज़र्स को निशाना बनाया गया। यह बयान तब आया जब उनका अपना इंस्टाग्राम अकाउंट, पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के अकाउंट के साथ प्रतिबंधित कर दिया गया था। केजरीवाल ने इसे मौलिक अधिकारों पर हमला बताया। लेकिन पंजाब में, जहां AAP सत्ता में है, पार्टी ने उसी तरीके का इस्तेमाल किया है जिसका आरोप वह दूसरों पर लगाती है। कई महीनों तक AAP ने पंजाब सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के दावे किए, जिसके चलते उनके पेज हटाए गए।

कॉपीराइट स्ट्राइक किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा दी जाने वाली एक कानूनी कार्रवाई है, जिसमें वास्तविक कॉपीराइट मालिक द्वारा बिना अनुमति उसकी सामग्री इस्तेमाल किए जाने की शिकायत करने पर संबंधित कंटेंट हटाया जा सकता है।

AAP ने जिन सामग्रियों को कॉपीराइट उल्लंघन बताते हुए फ्लैग किया, उनमें एक सिख धार्मिक संस्था की प्रेस रिलीज़, विपक्ष के एक विधायक की तस्वीर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अपनी सोशल मीडिया पोस्ट, AI से बनाई गई तस्वीरें, राज्य बोर्डों में नियुक्तियों से जुड़ी सरकारी अधिसूचना और पंजाब विधानसभा की तस्वीरें तक शामिल थीं। सबसे अधिक कॉपीराइट स्ट्राइक भगवंत मान और अन्य AAP नेताओं की तस्वीरों को लेकर दी गईं हैं। इनमें से काफी सामग्री ऐसी थी जिस पर स्पष्ट रूप से AAP का स्वामित्व नहीं था।

यह पहली बार नहीं है जब पंजाब में AAP पर पत्रकारों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं। 2022 में पंजाब में सरकार बनाने के बाद से पार्टी पर पत्रकारों और RTI कार्यकर्ताओं को पुलिस मामलों की धमकी देने, The Indian Express समेत कई अखबारों के प्रसार में बाधा डालने, पंजाब केसरी समूह के खिलाफ “टारगेटेड विच-हंट” चलाने और पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड करवाने के आरोप लग चुके हैं। विपक्षी दलों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला बताया।

The Reporters Collective की इस रिपोर्ट में जिन पांच मामलों की पड़ताल की गई, उनमें RMB Television, Lok Awaz TV, Maninderjeet Sidhu, Rattandeep Singh Dhaliwal और Parmeet Singh Bidowali के फेसबुक अकाउंट शामिल थे। इन पेजों को पंजाब के छोटे शहरों और टियर-3 शहरों में काम करने वाले चार क्षेत्रीय पत्रकार चलाते हैं।

जनवरी से अप्रैल के बीच प्रभावित पत्रकारों ने फेसबुक के शिकायत अधिकारी को पत्र लिखे और अपनी सामग्री तथा पेजों को बहाल करने के लिए अपील की। इनमें से दो पत्रकार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचे और आरोप लगाया कि कॉपीराइट स्ट्राइक का इस्तेमाल सेंसरशिप के लिए किया गया। इनमें से एक मामला अभी भी अदालत में है। दूसरे पत्रकार ने राज्य सरकार द्वारा पेज हटाए जाने के कारण बताते हुए जवाब दाखिल करने के बाद अपनी याचिका वापस ले ली। लेकिन इन प्रयासों से पेज बहाल नहीं हुए। पेज कई महीनों तक बंद रहे। इसके बाद The Reporters’ Collective ने फेसबुक की मालिक कंपनी Meta को सवाल भेजे। Meta के एक प्रवक्ता ने कहा,

“कंटेंट और अकाउंट गलती से हटा दिए गए थे और अब उन्हें बहाल कर दिया गया है।”

पांच में से चार पेज बाद में बहाल हो गए। RMB Television को सवाल भेजे जाने के दो दिन बाद 17 जून को बहाल किया गया। Lok Awaz TV, Rattandeep Singh Dhaliwal और Parmeet Singh Bidowali के पेज 22 जून को वापस आए। हालांकि ‘Maninderjeet Sidhu’ पेज अभी भी बंद है और पंजाब पुलिस की कानूनी मांग के कारण ब्लॉक है।

सावधानी के तौर पर Lok Awaz TV चलाने वाले मनिंदरजीत सिंह सिद्धू ने आगे की कॉपीराइट स्ट्राइक से बचने के लिए अपने पेज से AAP से संबंधित सारी सामग्री हटा दी। बाकी पत्रकारों ने अपने बहाल हुए पेजों पर पुरानी सामग्री रहने दी। डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली दिल्ली की गैर-लाभकारी संस्था Software Freedom Law Centre ने कहा कि इन पेजों की बहाली यह दिखाती है कि ऑटोमेटेड मॉडरेशन के कारण “अपारदर्शी और जरूरत से ज्यादा व्यापक सेंसरशिप” हो सकती है।

कॉपीराइट स्ट्राइक पर सवाल किए जाने पर AAP-पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने दावा किया कि,

जिन चार लोगों के फेसबुक पेज हटाए गए, वे “पत्रकार नहीं हैं।” पन्नू ने कहा, “अगर किसी के पास उचित डिग्री या योग्यता नहीं है और वह AAP के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहा है, तो हमें कार्रवाई करनी होगी।

भारत में पत्रकारिता करने के लिए किसी डिग्री की कानूनी अनिवार्यता नहीं है। पत्रकारों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी किसी सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है। रिपोर्ट के मुताबिक, बौद्धिक संपदा कानूनों का इस्तेमाल करके AAP-पंजाब ने राज्य सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने का एक नया तरीका खोज लिया है। आम तौर पर आलोचकों के खिलाफ निजी पक्ष मानहानि जैसे दूसरे कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि AAP द्वारा निशाना बनाए गए पत्रकारों में से तीन के पास पत्रकारिता की डिग्री है, जबकि चौथा अभी पत्रकारिता का कोर्स कर रहा है। इनमें से एक पत्रकार ने तो 2019 में, पंजाब में AAP की सरकार बनने से पहले, भगवंत मान का इंटरव्यू भी लिया था।

डिजिटल अधिकार विशेषज्ञों के मुताबिक, संभवतः भारत में यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल ने इतने बड़े पैमाने पर कॉपीराइट स्ट्राइक का इस्तेमाल “सेंसरशिप” के लिए किया है।

पंजाब में स्थानीय भाषाओं के डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान तेजी से उभरे। मुख्यधारा मीडिया की सीमाओं से परेशान कई पत्रकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तरफ आए। सोशल मीडिया व्यूज़ से मिलने वाली विज्ञापन आय ने भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया। कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन पंजाब के पत्रकारों का अनुमान है कि राज्य में ऐसे करीब 200 डिजिटल आउटलेटहैं, जिनमें ज्यादातर फेसबुक और यूट्यूब पर सक्रिय हैं। इनमें Lok Awaz TV और Maninderjeet Sidhu नाम के दो प्लेटफॉर्म क्रमशः 9.7 लाख और 4.5 लाख फॉलोअर्स के साथ फरीदकोट के पत्रकार मनिंदरजीत सिंह सिद्धू चलाते हैं। सिद्धू करीब 15 लोगों को रोजगार देते हैं और फरीदकोट के जैतू में किराए के दो कमरों के दफ्तर से अपना न्यूज़रूम चलाते हैं।

AAP ने सिद्धू के दोनों पेजों के खिलाफ कम-से-कम20 कॉपीराइट स्ट्राइक दाखिल कीं। इनमें कम-से-कम 15 स्ट्राइक के बाद जनवरी में Lok Awaz TV का पेज बंद हो गया। Maninderjeet Sidhu पेज को मार्च में IT Act उल्लंघन के कारण अलग से हटा दिया गया। इस पर कम-से-कम पांच बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दावे भी किए गए।

फ्लैग की गई सामग्री में भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और पंजाब विधानसभा में प्रदर्शन कर रहे AAP विधायकों की तस्वीरें शामिल थीं। AAP ने फेसबुक से यहां तक कहा कि मान और केजरीवाल की AI-generated तस्वीरें तथा कांग्रेस के एक विधायक की तस्वीर भी उसके बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।

26 सितंबर 2025 को Lok Awaz TV ने एक वीडियो पोस्ट किया था,

जिसमें सिद्धू विधानसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ AAP विधायकों के प्रदर्शन पर टिप्पणी कर रहे थे। वीडियो में AAP विधायकों की पांच तस्वीरें थीं, जिनमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि को “जुमला” बताते हुए तख्तियां पकड़े थे।

The Reporters Collective ने इनमें से एक तस्वीर को AAP-पंजाब के अपने X हैंडल तक ट्रेस किया। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां के सचिव सुरिंदर सिंह मोती ने कहा कि विधानसभा के अंदर किसी भी राजनीतिक पार्टी को तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद AAP ने विधानसभा के अंदर ली गई तस्वीरों पर अपना स्वामित्व जताया।

पंजाब सरकार विधानसभा की कार्यवाही का प्रसारण अपने यूट्यूब चैनल पर भी करती है। विधानसभा के नियम पत्रकारों को कार्यवाही की तस्वीरें लेने से रोकते हैं। इसलिए पत्रकार सरकारी यूट्यूब प्रसारण से लिए गए वीडियो ग्रैब और आधिकारिक प्रेस रिलीज़ पर निर्भर रहते हैं।

20 जनवरी को फेसबुक के शिकायत अधिकारी को लिखे पत्र में सिद्धू ने तर्क दिया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी सामग्री को पोस्ट करना AAP के “मालिकाना अधिकारों” का उल्लंघन नहीं है।

सिद्धू के दूसरे पेज Maninderjeet Sidhu को कम-से-कम पांच IP दावे मिले। इसके अलावा आठ वीडियो को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत कानूनी नोटिस भेजे गए। पंजाब पुलिस के नोटिस के बाद फेसबुक ने इन वीडियो को हटा दिया।

सिद्धू ने The Reporters’ Collective से कहा,

जो भी सरकार से सवाल करता है, उस पर कॉपीराइट क्लेम के इस नए तरीके से हमला किया जाता है।