लद्दाख पर चीन से विवाद के बीच भारत ने 28 जगहों को दी आधिकारिक पहचान, मैप जारी
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के स्थानों को मंदारिन नाम देकर अपने क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।
अरुणाचल प्रदेश के बाद अब केंद्र सरकार ने लद्दाख के 28 स्थानों और प्राकृतिक भौगोलिक विशेषताओं के नाम औपचारिक रूप से तय कर उन्हें मानचित्र पर दर्ज किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। इनमें पर्वत चोटियां, पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, घाटी, नदी, झील और अन्य भूक्षेत्र शामिल हैं। मंत्रालय ने इन स्थानों को चिह्नित करने वाला एक नक्शा भी जारी किया है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक,
भारतीय सर्वेक्षण विभाग के लद्दाख के मानचित्र पर इन स्थानों की औपचारिक पहचान दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों के बीच इनके बारे में जानकारी बढ़ाना है। मंत्रालय ने बताया कि यह प्रक्रिया लद्दाख प्रशासन के साथ परामर्श करके पूरी की गई है।
इससे पहले अगस्त में केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के नामों का मानकीकरण किया था। उस समय भी संबंधित स्थानों को दिखाने वाला मानचित्र प्रकाशित किया गया था। अब लद्दाख में इसी तरह की प्रक्रिया अपनाकर स्थानीय भौगोलिक पहचान को आधिकारिक दस्तावेजों में स्पष्ट किया गया है।
Firstpost की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है,
जब चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के स्थानों को मंदारिन नाम देकर अपने क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। नक्शों और नामकरण के माध्यम से किसी क्षेत्र पर दावा जताने की इस रणनीति को ‘कार्टोग्राफिक एग्रेशन’, यानी मानचित्र के जरिए आक्रामकता कहा जाता है। चीन इन भारतीय क्षेत्रों को तिब्बत से जोड़कर प्रस्तुत करता है।
चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’, अर्थात दक्षिणी तिब्बत कहता है। भारतीय स्थानों के लिए चीनी नामों का इस्तेमाल केवल नाम बदलने की कवायद नहीं माना जाता। इसके पीछे उन क्षेत्रों की ऐतिहासिक और भौगोलिक पहचान को अपने दावों के अनुरूप पेश करने की कोशिश भी देखी जाती है। अरुणाचल और लद्दाख में नामकरण तथा मानचित्रण की भारतीय प्रक्रिया इसी व्यापक संदर्भ में अहम है।
चीन मामलों की विशेषज्ञ अनुष्का सक्सेना ने इससे पहले एक साक्षात्कार में कहा था कि चीन नाम बदलने की प्रक्रिया के जरिए सबसे पहले इतिहास को नए ढंग से प्रस्तुत करना चाहता है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों पर अपने दावों को मजबूत करना है, जिन्हें वह विवादित बताता है, भले ही वे वास्तव में विवादित न हों।
तक्षशिला संस्थान के भू-रणनीति कार्यक्रम में एसोसिएट फेलो सक्सेना के अनुसार,
चीन यह भी चाहता है कि दूसरे देश और सरकारें उसके दिए नामों का इस्तेमाल करने लगें। इससे संबंधित क्षेत्रों की पहचान धीरे-धीरे चीन की मुख्यभूमि के हिस्से के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, चीन अपनी ‘रेड लाइन्स’ के उल्लंघन वाली कार्रवाइयों के जवाब में भी ऐसी नामकरण प्रक्रियाएं अपनाता है।
लद्दाख के लिए जारी सूची में शामिल सभी 28 स्थान और उनकी भौगोलिक श्रेणियां इस प्रकार हैं:
| क्रमांक | स्थान का नाम | भौगोलिक श्रेणी |
| 1 | अतिशा गिरि | पर्वत चोटी |
| 2 | ब्रांगसा | भूक्षेत्र |
| 3 | चापचिंगल दर्रा | दर्रा |
| 4 | कनिष्क पीक | पर्वत चोटी |
| 5 | करुण पीर | पहाड़ |
| 6 | कुकसेल | भूक्षेत्र |
| 7 | मार्तंड गिरि | पर्वत चोटी |
| 8 | पारपिक | ग्लेशियर |
| 9 | स्कामरी ग्लेशियर | ग्लेशियर |
| 10 | शाचमिर्क दर्रा | दर्रा |
| 11 | श्कोरगा घाटी | घाटी |
| 12 | जोरावर पीक | पर्वत चोटी |
| 13 | देहरा कम्पास | भूक्षेत्र |
| 14 | द्राक कारपो | पहाड़ |
| 15 | गोगरा | भूक्षेत्र |
| 16 | जोलमोरी | पहाड़ |
| 17 | कुमारायन पॉइंट | भूक्षेत्र |
| 18 | पांगलुंग | भूक्षेत्र |
| 19 | रिनचेन जांगपो | पर्वत चोटी |
| 20 | शाक्यश्री गिरि | पर्वत चोटी |
| 21 | गुरु रिनपोछे | झील |
| 22 | शामल लुंगपा | भूक्षेत्र |
| 23 | यांगपा नदी | नदी |
| 24 | हॉट स्प्रिंग | जल निकाय |
| 25 | मारपा लोत्सावा री | पर्वत चोटी |
| 26 | मिलारेपा कांगरी | पर्वत चोटी |
| 27 | शिव री | पर्वत चोटी |
| 28 | महेश्वर री | पर्वत चोटी |
इस सूची में सबसे अधिक 11 पर्वत चोटियां शामिल हैं। इसके अलावा आठ भूक्षेत्र, तीन पहाड़, दो ग्लेशियर और दो दर्रे दर्ज किए गए हैं। एक-एक घाटी, झील, नदी और अन्य जल निकाय को भी आधिकारिक पहचान दी गई है। इस तरह सूची अलग-अलग प्रकार की भौगोलिक विशेषताओं को एक मानचित्र में स्पष्ट रूप से दर्ज करती है।
चीन द्वारा स्थानों के लिए मंदारिन नामों का इस्तेमाल केवल भारत तक सीमित नहीं है। वह तिब्बत के लिए ‘शीजांग’ और पूर्वी तुर्किस्तान के लिए ‘शिनजियांग’ नाम का इस्तेमाल करता है। इन नामों और उनके इस्तेमाल को व्यापक ‘चीनीकरण’ अभियान से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें अल्पसंख्यक समुदायों पर हान पहचान और संस्कृति थोपने तथा उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान मिटाने के आरोप लगते रहे हैं।
अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम घोषित किए जाने के समय एक अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा था कि नक्शों को लेकर अस्पष्टता का फायदा उठाकर चीन भारतीय क्षेत्रों को काल्पनिक नाम देता है। अधिकारी के अनुसार,
भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्र पर स्थानों को दर्ज करने से स्पष्टता आती है, भारत की स्थिति मजबूत होती है और भौगोलिक विशेषताओं का आधिकारिक दस्तावेजीकरण बेहतर होता है। लद्दाख की नई सूची भी स्थानों की पहचान को इसी तरह स्पष्ट करती है।