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SCO फोरम में भारत ने क्यों भेजा पाकिस्तान को न्यौता?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
SCO फोरम में भारत ने क्यों भेजा पाकिस्तान को न्यौता?

नई दिल्ली में 20 से 22 नवंबर तक होने वाले पहले सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम में संगठन के सभी 10 सदस्य देशों को बुलाया गया है।

भारत ने 20 से 22 नवंबर तक नई दिल्ली में होने वाले पहले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित किया है। भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खींची को इस फोरम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यदि वे इसमें शामिल होते हैं, तो मई 2023 के बाद किसी पाकिस्तानी मंत्री की यह पहली भारत यात्रा होगी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनावों के बीच प्रेक्षकों ने भारत की इस पहल पर आश्चर्य व्यक्त किया है।

https://www.brecorder.com/news/40445379/india-invites-pakistan-to-sco-culture-ministers-meeting-in-delhi


पाकिस्तान के अलावा इस आयोजन में SCO के सभी 10 सदस्य देशों को शामिल होने का न्योता दिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर को दुशांबे में संगठन की शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक के दौरान फोरम की मेजबानी का ऐलान किया था। उन्होंने उस मौके पर सदस्य देशों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था।

यह बैठक तीन दिन चलेगी और 22 नवंबर को समाप्त होगी। इस बैठक में सदस्य देशों के रूप में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है; अफगानिस्तान और मंगोलिया पर्यवेक्षक हैं और संगठन के 15 संवाद साझेदार भी हैं।

न्योता ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के रिश्तों में तनाव अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले और इसके बाद मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा। ऐसे में यदि खिची भारत आते हैं तो मई 2023 के बाद किसी वरिष्ठ पाकिस्तानी मंत्री की यह पहली यात्रा होगी, जब मई 2023 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए थे। मौजूदा निमंत्रण को लेकर द्विपक्षीय बातचीत फिर शुरू होने की संभावना है लेकिन अभी किसी पक्ष ने इस पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं की है।

इंडो-पैसिफिक मामलों के विशेषज्ञ डेरेक जे ग्रॉसमैन ने नवभारत टाइम्स से कहा कि अन्य SCO सदस्यों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना भारत की जिम्मेदारी का हिस्सा है। उनके मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच कई वर्षों से द्विपक्षीय चर्चा नहीं हुई है। इस तर्क के तहत निमंत्रण संगठन के सदस्य देशों के साथ भारत के व्यवहार से जुड़ा है, न कि जरूरी तौर पर द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत से।

शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस नीति पर सवाल उठाया। नवभारत टाइम्स में छपे उनके बयान में पाकिस्तान को बातचीत और क्रिकेट के लिए बुलाने तथा साथ ही कड़े कदम उठाने की बात करने को पाखंड बताया गया।


दरअसल, SCO चार्टर के अनुसार इस संगठन के शिखर सम्मेलन और मंत्री स्तर की बैठकों के लिए सदस्य देशों को आमंत्रित करना मेजबान की जिम्मेदारी है और ऐसे में पाकिस्तान को न्यौता देना भारत की मज़बूरी की तरह देखा जाना चाहिए न कि दोस्ती के न्यौते की तरह। भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है और अभी हाल में ही राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के दुशांबे में में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) के काउंसिल ऑफ़ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग में आतंकवाद के खिलाफ समान रुख और दोहरे मापदंड से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया था; उस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार मौजूद थे।


फिलहाल पाकिस्तान 1 सितंबर को 2026-27 के लिए SCO राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता कर रहा है और हालांकि उसका भारत में प्रस्तावित बैठक में आना बाध्यता नहीं है लेकिन अगर वह भारत के आमंत्रण को अस्वीकार करता है, तो ईरान-अमरीका युद्ध में मध्यस्थता के कारण उसके बढ़े हुए डिप्लोमेटिक क़द पर इसका बुरा असर पड़ेगा। वहीं, पाकिस्तान के मंत्री का भारत में अतिथि के रूप में आना भारतीय जनता पार्टी के उस नैरेटिव के लिए दिक़्क़ततलब हो सकता है जिसके तहत पाकिस्तान को लगातार दुश्मन देश बताते हुए पुरानी कांग्रेस सरकारों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ़ कथित रूप से कड़े क़दम न उठाए जाने की निंदा की जाती रही है।