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दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद और क़ब्रिस्तान को नोटिस को लेकर उठापठक तेज़: जमीयत की किरण रिजिजू से मुलाक़ात

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
दिल्ली में रेस कोर्स मस्जिद और क़ब्रिस्तान को नोटिस को लेकर उठापठक तेज़: जमीयत की किरण रिजिजू से मुलाक़ात

शालीमार बाग़ मस्जिद के बाद रेसकोर्स मस्जिद को खतरा

दिल्ली के ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और उससे लगे कब्रिस्तान के संरक्षण का मामला केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के सामने उठाया गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने 19 अक्टूबर 2026 को उनसे मुलाकात कर मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति बहाल करने, बिजली और पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू कराने तथा मस्जिद और कब्रिस्तान को संभावित ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा


जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने यह मुलाकात संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की ओर से की। ज्ञापन में मस्जिद और कब्रिस्तान की धार्मिक, ऐतिहासिक तथा कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद कासिम नूरी, उपाध्यक्ष मौलाना कारी आरिफ कासमी, संगठन के अन्य पदाधिकारी और मस्जिद के इमाम मौलाना हारून राही भी शामिल थे।


यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब रेस कोर्स मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) और मुस्लिम संगठनों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एलएंडडीओ ने मस्जिद की जमीन को सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जा बताते हुए परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में कथित तौर पर छह दिनों के भीतर जगह खाली करने को कहा गया है। मस्जिद के इमाम मौलाना मुहम्मद हारून ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी है तथा नमाजियों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगा दी हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने ज्ञापन में मस्जिद के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए सरकारी दस्तावेजों का हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) की विरासत सूची में मस्जिद का उल्लेख क्रमांक 22 पर है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1977 के दिल्ली गजट में भी इसका उल्लेख क्रमांक 18 पर होने का दावा किया गया है। संगठन ने यह भी कहा है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध संशोधित सूची में मस्जिद और उसकी संपत्ति का विवरण दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर जमीयत ने मांग की है कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले संपत्ति की कानूनी स्थिति की विस्तृत जांच की जाए।


ज्ञापन में दिल्ली वक्फ बोर्ड और एनडीएमसी सहित संबंधित सरकारी एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट लेने की मांग भी की गई है। जमीयत का कहना है कि मस्जिद और कब्रिस्तान के संबंध में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, विरासत संबंधी दस्तावेजों और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि कानूनी स्थिति स्पष्ट किए बिना ध्वस्तीकरण या अन्य कठोर कार्रवाई से ऐसी क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। उसने मस्जिद तक नमाजियों की पहुंच बहाल करने और बिजली-पानी की आपूर्ति तत्काल शुरू कराने पर जोर दिया है।

मस्जिद के इमाम के अनुसार, यह धार्मिक स्थल लंबे समय से स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज अदा करने का प्रमुख स्थान रहा है। मीडिया रिपोर्टों में मस्जिद की क्षमता लगभग 800 नमाजियों की बताई गई है। इस मामले को लेकर अन्य मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी चिंता जताई है। हालांकि, मस्जिद की जमीन के स्वामित्व और उसके कानूनी दर्जे को लेकर संबंधित सरकारी विभागों का पक्ष तथा उपलब्ध दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच इस विवाद के निर्णायक पहलू हैं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों और चिंताओं को सुनने के बाद आश्वासन दिया कि वह इस मामले में अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेंगे। हालांकि, जमीयत की ओर से जारी जानकारी में किसी ठोस सरकारी आदेश या बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण के लिए वह सभी उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेगा।

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इसके पहले शालीमार बाग में सड़क के चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के गिराए जाने का मामला सामने आया था। दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मदीना मस्जिद के ऊपरी हिस्सों को 23 सितंबर 2026 की रात नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत ध्वस्त कर दिया। मैक्स अस्पताल रोड पर हुई इस कार्रवाई में आसपास के कुछ मकान भी गिराए गए। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का हवाला दिया, जबकि मस्जिद प्रबंधन ने नोटिस और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इमाम ने आरोप लगाया कि उन्हें कुरान और अन्य सामान निकालने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।