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खड़गे के बयान पर मचा सियासी घमासान, क्या सत्ता से कभी नहीं जाएगी बीजेपी?

Pro. Hemantkumar Shah Pro. Hemantkumar Shah | 2h ago · 4 min read
खड़गे के बयान पर मचा सियासी घमासान, क्या सत्ता से कभी नहीं जाएगी बीजेपी?

उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और इसके बावजूद वहाँ तथाकथित शुद्धीकरण करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पटना में एक सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने बीच में बोलकर कहा, “मोदी नहीं जाएगा।” तब खड़गे ने चिल्लाकर कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा। बाप भी जाएगा। मोदी का बाप भी जाएगा।” कोई अंधभक्त खडगे को बोलने से रोके तो फिर गुस्सा आएगा ही। देखिए, सत्ता से तो सभी को जाना होता है। कोई हमेशा के लिए सत्ता में नहीं रहता। कम से कम जब उसकी मृत्यु होती है, तब तो वह चला ही जाता है। सवाल यह है कि वह कैसे जाता है।

अब सवाल यह है कि भाजपा के लोग खड़गे द्वारा कही गई बात का विरोध कर रहे हैं। खड़गे की उम्र 84 वर्ष है और नरेंद्र मोदी की उम्र 75 वर्ष है। यानी मोदी खड़गे से लगभग एक दशक छोटे हैं। अब मोदी ने 2004 में सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा था। उस समय मोदी 55 वर्ष के थे और सोनिया गांधी उनसे लगभग चार वर्ष बड़ी, 59 वर्ष की थीं। अपने से अधिक उम्र की महिला को यदि जर्सी गाय कहा जा सकता है, तो अधिक उम्र के खड़गे अपने से कम उम्र के मोदी के लिए “मोदी का बाप भी जाएगा” ऐसा कह ही सकते हैं न? मोदी ने तो सोनिया गांधी को एक पशु कहा था। खड़गे ने तो मोदी या उनके पिताजी को ऐसा कुछ कहा ही नहीं है।

कहा जाता है कि मोदी ने 2004 में ही राहुल गांधी को “हाइब्रिड बछड़ा” भी कहा था।

अब मोदी, भाजपा और RSS को उन्हीं की भाषा में थोड़ा-थोड़ा जवाब मिल रहा है, ऐसा कहा जा सकता है। खड़गे की भाषा में गुस्सा है, लेकिन उसमें निम्न स्तर की बात नहीं लगती। मोदी की भाषा में तो निम्न स्तर साफ दिखाई देता है। खड़गे एक बड़े कद के दलित नेता हैं, कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने अभी हाल ही में उत्तराखंड में एक मैदान में एक सभा को संबोधित किया और उसके बाद उस मैदान का शुद्धीकरण किया गया! उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और इसके बावजूद वहाँ तथाकथित शुद्धीकरण करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

मोदी भी भाजपा के हैं, वे RSS के प्रचारक हैं और RSS तो कहता है कि वह व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है। इसके बावजूद मोदी का कैसा व्यक्ति निर्माण हुआ है कि वे अपनी ही पार्टी की सरकार से खड़गे का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को नहीं कहते?

खड़गे का गुस्सा अब फूट पड़ा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता। ऐसा लगता है कि कांग्रेस के लोग अभी तो शिष्ट भाषा का ही प्रयोग कर रहे हैं। यदि वे भाजपा की भाषा अपनाने लगेंगे, तब क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि वह भाषा तो भाजपा ने ही कांग्रेस को सिखाई है।

मुझे एक बात याद आती है। यह बात उस समय की है जब मैं लगभग बारह वर्ष का था, यानी 1970-71 की। मेरे पिताजी दशरथलाल शाह, महात्मा गांधी द्वारा 1920 में स्थापित गुजरात विद्यापीठ में अध्यापक थे। मोरारजी देसाई कुलपति के रूप में हर वर्ष अक्टूबर महीने में गुजरात विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह के अवसर पर एक सप्ताह के लिए विद्यापीठ में ठहरने आते थे। मेरे पिताजी और मोरारजी देसाई के बीच अच्छा परिचय था। इसलिए पिताजी किसी बात के लिए मोरारजी देसाई के पास गए थे। उनकी बातचीत चल ही रही थी कि मोरारजी देसाई ने दो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को अपने कमरे में आने दिया।

मेरे पिताजी की उपस्थिति में उन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उस समय के हितेंद्र देसाई के मंत्रिमंडल के मंत्री ठाकोरभाई देसाई के बारे में कुछ शिकायतें करनी शुरू कर दीं। मोरारजी देसाई उनकी शिकायतें बहुत शांति से सुनते रहे। फिर उन दोनों को बीच में ही रोककर मोरारजी देसाई ने कहा, “कांग्रेस कोई भजन मंडली नहीं है।” मेरे पिताजी ने यह प्रसंग उसी दिन घर आकर सुनाया था।

मुझे लगता है कि कांग्रेस 2014 से 2024 तक किसी गाँव की भजन मंडली जैसी बन गई थी। 2024 के बाद कांग्रेस लोकतंत्र का भजन करने से जाग गई है और अब वह लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए मैदान में उतर पड़ी है, जैसे वह 1915 से 1947 तक आजादी हासिल करने के लिए मैदान में उतरी थी। उसे भी सत्ता चाहिए और जिन राज्यों में वह सत्ता में है, वहाँ उसे अपनी सत्ता बनाए रखनी है।

अनुराग ठाकुर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बने थे। 27 जनवरी, 2020 को “देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को” बोलने वाले अनुराग ठाकुर उसके बाद भी पाँच वर्ष तक मोदी के मंत्रिमंडल में बने ही रहे थे। मानो देशभक्ति पर भाजपा और RSS के लोगों का ही एकाधिकार हो। अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल माने जाने वाले व्यक्ति को मोदी राज्यपाल बनाते हैं, तो खड़गे को गुस्सा आएगा ही। खड़गे भी देशभक्त हैं। इसलिए खड़गे की भाषा और उसमें मौजूद गुस्से को इसी दृष्टि से देखने की जरूरत है।

Pro. Hemantkumar Shah

Pro. Hemantkumar Shah

प्रो शाह जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और गुजरात में लंबे समय तक अध्यापन के बाद लेखन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।