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CJP-AISA का आरोप, नेहा बोरा और दीपके का लोकेशन नहीं बता रही दिल्ली पुलिस

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
CJP-AISA का आरोप, नेहा बोरा और दीपके का लोकेशन नहीं बता रही दिल्ली पुलिस

नेहा बोरा की हिरासत को लेकर AISA ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

दिल्ली में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह मार्च शाम 5 बजे कनॉट प्लेस में आयोजित किया जाना था।

पुलिस ने प्रदर्शन से कुछ घंटे पहले दीपके को नोटिस जारी कर मार्च में शामिल नहीं होने की हिदायत दी थी। वहीं, नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास से हिरासत में लिया गया। इस दौरान सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की भारी तैनाती रही और कम से कम 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शुक्रवार को झंडेवालान स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। वह कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने के लिए निकल रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया और बताया कि उनके खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया।


CJP की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में दीपके को यह कहते सुना जा सकता है कि वह अकेले थे और केवल घर से बाहर निकलने से उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा है। हालांकि, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मी उस आवास पर पहुंचे, जहां दीपके रह रहे थे। वहां उन्हें एक नोटिस दिया गया, जिसमें मार्च में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया था। नोटिस में कहा गया कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थान नहीं है। पुलिस ने इसके साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने का भी हवाला दिया।

AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी शुक्रवार को हिरासत में लिया गया। वह मंडी हाउस के पास से मार्च में शामिल होने के लिए आगे बढ़ रही थीं। बताया गया कि मार्च शुरू करने के कुछ ही समय बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

नेहा बोरा की हिरासत को लेकर AISA ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन का दावा है कि नेहा को मंगोलपुरी स्थित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स कार्यालय से काले शीशों वाली एक कार में बाहर ले जाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने वकीलों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी गई।


AISA और CJP ने हिरासत में लिए गए नेताओं के ठिकाने तथा उनसे संपर्क नहीं हो पाने को लेकर चिंता जताई। CJP का आरोप है कि दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उन्हें वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।


‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। कनॉट प्लेस, जनपथ रोड और मंडी हाउस के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। हिरासत की कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। वहां प्रदर्शनकारियों, कैमरा क्रू और सुरक्षाकर्मियों की भीड़ जमा हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में कम से कम 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रस्तावित मार्च पर नजर रखने के लिए सेंट्रल पार्क और राजीव चौक के आसपास 10 से अधिक सीसीटीवी कैमरे भी लगाए थे। इसके अलावा भीड़ की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

प्रदर्शन से पहले पुलिस की ओर से जारी नोटिस और नेताओं की हिरासत ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। CJP और AISA की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च ऐसे समय आयोजित किया जा रहा था, जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। इससे पहले 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। दोनों जंतर-मंतर में प्रवेश कर गए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई। बताया गया कि इससे पहले जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अधिसूचित स्थानों की सूची से हटा दिया गया था। CJP का प्रस्तावित मार्च इसी पृष्ठभूमि में आयोजित किया जा रहा था। संगठन ने कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने इसे अनुमति प्राप्त प्रदर्शन स्थल नहीं होने का हवाला देकर रोकने की कोशिश की।

CJP प्रमुख अभिजीत दीपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत पर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एमके स्टालिन ने भी प्रतिक्रिया दी। शुक्रवार शाम को उन्होंने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की।


स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि,

दीपके और नेहा को हिरासत में लेना ‘खुले तौर पर अवैध और बेहद अमानवीय’ है। उन्होंने दोनों के ठिकाने को लेकर भी सवाल उठाए और केंद्र सरकार से उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की।

स्टालिन ने कहा कि,

केंद्र सरकार को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना बंद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश उसे और मजबूत करेगी।

CJP और AISA के नेताओं की हिरासत के बाद दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की एहतियाती कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। एक ओर पुलिस ने कनॉट प्लेस को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं होने और BNSS की धारा 163 का हवाला दिया, वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों ने कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध को रोकने की कोशिश बताया है।

फिलहाल, दीपके और नेहा की हिरासत को लेकर CJP और AISA ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया और दोनों नेताओं के ठिकाने की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।