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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने ट्रेन से घसीटकर उतारा

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे छात्रों को पुलिस ने ट्रेन से घसीटकर उतारा

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छात्रों ने आरोप लगाया है कि पुलिस उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोक रही है।

चुनाव आयोग की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली जा रहे छात्रों को मध्य प्रदेश पुलिस ने भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में रोककर ट्रेनों से उतार दिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कम से कम 30 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उन्हें अपने गृह राज्यों में लौटने के लिए समझाया जा रहा है।

अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA)की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी एक्स पोस्ट करते पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की है।


आइसा नेता नेहा बोरा ने कहा कि,

लोकतंत्र के मुखौटे के पीछे छिपा एक कायर तानाशाह अब बेनकाब हो गया है। विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे दर्जनों छात्रों को मध्य प्रदेश के इटारसी में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बुलाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि रोके गए लोगों में गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र से दिल्ली जा रहे प्रदर्शनकारी शामिल हैं।

अधिकारी ने कहा,

हमने प्रदर्शनकारियों को ट्रेनों से उतार दिया है। उन्हें हिरासत में रखा गया है और अपने राज्यों में वापस जाने के लिए समझाया जा रहा है। हमने कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।”

CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। हालांकि, अनुमति नहीं दिए जाने का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने लोगों को जुटने से रोकने के लिए कई पाबंदियां लगाई हैं। इनमें राजधानी के रेलवे स्टेशनों पर रुकने वाली ट्रेनों पर प्रतिबंध और कई दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद करना शामिल है।

दिल्ली जा रहे लोगों और छात्र कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोक रही है।
गुरुवार रात CJP के आशुतोष रांका ने दावा किया था कि देशभर में 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है।


Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, इटारसी में गुरुवार को पुलिस, राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने गोवा एक्सप्रेस से पुणे से दिल्ली जा रहे एक समूह को उतार दिया। GRP अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली जा रहे युवाओं के एक बड़े समूह से सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होने की सूचना मिलने के बाद 21 लोगों को हिरासत में लिया गया। उन्हें इटारसी के एक होटल में ले जाया गया और पुणे लौटने के लिए कहा गया।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की पुणे जिला संयोजक श्रावणी बुवा ने गुरुवार को Indian Express को बताया कि गोवा एक्सप्रेस में सवार होने से एक दिन पहले पुलिस ने पुणे विश्वविद्यालय के छात्रों का औंध तक पीछा किया था। उन्होंने दावा किया कि ट्रेन में उनके साथ 22 कार्यकर्ता यात्रा कर रहे थे। महाराष्ट्र के भुसावल रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें और कार्यकर्ता निहारिका भोसले को ट्रेन से उतारने की कोशिश की थी। उस समय उन्होंने ट्रेन से उतरने से इनकार कर दिया था। बाद में बुवा और उनके साथियों को इटारसी स्टेशन पर उतार दिया गया।

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इस बीच, CJP के प्रवक्ता दीपक बालियान को राजस्थान के अलवर जिले में हिरासत में लेने के बाद नजरबंद किए जाने का आरोप सामने आया है। उनके वकील ने स्क्रॉल को बताया कि पुलिस ने बालियान को रात में उठाया और करीब तीन बजे छोड़ दिया। हालांकि, अधिवक्ता अखिल चौधरी का आरोप है कि पुलिस ने कोई जब्ती मेमो या हैश वैल्यू दिए बिना उनका फोन अपने पास रख लिया।

चौधरी ने कहा,

उन्हें मन्खेड़ा गांव स्थित उनके घर में गैरकानूनी तरीके से नजरबंद किया गया है। घर के बाहर करीब 20 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो उनकी आवाजाही रोक रहे हैं। हमारी मांग है कि पुलिस तुरंत वहां से हटे और उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने दिया जाए।”

इससे पहले, आठ अक्टूबर को CJP नेता अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया था कि राजस्थान पुलिस ने बालियान और उनके भाई के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उनके भाई के सिर में गंभीर चोट आई। अलवर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने सिर में चोट लगने के आरोप को झूठा बताया। हालांकि, बालियान को नजरबंद किए जाने के सवाल पर उन्होंने जवाब नहीं दिया।

बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शनिवार, 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसमें कई विपक्षी दलों के शामिल होने की भी संभावना है। दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है।

PTI


भीड़ जुटने की आशंका के बीच पुलिस की तैयारियां सड़कों और प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं हैं। रेलवे सेवाओं, ऐप आधारित टैक्सियों, होटल बुकिंग और मेट्रो के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। हिरासत में लिए जाने वाले लोगों के लिए अलग केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। कुछ प्रतिबंध घोषित हो चुके हैं, जबकि मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट पर पाबंदियों जैसे कदमों पर अभी विचार चल रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के आदेश पर केद्र सरकार को फटकार लगाई है।

अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह ठप नहीं किया जा सकता। ऐसी बंदिशें उन आम नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करेंगी, जो रोजमर्रा के काम और अपनी आजीविका के लिए इन सेवाओं पर निर्भर हैं।